रुपया 71 के पार! जेटली बोले- पैनिक न करें, तेजी से बढ़ रही हमारी अर्थव्यवस्था

वित्त मंत्री ने बुधवार को जोर देकर कहा कि अन्य करेंसी की तुलना में रुपये की स्थिति अभी भी बेहतर है. हाल के दिनों में रुपये में जो भी थोड़ी बहुत गिरावट हुई है, उसके लिए जो भी जरूरी है, आरबीआई वो कदम उठा रही है.

News18Hindi
Updated: September 5, 2018, 10:57 PM IST
रुपया 71 के पार! जेटली बोले- पैनिक न करें, तेजी से बढ़ रही हमारी अर्थव्यवस्था
वित्त मंत्री अरुण जेटली
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Updated: September 5, 2018, 10:57 PM IST
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहे भारतीय रुपये पर मोदी सरकार का बचाव किया है. वित्त मंत्री ने कहा है कि रुपये में गिरावट का कारण कोई घरेलू आर्थिक स्थिति नहीं है. जेटली ने कहा, 'अगर आप घरेलू आर्थिक स्थिति और वैश्विक स्थिति को देखते हैं, तो इसका कारण घरेलू नहीं बल्कि वैश्विक है. डॉलर के मुकाबले दुनियाभर की करेंसी गिर रही है.' वित्त मंत्री ने कहा कि हमें यह ध्यान में रखना चाहिए कि डॉलर लगभग हर मुद्रा के खिलाफ मजबूत हुआ है.

वित्त मंत्री ने बुधवार को जोर देकर कहा कि अन्य करेंसी की तुलना में रुपये की स्थिति अभी भी बेहतर है. हाल के दिनों में रुपये में जो भी थोड़ी बहुत गिरावट हुई है, उसके लिए जो भी जरूरी है, आरबीआई वो कदम उठा रही है. जेटली ने कहा, 'रुपये में गिरावट को लेकर पैनिक करने की जरूरत नहीं है. सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था को घबराने की जरूरत नहीं है.

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया गिरा! जानिए आपको कितना नुकसान होगा?

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस दौरान प्रधानमंत्री के 'जन-धन योजना' का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 'जन-धन' के तहत 32.41 करोड़ खाते खोले गए. यह दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशी योजना है. 'जन-धन' खातों में 81,200 करोड़ रुपये जमा हुए.

जेटली ने बताया कि 'जन-धन' योजना के तहत 53% खाताधारक महिलाएं हैं. 59% खाते ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों से संबंधित हैं. 83% खाते आधार वरीयता प्राप्त हैं और 24.4 करोड़ रुपये रुपे कार्ड है. वित्त मंत्री ने कहा कि 'जन-धन' खातों में ओवरड्राफ्ट की सुविधा पांच हजार रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये की जाएगी.

बता दें कि अंतर बैंक विदेशी विनिमय बाजार में बुधवार को लगातार छठे दिन गिरावट का सिलसिला कायम रहा. रुपया 17 पैसे और टूटकर 71.75 प्रति डॉलर के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ है. पिछले छह कारोबारी सत्रों में रुपया 165 पैसे टूट चुका है.



क्या है रुपये के टूटने के कारण?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपये के टूटने के दो प्रमुख कारण हैं. पहला क्रूड ऑयल यानि कच्चे तेल के बढ़ते दाम. दूसरा चीन-अमेरिका सहित देशों के बीच बढ़ते ट्रेड वॉर के चलते. इसका सीधा असर देश में आयात होने वाले सामानों पर पड़ेगा. मतलब कंप्यूटर, इम्पोर्टेड मोबाइल और सोना महंगा होगा.



ये होंगे नुकसान?
जब रुपया गिरेगा और पेट्रोल, डीज़ल के दाम बढ़ेंगे. तो इनका असर अन्य चीज़ों पर भी होगा. मतलब दूसरी ज़रूरी चीज़ों के दाम में इजाफा होगा. अगर रुपया डॉलर के मुकाबले ज्यादा गिरेगा तो आरबीआई ब्याज की दरों में इजाफा कर सकती है. इसका सीधा असर लोगों को लोन और होम लोन पर बढ़ेगा. उनकी ईएमआई बढ़ेगी.



रुपये गिरने का सबसे ज्यादा नुकसान विदेश में पढ़ने वाले छात्रों को भी होगा. क्योंकि उन्हें डॉलर्स में फीस देनी होगी और उसे चुकाने के लिए ज्यादा रुपए खर्च करने होंगे. (एजेंसी इनपुट के साथ)
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