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Green Firecrackers: ग्रीन पटाखे कहां मिलेंगे, जानिए इनसे जुड़ी सभी बातें

News18Hindi
Updated: October 27, 2019, 11:38 AM IST
Green Firecrackers: ग्रीन पटाखे कहां मिलेंगे, जानिए इनसे जुड़ी सभी बातें
सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर कोई चाइनीज पटाखे खरीदते या फोड़ता है तो इसके लिए उनपर कस्टम एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी.

पटाखों से निकलने वाले जानलेवा केमिकल्स से बचने के लिए केंद्र सरकार (Central Government) ने इस साल ग्रीन पटाखे जारी किए है. इनमें अनार, पेंसिल, चकरी, फुलझड़ी और सुतली बम जैसे पटाखे हैं.

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  • Last Updated: October 27, 2019, 11:38 AM IST
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नई दिल्ली. इस दिवाली (Diwali 2019) पर प्रदूषण और हानिकारक पटाखों (Pollution due to Firecrackers) से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने पहले ही चाइनीज पटाखों (Chinese Firecrackers) पर बैन लगा दिया है. सरकार (Government) ने साफ कर दिया है कि अगर कोई चाइनीज पटाखे खरीदते या फोड़ता है तो इसके लिए उनपर कस्टम एक्ट (Custom Act) के तहत कार्रवाई की जाएगी. वहीं, दिवाली से ठीक पहले केंद्र सरकार ने पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए ग्रीन पटाखे (Green Firecrackers) जारी किए है. इन ग्रीन पटाखों में अनार, पेंसिल, चकरी, फुलझड़ी और सुतली बम जैसे पटाखे हैं. सरकार ने दावा किया है कि इन ग्रीन पटाखों से 30 फीसदी तक कम प्रदूषण होगा. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का कहना है कि इस बार दिवाली पर देश भर में प्रदूषण कम करने वाले ग्रीन पटाखे बाजार में मिलेंगे.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पटाखों पर बैन के बाद जारी किए गए ग्रीन पटाखे
बता दें कि देश के सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले साल ही पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसके बाद से ही ग्रीन पटाखों को बाजार में जारी करने पर विचार किया जा रहा था. इसी दिशा में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने ग्रीन पटाखों को बनाने में अहम काम किया. पटाखा कंपनियों से करीब 230 सहमति-पत्रों और 165 नॉन डिसक्लोजर एग्रीमेंट्स (NDA) पर हस्ताक्षर किए हैं. आइए जानते हैं इन ग्रीन पटाखों के बारे में.

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सबसे अधिक चीन में होता है पटाखों का उत्पादन
आपको बता दें कि दुनियाभर में सबसे अधिक पटाखों का उत्पादन चीन में होता है. वहीं, भारत इस मामले में दूसरे स्थान पर आता है. भारत में सबसे अधिक पटाखों का उत्पादन तमिलनाडु के शिवकाशी में होता है. यहां 1 हजार से भी अधिक पटाखा मैन्युफैचरर्स हैं. इनका सालाना काम 6 हजार करोड़ रुपये से अधिक का है.
ग्रीन पटाखे


पर्यावरण के लिए​ कितने बेहतर होते हैं ग्रीन पटाखे
जानकारों का मानना है कि कोई भी पटाखा पूरी तरह से प्रदूषण रहित नहीं हो सकता है. हालांकि साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के वैज्ञानिकों ने पटाखों का एक ऐसा फॉर्मूला तैयार किया है, जिससे इन पटाखों को ग्रीन पटाखों को श्रेणी में रखा जा सकता है. सरकार ने इन ग्रीन पटाखों को जारी करते हुए कहा है कि इनमें धूल सोखने की क्षमता है और इन पटाखों से होने वाले उत्सर्जन का स्तर भी बेहद कम है.

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खास फॉर्मूले से तैयार होते हैं ग्रीन पटाखे
इन पटाखों को तैयार करते वक्त कुछ ऐसा फॉर्मूला तैयार किया गया है, जिससे वॉटर मॉलिक्यूल्स यानी पानी के अणु उत्पन्न हो सकते हैं. इससे धूल व खतरनाक तत्वों को कम करने में मदद मिलेगी. इनमें 30 से 90 फीसदी तक बेरियम नाइट्रेड का इस्तेमाल किया जाता है. ग्रीन पटाखों की पहचान के लिए एनईईआरआई ने ग्रीन लोगो और क्यूआर कोड भी दिया है.

ग्रीन पटाखे


बाजार में कैसे पता करें ग्रीन पटाखों के बारे में
अब सवाल ये है कि बाजार में पटाखे खरीदते वक्त आपको कैसे पता चलेगा कि ये ग्रीन पटाखे हैं या फिर कोई सामान्य पटाखा है. ग्रीन पटाखों पर हरे रंग का एक स्टिकर और बारकोड दिया होता है. हरे रंग के ये स्टीकर्स दशार्ते हैं कि ये ग्रीन पटाखे हैं. जबकि, बारकोड को स्कैन करने से पता चल सकता है कि इन्हें कहां बनाया गया है और इसके निर्माता ने कौन से केमिकल का इस्तेमाल किया है.

क्या है इन ग्रीन पटाखों का दाम
हालांकि, ये पटाखे आम बाजार में आसानी से मिलने वाले पटाखों के मुकाबले महंगे होते हैं. आमतौर पर 10 पीस वाले फुलझड़ी के एक पैकेट का दाम 200 रुपये होता है. लेकिन, इस बार दिवाली के मौके पर पुरानी दिल्ली में ग्रीन पटाखों वाली फुलझड़ी के एक पैकेट का दाम 400 रुपये तक है. ग्रीन पटाखों के तहत मिलने वाली चकरी के 10 पीस वाला बॉक्स 550 रुपये में मिल रहा है. वहीं, आमतौर पर इसकी कीमत 250 रुपये है.

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First published: October 27, 2019, 11:16 AM IST
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