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Budget 2021: विनिवेश का टार्गेट नहीं हो सकेगा पूरा, अगले साल के लिए 2 लाख करोड़ रुपये हो सकता है लक्ष्य

वित्त वर्ष 2021 के लिए सरकार ने विनिवेश का लक्ष्य 2.1 लाख करोड़ रुपये रखा था.
वित्त वर्ष 2021 के लिए सरकार ने विनिवेश का लक्ष्य 2.1 लाख करोड़ रुपये रखा था.

Disinvestment Target: चालू वित्त वर्ष में विनिवेश का लक्ष्य नहीं पूरा हो सकेगा. वित्त वर्ष 2021 के लिए सरकार ने विनिवेश का लक्ष्य 2.1 लाख करोड़ रुपये रखा था, जिसका एक बड़ा हिस्सा BPCL की रणनीतिक बिक्री, LIC IPO और एअर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन से आने वाली थी. अब अगले वित्त वर्ष के लिए 2 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य तय हो सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 27, 2021, 8:46 AM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी ने वित्तीय स्तर पर भी केंद्र सरकार के लिए परेशानियां खड़ी कर दी है. चालू वित्त वर्ष में विनिवेश (Disinvestment) का आंकड़ा करीब 30-40 हजार करोड़ रुपये तक ही पहुंच सकता है, जोकि पिछले 5 साल में सबसे कम होगा. सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए विनिवेश का लक्ष्य 2.1 लाख करोड़ रुपये रखा था और अब करीब 14-19 फीसदी तक ही पूरा होने की उम्मीद है. हालांकि, अगले वित्त वर्ष के लिए सरकार विनिवेश लक्ष्य 2 लाख करोड़ रुपये ही रखेगी. दरअसल, ​BPCL की रणनीतिक बिक्री से लेकर भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का आईपीओ भी नये वित्तीय वर्ष में पूरा होने के आसार हैं. इसके अलावा कुछ अन्य प्राइवेटाइजेशन डील्स (Privatization Deals) भी वित्त वर्ष 2022 तक पूरा होने का अनुमान है.

इस साल वित्त वर्ष 2021 के लिए तय किए गए कुल विनिवेश लक्ष्य में से सरकार के पास केवल 17,958 करोड़ रुपये यानी 8.5 फीसदी ही आए हैं. सरकार ​ने विदेश संचार निगम लिमिटेड में अपने बाकी बचे हुए 26.12 फीसदी की हिस्सेदारी टाटा कम्युनिकेशंस (Tata Communications) को बेच​ दिया है. फरवरी-मार्च तक इस डील का 8,000 करोड़ रुपये सरकार को मिल जाएंगे.

मार्च तक सीपीएसई में हिस्सेदारी कम कर सकती है सरकार
बाजार में हालिया तेजी का फायदा उठाते हुए मार्च तक केंद्र सरकार कुछ CPSE में हिस्सेदारी भी ऑफर फॉर सेल (OFS) के ​जरिए बेच सकती है. कई CPSE ने पहले ही अपने शेयर्स बायबैक कर लिया है. जबकि, कोल इंडिया (Coal India) समेत कुछ अन्य सरकारी कंपनियां भी 31 मार्च 2021 से पहले सरकार से कुछ शेयर्स बायबैक कर सकती हैं. इसके बाद भी विनिवेश की कुल रकम वित्त वर्ष 2016 में 23,997 करोड़ रुपये के बाद सबसे कम होगी.
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वित्त वर्ष 2022 तक पूरा होगा ​बीपीसीएल में हिस्सेदारी बेचने का लक्ष्य
सरकार ने बीपीसीएल में 52.98 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का लक्ष्य रखा था. लेकिन कई तरह की देरी से अब अगले वित्त वर्ष तक इसके पूरा होने का अनुमान है. नवंबर 2019 में जब केंद्रीय कैबिनेट के सामने बीपीसीएल में यह हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव था, जब इसकी कीमत करीब 60,000 करोड़ रुपये थी. मौजूदा बाजार भाव पर यह घटकर 44,500 करोड़ रुपये पर आ गई है. हालांकि, वैलुएशन और प्रीमियम के बाद ही वास्तविक रकम का पता चल सकेगा.

एलआईसी के आईपीओ में भी देरी
चालू वित्त वर्ष में एलआईसी का आईपीओ भी विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने में दूसरा सबसे बड़ा अंश होता. सुस्त तैयारियों की वजह से अब मार्च तक LIC IPO नहीं पूरा हो सकेगा. अनुमान के आधार पर कहा जा रहा है कि एलआईसी की वैलुएशन करीब 8 से 11.5 लाख करोड़ रुपये है. इस हिसाब से 10 फीसदी हिस्सेदारी के लिए भी आईपीओ के जरिए 80 से 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं.

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अगले वित्त वर्ष में एअर इंडिया का प्राइवेटाइजेशन होगा पूरा
सरकार विमान कंपनी एअर इंडिया (Air India) के प्राइवेटाइजेशन के लिए फाइनेंशियल बिड की प्रक्रिया भी मार्च-अप्रैल तक हो सकेगी. आधिकारियों को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2022 तक यह डील पूरा हो जाएगा. एअर इंडिया के लिए बोली करीब 20,000 करोड़ रुपये होगी. केंद्र सरकार को 3,000 करोड़ रुपये की नकदी मिल सकेगी. बीपीसीएल के अलावा एअर इंडिया डील भी 31 मार्च 2021 तक पूरा होने का अनुमान है.
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