सऊदी अरामको पर ड्रोन हमले के बाद भारत की चिंता बढ़ी, दोगुना हो सकता है तेल का दाम!

सऊदी अरामको पर ड्रोन हमले के बाद भारत की चिंता बढ़ी, दोगुना हो सकता है तेल का दाम!
सऊदी अरामको (Saudi Aramco) पर ड्रोन हमले (Drone Attack) के बाद वैश्विक बाजार (Global Market) में कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति पर 5 फीसदी तक का असर पड़ेगा. कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक (Importer) होने के कारण अब भारत के आयात बिल से लेकर राजकोषीय घाटे (Trade Deficit) पर भी असर पड़ेगा.

सऊदी अरामको (Saudi Aramco) पर ड्रोन हमले (Drone Attack) के बाद वैश्विक बाजार (Global Market) में कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति पर 5 फीसदी तक का असर पड़ेगा. कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक (Importer) होने के कारण अब भारत के आयात बिल से लेकर राजकोषीय घाटे (Trade Deficit) पर भी असर पड़ेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 15, 2019, 1:51 PM IST
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नई दिल्ली. दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक (Oil Producer) कंपनी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) पर ड्रोन हमले (Drone Attack) के बाद वैश्विक बाजार (Global Market) में कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई पर 5 फीसदी तक की कमी होने वाली है. इस हमले के बाद अब एक बार फिर प​र्शियन गल्फ (Persian Gulf) क्षेत्र समेत भारत के लिए चिंता बढ़ गई है. कच्चे तेल के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ आयातक (Importer) देश है और इस ड्रोन हमले के बाद की स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है.

100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है कच्चे तेल का भाव
इस हमले के बाद सऊदी अरामको को विश्वास है कि वो जल्द ही रिकवर कर लेगा, लेकिन इस बीच दुनिया भर के प्रमुख ​आयातकों को कच्चे तेल की कमी से जूझना पड़ सकता है. ऑयल प्राइस डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले के बाद प्रतिमाह 150 MM बैरल कच्चे तेल की कमी हो सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि ऐसा होता है तो इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं.

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केंद्र सरकार की पैनी नजर
यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा इस हमले की जिम्मेदारी लेने के बाद अब दुनियाभर के ट्रेडर्स भी इस बात की उम्मीद कर रहे हैं कि कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है. बिजनेस न्यूज साइट लाइवमिंट ने भी अपनी रिपोर्ट एक सारकारी अधिकारी के हवाले से लिखी है कि पर्शियन गल्फ की स्थिति पर भारत की पैनी नजर है.

भारत के आयात बिल पर असर
गौरतलब है कि भारत में कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए सऊदी अरब महत्वपूर्ण सोर्स है. भारत के लिए सऊदी अरब कच्चे तेल और कुकिंग गैस (Cooking Gas) का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारत पर भी पड़ेगा. कीमतों में तेजी से भारत के तेल आयात​ बिल (Import Bill) के साथ-साथ राजकोषीय घाटे पर भी बुरा असर पड़ने वाला है. कच्चे तेल की कीमतों में प्रति डॉलर के इजाफे से सालाना आधार पर भारत के आयात बिल पर 10,700 रुपये का असर पड़ेगा. वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान भारत ने अपने कच्चे तेल के आयात पर करीब 111.9 अरब डॉलर खर्च किया था.

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वैश्विक बाजार में आ सकता है तूफान
लाइवमिंट की इस रिपोर्ट में जानकारों के हवाले से लिखा गया है कि रूस व ओपेक देशों द्वारा कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती के बीच अब सऊदी अरामको पर यह हमला कच्चे तेल के वैश्विक बाजार में 'तूफान' ला सकता है. भारत भी इसकी चपेट में आएगा क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है. बता दें कि भारत में कुल जरूरत का 80 फीसदी से भी अधिक कच्चे तेल का हिस्सा और 18 फीसदी नेचुरल गैस आयात से ही पूरा किया जाता था.



मोदी सरकार के​ लिए बढ़ी​ चिंता
इसके साथ ही नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली एनडीए सरकार के लिए भी​​ चिंता बढ़ गई है. आर्थिक सुस्ती, वैश्विक मंदी का डर और ट्रेड वॉर को लेकर ​अनिश्चितता की स्थिति के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से घरेलू बाजार में ग्राहकों पर बुरा असर पड़ सकता है.

जुलाई 2009 में कच्चे तेल की कीमते 147 डॉलर प्रति बैरल के उच्च्तम स्तर पर थीं. इंडियन ऑयल द्वारा प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस दौरान घरेलू बाजार में पेट्रोल की कीमतें करीब 48 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत करीब 35 रुपये प्रति लीटर के आसपास थीं.

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