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    हवाई यात्रियों के लिए खुशखबरी! 24 फरवरी तक किराये को लेकर मनमानी नहीं कर सकेंगी एयरलाइंस

    देशभर में किए गए लॉकडाउन के बाद 25 मई से घरेलू फ्लाइट्स शुरू की गई थी.
    देशभर में किए गए लॉकडाउन के बाद 25 मई से घरेलू फ्लाइट्स शुरू की गई थी.

    नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने गुरुवार को बताया कि घरेलू उड़ानों पर हवाई किराए की ऊपरी और निचली सीमा 24 नवंबर के बाद तीन महीने तक और लागू रहेगी.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 30, 2020, 7:53 PM IST
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    नई दिल्ली. घरेलू मार्गों पर फ्लाइट (Domestic Flights) टिकटों के किराए पर ऊपरी और निचली सीमा को 24 फरवरी तक जारी रहेगी. नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने गुरुवार को बताया कि घरेलू उड़ानों पर हवाई किराए की ऊपरी और निचली सीमा 24 नवंबर के बाद तीन महीने तक और लागू रहेगी.

    मंत्रालय ने सबसे पहले 21 मई को सात बैंड के जरिए यह सीमा 24 अगस्त के तक के लिए लागू की थी. इसका वर्गीकरण यात्रा के समय के हिसाब से किया गया था. बाद में इसे बढ़ाकर 24 नवंबर कर दिया गया था. पुरी ने कहा कि अनुसूचित घरेलू उड़ानें इस साल के अंत तक कोविड-19 के पूर्व के स्तर पर पहुंच जाएंगी। उसके बाद उन्हें किराये की सीमा को हटाने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी.

    पुरी ने कहा, ''हालांकि, अभी हम इसे तीन महीने के लिए बढ़ा रहे हैं, लेकिन इस साल के अंत तक यदि हमें स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दिखेगा और हम कोविड-19 से पूर्व के स्तर पर पहुंच रहे होंगे, ऐसे में यदि नागर विमानन मंत्रालय के मेरे सहयोगी चाहेंगे कि इसे पूरे तीन माह तक लागू नहीं किया जाए, तो निश्चित रूप में मुझे इसे हटाने में हिचकिचाहट नहीं होगी.''



    कोरोना वायरस महामारी के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन के बाद घरेलू उड़ान सेवाएं 25 मई को करीब दो माह के अंतराल के बाद फिर शुरू हुई थी. नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने 21 मई को टिकटों के लिए यात्रा के समय के आधार पर ऊपरी और निचली सीमा के साथ सात बैंड की घोषणा की थी.


    Air India के लिए बोली उसके उद्यम मूल्य के आधार पर लगाई जाएगी
    वहीं, हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया के तहत बोली कंपनी के इक्विटी मूल्य नहीं बल्कि उसके उद्यम मूल्य के आधार पर लगाई जाएगी. किसी कंपनी के उद्यम मूल्य में उसके शेयरों का मूल्य, उसका रिण और कंपनी के पास उपलब्ध नकद राशि सब शामिल होता है जबकि इक्विटी मूल्य में केवल कंपनी के शेयरों का मूल्य शामिल होता है.
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