Firecrackers Ban Impact: पटाखा कंपनियों की एसोसिएशन ने कहा- बेरोजगार हो जाएंगे 10 हजार लोग

दिल्ली के बाद महाराष्ट्र और हरियाणा में पटाखों पर लिया गया बड़ा फैसला.
दिल्ली के बाद महाराष्ट्र और हरियाणा में पटाखों पर लिया गया बड़ा फैसला.

Firecrackers Ban Impact: दिल्ली (Delhi) और उससे सटे यूपी, हरियाणा और राजस्थान में पटाखों का कुल 5 हज़ार करोड़ रुपये का कारोबार होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 9, 2020, 1:45 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. नेशनल ग्रीन ट्रिब्‍यूनल (NGT) ने पटाखा को लेकर बड़ा फैसला दिया है. NGT ने दिल्‍ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में 30 नवंबर तक के लिए पटाखों पर रोक लगा दी है. इसका मतलब यह हुआ कि इस दीपावली (Deepawali) पर लोग आतिशबाजी नहीं कर सकेंगे. इस पर पटाखा कंपनी एसोसिएशन (Crackers Association) का कहना है, “पटाखा कंपनियों से 10 हजार लोग जुड़े हुए हैं. बैन लगने से यह सब बेरोजगार हो जाएंगे. आपको बता दें कि शुरुआत में पटाखों पर बैन की मांग राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में बढ़ते प्रदूषण और इससे कोरोना महामारी के और गंभीर शक्ल लेने की आशंकाओं के चलते उठाई गई थी. दूसरे राज्यों में भी इसी तरह की मांग उठी तो एनजीटी ने मामले का दायरा बढ़ा दिया और इसमें देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी शामिल कर लिया. सिर्फ उन राज्यों को छोड़कर जहां हालात के मद्देनजर पहले ही पटाखे जलाए जाने और उनकी बिक्री पर रोक लगा दी गई है. सबसे पहले ओडिशा और राजस्थान से इसकी शुरुआत हुई. बाद में दिल्ली सरकार ने भी यहां 7 नवंबर से लेकर 30 नवंबर के बीच पटाखे जलाए जाने पर बैन लगा दिया. वेस्ट बंगाल में कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस संबंध में आदेश जारी किया है.
दिल्ली में 2000 से गिरकर 200 करोड़ पर आ गया पटाखा कारोबार-जानकारों की मानें तो साल 2018 तक दिल्ली में पटाखा कारोबार करीब 2000 करोड़ रुपये का था. इसके बाद वायु प्रदूषण को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर से ग्रीन पटाखे बेचने और चलाने का आदेश आ गया. लेकिन 2019 में ग्रीन पटाखे बनाने और बेचने के उतने लाइसेंस ही नहीं बन पाए कि दीवाली पर पब्लिक की डिमांड पूरी हो सके. 2020 की दीवाली आई तो लॉकडाउन और कोरोना के चलते ग्रीन पटाखे ही नहीं बन पाए, जबकि 93 फैक्ट्रियों के पास ग्रीन पटाखे बनाने के लाइसेंस थे. अब यह करोबार सिमटकर 2 सौ से 3 सौ करोड़ रुपये का ही रह गया है.

यह भी पढ़ें- 5 रुपए के कैप्सूल से 20 दिनों के भीतर खेत में ही गल गई पराली, देखने पहुंचे CM केजरीवाल

तीनों राज्यों में भी है करोड़ों रुपये का कारोबार-थोक पटाखा कारोबारी दीपक का कहना है, राजस्थान, यूपी और हरियाणा की बात करें तो यहां भी करोड़ों रुपये का कारोबार है. यूपी और हरियाणा के एनसीआर से सटे शहरों की बात छोड़ दें तो पूरे राज्य में सामान्य पटाखे बिकते हैं. अकेले यूपी में ही 2000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का कारोबार हो जाता है. वहीं हरियाणा और राजस्थान में भी यह कारोबार 500-500  करोड़ से ऊपर निकल जाता है.



एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की बेंच ने गुरुवार को मामले में अपना आदेश सुरक्षित रखने से पहले संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ पटाखे बनाने वालों के संगठन को भी सुना था. इंडियन फायरवर्क मैनुफक्चरर्स असोसिएशन की ओर से सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने दलीलें रखीं. एमिकस के तौर पर सीनियर एडवोकेट राज पंजवानी, केंद्र और सीपीसीबी की दलीलों पर भी गौर किया.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज