Income Tax Update : डिविडेंड पर टीडीएस बचाने का जानें इतना आसान तरीका

म्यूचुअल फंड्स यूनिट्स से होने वाली कमाई पर नहीं, बल्कि फंडों की तरफ से बांटे जाने वाले डिविडेंड पर टीडीएस लागू होगा.

म्यूचुअल फंड्स यूनिट्स से होने वाली कमाई पर नहीं, बल्कि फंडों की तरफ से बांटे जाने वाले डिविडेंड पर टीडीएस लागू होगा.

शेयरहोल्डर्स या यूनिटहोल्डर्स को बांटे जाने वाले डिविडेंड पर 10% TDS लगेगा, PAN नहीं होने की स्थिति में 20% TDS कटेगा

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 14, 2021, 8:18 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष 2021-22 के लिए डिविडेंट डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (DDT) को खत्म कर दिया. अब इस टैक्स की बजाय कंपनी या म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) की तरफ से शेयरहोल्डर्स (Shareholders) या यूनिटहोल्डर्स (Unitholders) को बांटे जाने वाले डिविडेंड ( Dividend ) पर 10% का टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस, TDS) लगेगा. यदि पैन नंबर (PAN) नहीं है तब TDS 20% कटेगा.

बजट में म्यूचुअल फंड्स यूनिट्स से होने वाली कमाई पर नहीं, बल्कि फंडों की तरफ से बांटे जाने वाले डिविडेंड पर टीडीएस लागू होगा. डिविडेंड से 5,000 रुपए सालाना से ज्यादा की कमाई होने पर अब 10% TDS लगेगा. साथ ही डिविडेंड को दोबारा निवेश करने पर भी TDS कटेगा. इनकम टैक्स रिटर्न में इसकी जानकारी देनी होगी. इसके लिए इनकम टैक्स ऐक्ट में सेक्शन 194K जोड़ा गया है. 60 साल से कम उम्र वाले फॉर्म 15G का फायदा ले सकते है. वहीं सीनियर सिटीजन, फॉर्म 15H के जरिए TDS बचा सकते है. फॉर्म 15G और 15H के जरिए डिविडेंड पर TDS बचा सकते है.

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इस स्थिति में डिविडेंड से होने वाला कमाई पर टैक्स नहीं लगेगा

अगर टैक्सपेयर की कुल इनकम 2.5 लाख रुपए से कम है और इसमें डिविडेंड इनकम शामिल है तो फिर डिविडेंड से होने वाला कमाई पर टैक्स नहीं लगेगा. लेकिन ऐसे लोगों के लिए इनकम का रिटर्न फाइल करना जरूरी होगा. इससे आप डिविडेंड इनकम पर काटे गए TDS को रिफंड के तौर पर वापस क्लेम कर सकेंगे.वहीं, डिविडेंड इनकम और TDS की डिटेल्स अब फॉर्म 26AS के नए फॉर्मेट पर उपलब्ध होंगी, जिससे इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना आसान हो जाएगा.

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रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट (RTA) के पास जमा करें फार्म

अगर आपने शेयर या म्यूचुअल फंड्स से मिले डिविडेंड पर TDS कटाया है तो टैक्स डिडक्शन के लिए आपको फॉर्म 15G या फॉर्म 15H सीधे कंपनी में जमा करा सकते हैं. वहीं, म्यूचुअल फंड स्कीम्स पर डिविडेंड पेआउट ऑप्शन के मामले में आप इस फॉर्म को सीधे एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) या उनके रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट (RTA) के पास जमा करा सकते हैं. गौरतलब है कि फॉर्म 15G या फॉर्म 15H को कंपनियों, AMCs या RTAs की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन सब्मिट किया जा सकता हैं. इसके लिए आपको अपनी डिटेल्स भरनी होंगी. जैसे- पैन नंबर, फंड हाउस (AMC) का नाम, फोलियो नंबर आदि. इससे आप डिविडेंड इनकम पर TDS कटाने से बच जाएंगे.

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आय एग्जेंप्शन लिमिट से कम होने पर ही जमा कर सकते हैं फॉर्म 15G व 15H

इनकम टैक्स एक्ट के मुताबिक 15G या फॉर्म 15H वहीं लोग जमा कर सकते हैं जिनकी आय एग्जेंप्शन लिमिट से कम है. 60 वर्ष से कम की उम्र के लोगों के लिए 2.5 लाख रुपये तक की आय एग्जेंप्टेड है. वहीं, 60 वर्ष से अधिक और 80 वर्ष से कम की उम्र के लोगों के लिए 3 लाख रुपए और 80 साल से अधिक की उम्र के लोगों के लिए 5 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स लाइबिलिटी नहीं बनती है.
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