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आपका भी है एक से ज्यादा बैंक में खाता, तो जानिए अब कितने लाख रुपये रहेंगे सेफ?

News18Hindi
Updated: February 11, 2020, 11:09 AM IST
आपका भी है एक से ज्यादा बैंक में खाता, तो जानिए अब कितने लाख रुपये रहेंगे सेफ?
एक से ज्यादा बैंक में हैं आपका खाता तो इससे जुड़ी जानकारियों को जानना आपके लिए बेहद जरूरी हैं.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने बजट भाषण में ऐलान किया कि किसी भी बैंक के दिवालिया होने की स्थिति में अकाउंट होल्डर्स डिपॉजिट इंश्योरेंस (Deposit Insurance) के तौर पर 5 लाख रुपये तक क्लेम कर सकते हैं.

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  • Last Updated: February 11, 2020, 11:09 AM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अगुवाई वाली NDA सरकार 2.0 सरकार ने अपना दूसरा बजट शनिवार को पेश किया था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने इस बजट में ऐलान किया कि अगर कोई बैंक दिवालिया हो जाता है तो इस बैंक के अकाउंट होल्डर्स के अकाउंट के लिए डिपॉजिट इंश्योरेंस (Bank Account Deposit Insurance) के तौर पर 5 लाख रुपये दिए जाएंगे. इसके पहले डिपॉजिट इंश्योरेंस के तहत 1 लाख रुपये देने का प्रावधान था. 1993 के बाद पहली बार डिपॉजिट इंश्योरेंस की सीमा को 1 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया गया है. वित्त मंत्री द्वारा बजट भाषण में इस ऐलान के बाद से ही लोग ये जानना चाहते हैं कि अगर ऐसी कोई परिस्थिति आती है तो क्या उन्हें 1 से अधिक अकाउंट के लिए 5-5 लाख रुपये का डिपॉजिट इंश्योरेंस मिलेगा. आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब.

DICGC के अंतर्गत कितने बैंक आते हैं?
बता दें कि 31 मार्च 2019 तक DICGC पास डिपॉजिट इंश्योरेंस के तौर पर 97,350 करोड़ रुपये था, जिसमें 87,890 करोड़ रुपये सरप्लस भी शामिल है. DICGC ने 1962 से लेकर अब तक कुल क्लेम सेटलमेंट पर 5,120 करोड़ रुपये खर्च किया है जो कि सहकारी बैंकों के लिए था. डीआईसीजीसी के अंतर्गत कुल 2,098 बैंक आते हैं, जिनमें से 1,941 बैंक सहकारी बैंक हैं. अधिकतर इन्हीं बैंकों में लिक्विडेशन की कमी देखने को मिल रही है.



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वित्त वर्ष 2019 में 12,040 करोड़ रुपये का प्रीमियम मिला
वित्त वर्ष 2018-19 में, पब्लिक सेक्टर बैंकों समेत सभी कॉमर्शियल बैंकों ने DICGC के पास 11,190 करोड़ रुपये ​डिपॉजिट इंश्योरेंस के तौर पर जमा किया है, जबकि सहकारी बैंकों ने केवल 850 करोड़ रुपये ही जमा किया है. इस प्रकार डीआईसीजीसी के पास वित्त वर्ष 2019 में डिपॉजि​ट इंश्योरेंस प्रीमियम के तौर पर 12,040 करोड़ रुपये आए थे. इसी साल, सहकारी बैंकों द्वारा 37 करोड़ रुपये का क्लेम ​भी किया जा चुका है. इन आंकड़ों से आप एक बात तो आसानी से पता लाग सकते हैं कॉमर्शियल बैंक की तुलना में सहकारी बैंकों लोगों को अपनी बचत रखने पर सबसे अधिक चिंता है. 

क्या कहता है नियम?
DICGC एक्ट, 1961 की धारा 16 (1) के प्रावधानों के तहत, अगर कोई बैंक डूब जाता है या दिवालिया हो जाता है, तो DICGC प्रत्येक जमाकर्ता को भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होता है. उसकी जमा राशि पर 5 लाख रुपये तक का बीमा होगा. आपका एक ही बैंक की कई ब्रांच में खाता है तो सभी खातों में जमा अमाउंट और ब्‍याज जोड़ा जाएगा और केवल 5 लाख तक जमा को ही सुरक्षित माना जाएगा. इसमें मूलधन और ब्‍याज (Principal and Interest) दोनों को शामिल किया जाता है. मतलब साफ है कि अगर दोनों जोड़कर 5 लाख से ज्यादा है तो सिर्फ 5 लाख ही सुरक्षित माना जाएगा.



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PMC बैंक मामले के बाद इंश्योरेंस बढ़ाने की मांग
अगर आसान भाषा में समझें तो किसी बैंक में आपकी कुल जमा राशि 8 लाख है तो बैंक के डिफॉल्ट करने पर आपके सिर्फ 5 लाख रुपये ही सुरक्षित माने जाएंगे. बाकी आपको मिलने की गारंटी नहीं होगी. गौरतलब है कि पीएमसी बैंक संकट सामने आने के बाद इस बात की मांग बढ़ गई थी कि अकाउंट होल्डर्स के डिपॉजिट इंश्योरेंस की सीमा को बढ़ाया लाए.

बजट में निर्मला सीतारमण ने क्या कहा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बात को लेकर अपने बजट में कहा है कि DICGC को 'प्रति अकाउंट' डिपॉजिट इंश्योरेंस की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किए जाने की अनुमति है. नानगिया एंडरसन LLP के विश्वास पांजियार का भी कहना है कि ऐसी स्थिति​ में केवल एक ही अकाउंट के आधार पर 5 लाख रुपये का​ डिपॉजिट इंश्योरेंस मिल सकेगा.

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First published: February 11, 2020, 11:00 AM IST
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