RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने दी चेतावनी, कहा- मॉनिटरी पॉलिसी फ्रेमवर्क में किसी बड़े बदलाव से बांड मार्केट होगा प्रभावित

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (फोटो- Reuters)

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (फोटो- Reuters)

रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने कहा, ''यदि हम इस फ्रेमवर्क में बड़ा बदलाव करते हैं, तो इससे बांड मार्केट के प्रभावित होने का जोखिम पैदा होगा.''

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नई दिल्ली. भारतीय अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे महामारी के झटके से बाहर निकल रही है. ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने चेताया है कि देश के मॉनिटरी पॉलिसी (Monetary Policy) के फ्रेमवर्क में किसी तरह के बड़े बदलावों से बांड मार्केट प्रभावित हो सकता है.

5 हजार अरब डॉलर का लक्ष्य ज्यादा महत्वाकांक्षी

राजन ने रविवार को कहा कि मौजूदा व्यवस्था ने मुद्रास्फीति को काबू में रखने और वृद्धि को प्रोत्साहन देने में मदद की है. उन्होंने कहा कि सरकार का 2024-25 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 हजार अरब डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी ज्यादा है. उन्होंने कहा कि यहां तक कि महामारी से पहले भी इस लक्ष्य को लेकर सावधानी से गणना नहीं की गई.

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मॉनिटरी पॉलिसी फ्रेमवर्क ने मुद्रास्फीति को नीचे लाने में की मदद

पूर्व गवर्नर ने कहा, ''मेरा मानना है कि मॉनिटरी पॉलिसी फ्रेमवर्क ने मुद्रास्फीति को नीचे लाने में मदद की है. इसमें रिजर्व बैंक के लिए अर्थव्यवस्था को समर्थन देने की गुंजाइश भी है. यह सोचना भी मुश्किल है कि यदि यह फ्रेमवर्क नहीं होता, तो हम कैसे इतना ऊंचा राजकोषीय घाटा झेल पाते.'' उनसे पूछा गया था कि क्या वह मॉनिटरी पॉलिसी के तहत मुद्रास्फीति के दो से छह फीसदी के लक्ष्य की समीक्षा के पक्ष में हैं.

मुद्रास्फीति को चार फीसदी पर रखने का लक्ष्य 



रिजर्व बैंक को खुदरा मुद्रास्फीति को चार फीसदी (दो फीसदी ऊपर या नीचे) पर रखने का लक्ष्य दिया गया है. केंद्रीय बैंक के गवर्नर की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मॉनिटरी पॉलिसी कमिटि इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर नीतिगत दरें तय करती है. मौजूदा मध्यम अवधि का मुद्रास्फीति लक्ष्य अगस्त, 2016 में अधिसूचित किया गया था. यह इस साल 31 मार्च को समाप्त हो रहा है. अगले पांच साल के लिए मुद्रास्फीति के लक्ष्य को इसी महीने अधिसूचित किए जाने की उम्मीद है.

इसी परिप्रेक्ष्य में राजन ने कहा, ''यदि हम इस फ्रेमवर्क में बड़ा बदलाव करते हैं, तो इससे  बांड मार्केट के प्रभावित होने का जोखिम पैदा होगा.''

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2021-22 के बजट में निजीकरण पर काफी जोर

सुधार उपायों के बारे में राजन ने कहा कि 2021-22 के बजट में निजीकरण पर काफी जोर दिया गया है. उन्होंने कहा कि निजीकरण को लेकर सरकार का रिकार्ड काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. उन्होंने कहा कि इस बार यह कैसे अलग होगा. उन्होंने कहा कि इस बार के बजट में काफी हद तक खर्च तथा प्राप्तियों को लेकर पारदर्शिता दिखती है. पहले के बजट में ऐसा नहीं दिखता था.
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