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फिर दिखा चीन को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का तेवर, कहा- कर्ज देना बंद करे विश्व बैंक

अमरेका के साथ तनातनी के संबंधों में दुनिया के सभी मुल्कों में चीन का नंबर सबसे ऊपर आता है. बीते कुछ दशक के दौरान चीन की तेजी के साथ हुए आर्थिक और सामरिक प्रगति हुई है. दक्षिण चीन सागर में प्रभुत्व को लेकर अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय तनातनी चलती आ रही है. साथ ही वक्त के साथ चीन ने खुद को  इतना मजबूत कर लिया है कि वो अमेरिका से नजरें मिलाने की स्थिति में आ गया है. मोटे तौर पर यही देखने में आता है कि जब भी अमेरिका किसी विवाद की स्थिति में फंसता है तो चीन हमेशा उसके खिलाफ स्टैंड लेता है. दोनों देशों के बीच वैचारिक लड़ाई का भी पुराना इतिहास है. अमेरिका एक तरफ पूंजीवादी व्यवस्था का प्रतीक है वहीं चीन मार्क्सवाद/माओवाद के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरा है. चीन खुद को दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति साबित करने की कोशिश में लगा हुआ है. चीन का प्रयास ये रहता है कि वो खुद को ऐसा दिखाए कि दुनिया में अमेरिका की जगह ले सकता है.

अमरेका के साथ तनातनी के संबंधों में दुनिया के सभी मुल्कों में चीन का नंबर सबसे ऊपर आता है. बीते कुछ दशक के दौरान चीन की तेजी के साथ हुए आर्थिक और सामरिक प्रगति हुई है. दक्षिण चीन सागर में प्रभुत्व को लेकर अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय तनातनी चलती आ रही है. साथ ही वक्त के साथ चीन ने खुद को इतना मजबूत कर लिया है कि वो अमेरिका से नजरें मिलाने की स्थिति में आ गया है. मोटे तौर पर यही देखने में आता है कि जब भी अमेरिका किसी विवाद की स्थिति में फंसता है तो चीन हमेशा उसके खिलाफ स्टैंड लेता है. दोनों देशों के बीच वैचारिक लड़ाई का भी पुराना इतिहास है. अमेरिका एक तरफ पूंजीवादी व्यवस्था का प्रतीक है वहीं चीन मार्क्सवाद/माओवाद के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरा है. चीन खुद को दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति साबित करने की कोशिश में लगा हुआ है. चीन का प्रयास ये रहता है कि वो खुद को ऐसा दिखाए कि दुनिया में अमेरिका की जगह ले सकता है.

विश्व बैंक (World Bank) द्वारा चीन को कर्ज दिए जाने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि चीन के पास पहले से ही बहुत धन है. विश्व बैंक कर्ज देना बंद करे.

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    नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने चीन को कर्ज देने पर विश्व बैंक (World Bank) की शुक्रवार को निंदा की. ट्रंप ने ट्विटर पर लिखा, "विश्व बैंक चीन को धन क्यों दे रहा है? क्या यह संभव हो सकता है? चीन के पास बहुत धन है, और अगर नहीं है तो वह उसकी व्यवस्था खुद करे. इसे रोकें."

    अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्टीवन मेनुचिन (Steven Mnuchin) ने भी ऐसी ही बात कही थी. उन्होंने गुरुवार को एक प्रतिनिधि सभा की समिति से कहा था कि अमेरिका ने चीन में विश्वबैंक के ऋण की बहु-वर्षीय परियोजनाओं पर "आपत्ति" जताई है.


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    बढ़ सकती है तल्खी
    बीते कुछ समय से दोनों देशों के बीच चल रहे ट्रेड वॉर (Trade War) से साकारात्मक परिणाम निकलने की उम्मीद थी. लेकिन, अब कयास लगाया जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच एक बार फिर तल्खी बढ़ सकती है.

    चीन को कर्ज देने से छोटी अर्थव्यवस्थाओं को हो रही परेशानी
    बता दें कि विश्व बैंक ने पूरे साल कई कार्यक्रमों को पूरा करने के लिए कर्ज देता रहा है. ऐसे में अब कहा जरा है कि चीन की अर्थव्यवस्था दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. विश्व बैंक की तरफ इस मदद के बाद छोटी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों को दिए जाने वाले वित्तीय सहायता पर असर पड़ता है.

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