Diwali 2020: बाजारों में भारतीय सामान की रौनक, ‘लोकल के लिए वोकल’ हुए इंडियन

दिल्ली सहित देशभर के सभी बाजारों में लोग जमकर खरीदारी कर रहे है.
दिल्ली सहित देशभर के सभी बाजारों में लोग जमकर खरीदारी कर रहे है.

प्रधानमंत्री मोदी के वोकल फॉर लोकल (Vocal for Local) और आत्मनिर्भर भारत अभियान (aatm nirbhar bharat) का असर इस बार दिवाली (Diwali) पर भारतीय बाजार में दिखाई दे रहा है. जिन दुकानों पर फेस्टिव सीजन में चीनी सामान की भरमार रहती थी अब उन पर भारतीय समान अपनी चमक बिखेर रहा है और इस समान को ग्राहक (Customer) खासा तवज्जो भी दे रहे है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 13, 2020, 2:15 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना महामारी पर दिवाली का जूनून भारी पड़ता दिखाई दे रहा है. दिल्ली सहित देशभर के सभी बाजारों में लोग जमकर खरीदारी कर रहे है. मार्च में लगे लॉकडाउन के बाद पहली बार बाजार में रौनक लौटी है. जिससे व्यापारियों में उत्साह है और वे पिछले 8 महीनों से ठंडे पड़े कारोबार से पार पाने की उम्मीद कर रहे हैं.

हालांकि इस बार दिलचस्प बात यह है कि बाजारों से चीन का सामान एक तरह से गायब ही हो चुका है. भारत-चीन के बीच चल रहे तनाव और ट्रेडर्स के संगठनों की ओर से चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के चलते बाजारों में भारतीय सामान की रौनक है.

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वोकल फॉर लोकल का गहरा असर - प्रधानमंत्री मोदी के वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत अभियान का असर इस बार दिवाली पर भारतीय बाजार में दिखाई दे रहा है. जिन दुकानों पर फेस्टिव सीजन में चीनी सामान की भरमार रहती थी अब उन पर भारतीय समान अपनी चमक बिखेर रहा है और इस समान को ग्राहक खासा तवज्जो भी दे रहे है.
देश के व्यापारियों के शीर्ष संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल का कहना है कि चीनी वस्तुएं जो हर साल दिवाली पर बड़ा व्यापार करती थीं, इस बार उनका व्यापारियों एवं ग्राहकों द्वारा पूर्ण बहिष्कार किया जा रहा है और भारत में बने सामान की मांग अधिक है. ऐसे में चीन को लगभग 40 हजार करोड़ रुपये के व्यापार का नुकसान होना तय है.

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60 हजार करोड़ के कारोबार की उम्मीद - खंडेलवाल के मुताबिक, धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजन, भाई दूज, छठ पूजा और तुलसी विवाह, त्योहारों की इस पूरी श्रृंखला के जरिए देशभर के बाजारों में लगभग 60 हजार करोड़ रुपये का व्यापार होने का अनुमान है. इस कुल व्यापार में से प्रतिवर्ष चीन का व्यापार लगभग 40 हजार करोड़ का रहता था. लेकिन इस बार चूंकि चीनी सामान मार्केट में नहीं है, लिहाजा चीन को बड़ा नुकसान होना तय है .
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