इस दिवाली पर कैसी हैं साउथ इंडिया के बाजारों में रौनक?

इस दिवाली पर कैसी हैं साउथ इंडिया के बाजारों में रौनक?
इस दिवाली पर कैसी हैं साउथ इंडिया के बाजारों में रौनक?

नेटवर्क 18 की सहयोगी वेबसाइट मनकंट्रोल ने बेंगलुरु के व्यापारियों से इस दिवाली बिजनेस के बारे में बात की.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 11, 2020, 11:22 AM IST
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नई दिल्ली. दक्षिण भारत के कर्नाटक और तमिलनाडु राज्यों में इस साल दिवाली (Diwali 2020) के सामानों के व्यापारियों के लिए दीपोत्सव की रौनक बढ़ने की संभावना नहीं है. COVID-19 संबंधित प्रतिबंधों के कारण पहले से ही व्यापार में कमी देखने को मिली है. चाइनीज़ प्रोडक्ट जैसे लाइट्स इत्यादि चीजों के लिए इस साल कम ग्राहक आए हैं. नेटवर्क 18 की सहयोगी वेबसाइट मनकंट्रोल ने बेंगलुरु के व्यापारियों से इस दिवाली बिजनेस के बारे में बात की.इलेक्ट्रोनिक सिटी में कम ग्राहकों से नाखुश एक व्यापारी का कहना था कि इस साल फेस्टिव लाइट्स आदि उत्पादों का मिलना मुश्किल रहा. इससे बिक्री प्रभावित हुई है.

उनका कहना था कि मेरी दुकान में फेस्टिव लाइट्स में 65 फीसदी कमी आई है और मुझे अन्य विकल्पों की तरफ देखना पड़ रहा है.बेंगलुरु के सबसे बड़े थोक बाजारों में से एक केआर मार्केट में सजावटी रोशनी बेचने वाली एक छोटी सी दुकान चलाने वाले विनोद कुमार ने कहा कि वर्तमान में उन्हें ज्यादातर ऐसे उत्पाद मिल रहे हैं जो मुंबई या दिल्ली में बनाए जाते हैं.

हम इस साल भारत में बने उत्पादों पर अधिक भरोसा कर रहे हैं.इस मुश्किल समय में कीमतों का निर्धारण एक फैक्टर रहा है. इलेक्ट्रोनिक सिटी के व्यापारी ने बताया कि चीन से आने वाली लाइट्स की कीमत 200-300 रूपये से कम नहीं होती है.



अन्य लाइट्स की कीमत 500 रूपये है. ग्राहक मंहगा उत्पाद क्यों खरीदेंगे. हमारे पार मंहगा उत्पाद बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. इसलिए बिक्री कम है.
पटाखों की सेल्स में नहीं दिख रहा है खास रुझान- तमिलनाडु-कर्नाटक सीमा पर होसुर औद्योगिक केंद्र पर एक बड़ा पटाखा मार्केट है. वहां के विक्रेताओं से मनीकंट्रोल ने बातचीत की. वहां की तस्वीर भी कुछ अच्छी नहीं थी. सप्ताह के अंत में भी पटाखों कुछ ही खरीददार दिखाई दे रहे थे जो विक्रेताओं को चिंतित कर रहा है. जब भी पटाखों की दुकान के पास से कोई वाहन गुजरता है, तो दुकानदारों में उत्साह होता है, कि कोई खरीददार होगा मगर हर बार उन्हें निराश होना पड़ता है.

तमिलनाडु के शिवकाशी में भारतीय पटाखों के उत्पादकों को भी कोरोना वायरस के कारण प्रभावित होना पड़ा है. भारतीय आतिशबाजी निर्माता संघ के उपाध्यक्ष राजेंद्र राजा ने कहा कि चीनी उत्पाद पिछले कुछ वर्षों में एक मुद्दा रहा है लेकिन अब सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की बदौलत कोई मुद्दा नहीं है. कोरोना वायरस के कारण ग्राहकों में कमी है.

कन्याकुमारी के एक थोक व्यापारी गणेश ने कहा कि इस साल उन्होंने जो पटाखे खरीदे, उत्पादन में कमी के कारण उनकी मात्रा घट गई. राजा ने कहा कि महामारी के कारण शिवकाशी में कारखाने आधे से भी कम चल रहे थे. इसलिए 100 प्रतिशत क्षमता के बजाय हमने केवल 40 प्रतिशत का निर्माण किया और केवल 20 प्रतिशत की बिक्री की उम्मीद है.

पटाखे बेचने वाले व्यापारियों के लिए स्थिति और खराब होने की संभावना है क्योंकि कर्नाटक सरकार ने 6 नवंबर को पटाखों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी. दिल्ली, ओडिशा और राजस्थान ने भी कोविड 19 के प्रसार को ध्यान में रखते हुए पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया है.

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दिवाली पर सुस्ती-डेकोरेशन लाइट्स का कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए भी दृश्य ठीक नहीं है. बेंगलुरु के केआर मार्केट के कुमार ने कहा कि आमतौर पर हमारे पास ज्यादातर लोग हाउसिंग सोसाइटीज या दिवाली समारोह या आयोजनों में दिवाली मनाने के लिए सजावटी लाइटें खरीदने के लिए आते हैं. लेकिन इस साल यह सब गायब है. पहले इस समय के दौरान शाम के समय में उनके पास फोन चेक करने तक का समय नहीं होता था और अब आईपीएल मैच देख रहा हूँ.

ऑडियो उपकरण और लाइट्स बेचने वाले मनीष का व्यापार भी अब तक धीमा रहा है. उनका कहना है कि हर साल दिवाली के लिए पंडाल के लिए स्पीकर और लाइट्स के लिए मांग होती थी और मैं इसकी सप्लाई करता था. मैं अपने ज्यादातर ग्राहक खो चुका हूँ और कोई पंडाल नहीं है. मैं छोटे आकार के उत्पाद बेच रहा हूं, जिसके परिणामस्वरूप इस वर्ष अच्छा व्यवसाय नहीं है. दिवाली मेरे व्यवसाय की मुख्य अवसरों में से एक थी और अब वह अवसर भी खो गया. पिछले साल मेरी दूकान में हर रोज 200-300 लोग होते थे. अब यह संख्या 30 से 40 हो गई है.
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