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GST पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मायने क्‍या, जीएसटी परिषद पर इसका क्‍या पड़ेगा असर, भविष्‍य की राह कैसे बनाएगा ये फैसला?

जून, 2017 में सरकार ने जीएसटी लागू किया था.

जून, 2017 में सरकार ने जीएसटी लागू किया था.

जीएसटी कानून लागू होने के बाद से इसमें कई तरह के बदलाव किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक विवादों का सिलसिला खत्‍म नहीं हुआ. ताजा मामला सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का है जिसमें जीएसटी परिषद की सिफारिश और सीबीआईसी के नोटिफिकेशन को दरकिनार कर दिया गया. लिहाजा इस फैसले के कई मायने निकाले जाने लगे.

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नई दिल्‍ली. साल 2017 में नया कर कानून वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद से इसमें तमाम बदलाव हुए और कई विवाद भी सामने आए. ऐसे ही एक मामले में सुप्रीम कोर्ट को हस्‍तक्षेप करना पड़ा और बृहस्‍पतिवार को एक बड़ा फैसला सामने आया, जिसमें राज्‍यों को जीएसटी परिषद के ऊपर स्‍वतंत्र शक्तियां मिलने की बात कही गई.

इस फैसले के बाद से तमाम टैक्‍स विशेषज्ञ तरह-तरह की बातें करने लगे हैं. कोई कहता है कि सुप्रीम कोर्ट ने जीएसटी परिषद की शक्तियां खत्‍म कर दीं तो कोई इसे राज्‍यों को असीमित अधिकार मिलने वाला फैसला बता रहा है. इस मामले में जीएसटी के जानकारों से बातचीत की गई तो पूरे फैसले की परतें खुल गईं और इसे हर किसी के लिए बेहतर माना जा रहा है. यह फैसला न सिर्फ वर्तमान में असर डालेगा, बल्कि जीएसटी कानून में बदलाव या उसकी सिफारिश के लिए भविष्‍य की राह भी तय करेगा.

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सुप्रीम कोर्ट ने खत्‍म कर दी भ्रम की स्थिति
जीएसटी मामलों के जानकार और गॉडफ्रे फिलिप्‍स इंडिया लिमिटेड में डीजीएम (लीगल) चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि यह मामला पहले गुजरात हाईकोर्ट के सामने आया था. उसमें कहा गया कि चूंकि इंपोर्ट ड्यूटी, जिसमें जीएसटी शामिल होती है, गुड्स की पूरी कीमत पर ली जाती है. और समुद्री भाड़ा भी इसी में शामिल होता है. इसलिए यदि समुद्री भाड़े पर जीएसटी भी चार्ज किया जाएगा, तो इससे भाड़े पर 2 बार जीएसटी लग रही है, जो उचित नहीं है. गुजरात हाई कोर्ट ने करदाता के पक्ष में निर्णय किया और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उस फैसले पर अपने मोहर लगा दी है. इस निर्णय के बाद अलग से समुद्री भाड़े पर जीएसटी नहीं ली जायेगी, जो कि करदाता के लिए बड़ी राहत है.

दरअसल, यह पूरा मामला सीमा पार व्‍यापार पर वसूले जाने वाले टैक्‍स को लेकर था, जिसे एक टैक्‍सपेयर ने कोर्ट में चैलेंज किया था. केंद्रीय अप्रत्‍यक्ष कर एवं सीमा शुल्‍क बोर्ड ने एक नोटिफिकेशन के जरिये यह तय किया था कि कोई भी उत्‍पादन, जो सीमा पार किसी अन्‍य देश में भेजा जा रहा है, उस पर 5 फीसदी आईजीएसटी वसूलने की बात कही गई थी.

टैक्‍सपेयर ने इसे चैलेंज किया और कहा कि जीएसटी कानून में सभी चीजों को मिलाकर एक टैक्‍स वसूले जाने की बात है. ऐसे में किसी वस्‍तु के निर्यात पर अलग से सर्विस टैक्‍स लेना कानून सम्‍मत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्‍वीकार करते हुए जीएसटी परिषद को यह रास्‍ता दिखाया कि आप कोई भी सिफारिश कानून के दायरे में रहते हुए ही कर सकते हैं. साथ ही सीबीआईसी को भी भविष्‍य में कोई नोटिफिकेशन कानून के दायरे में ही जारी करने के लिए बाध्‍य किया.

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परिषद की शक्तियों पर कोई असर नहीं
जीएसटी मामलों के एक्‍सपर्ट गोपाल केडिया ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में जीएसटी परिषद की शक्तियों पर कोई पाबंदी नहीं लगाई है, बल्कि उसकी शक्तियों की एक परिभाषा तय कर दी है. शीर्ष अदालत का कहना है कि जीएसटी परिषद करदाता के हितों को ध्‍यान रखने और उसके अनुसार सिफारिश करने वाली टीम है, जिसे कानून के दायरे में रहकर ही अपनी बात कहनी होगी. इसी तरह, राज्‍यों को भी सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया है कि आप जीएसटी परिषद की सिफारिशें मानने के लिए बाध्‍य नहीं हैं, बल्कि अपने हितों के अनुसार उसमें बदलाव या उसे खारिज भी कर सकते हैं.

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भविष्‍य में इसके क्‍या मायने
यह फैसला वर्तमान में तो सिर्फ एक मामले को ही प्रभावित कर रहा है, लेकिन भविष्‍य में इसके असर कहीं ज्‍यादा बड़े होंगे. यानी अब जीएसटी परिषद कोई भी सिफारिश करने से पहले ज्‍यादा सतर्कता बरतेगा और राज्‍यों को उसमें ज्‍यादा बड़ा रोल भी मिलेगा. सभी राज्‍य अपने हितों के अनुसार परिषद पर सिफारिश के लिए दबाव बना सकेंगे. साथ ही सीबीआईसी भी कर वसूली को लेकर कोई नोटिफिकेशन जारी करने से पहले कानून का सही तरह से पालन करेगा.

पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब सीबीआईसी की ओर से जारी नोटिफिकेशन को महाराष्‍ट्र सरकार ने मानने से इनकार कर दिया और आपने हितों के हिसाब से नई गाइडलाइन तैयार की. सुप्रीम कोर्ट का फैसला राज्‍यों की इन्‍ही शक्तियों और समझ को नया आयाम देने का काम करेगा. हालांकि, इस नए तरह के ढांचे में जीएसटी वसूली पर कुछ असर जरूर पड़ सकता है.

Tags: GST law, Gst news, Supreme Court

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