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किसानों के लिए बड़ी खबर: खेती के लिए सरकार देगी सस्ता ड्रोन, जानिए पूरी योजना के बारे में...

 खेती के लिए सरकार देगी सस्ता ड्रोन, जानिए पूरी योजना के बारे में...
खेती के लिए सरकार देगी सस्ता ड्रोन, जानिए पूरी योजना के बारे में...

आपको बता दें कि मानव रहित विमान दरअसल ड्रोन कहलाता है. ये ड्रोन कई खूबियों से लैस होते हैं. डेटा भेजने से लेकर दूसरी डिवाइस से कम्युनिकेशन तक, इसमें कई फीचर्स होते हैं. इसमें वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए हाई क्वालिटी कैमरा भी लगा होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 28, 2020, 6:14 AM IST
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नई दिल्ली. कृषि क्षेत्र में रिसर्च, टिड्डी नियंत्रण और फसल उपज में सुधार लाने के लिए केन्द्र सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है. इसी कड़ी में सरकार खेती-किसानी के लिए सस्ते ड्रोन (Drone) देने जा रही है. सरकार ने नागर विमानन मंत्रालय और नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने कृषि रिसर्च में गतिविधियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRIST) हैदराबाद, तेलंगाना को ड्रोन की तैनाती करने के लिए भी बिना किसी शर्त के छूट दी है. लेकिन कुछ शर्तों के साथ यह छूट सिर्फ 6 महीनों तक ही दी जाएगी. आपको बता दें कि मानव रहित विमान दरअसल ड्रोन कहलाता है. ये ड्रोन कई खूबियों से लैस होते हैं. डेटा भेजने से लेकर दूसरी डिवाइस से कम्युनिकेशन तक, इसमें कई फीचर्स होते हैं. इसमें वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए हाई क्वालिटी कैमरा भी लगा होता है.

ऐसे मिलेगा सरकार से सस्ता ड्रोन-नागर विमानन मंत्रालय के संयुक्त सचिव अंबर दुबे ने बताया कि ड्रोन भारत के कृषि क्षेत्र के लिए खासे महत्वपूर्ण हैं. इसी के चलते सरकार युवा उद्यमियों और शोधकर्ताओं को देश के 6.6 लाख से अधिक गांवों में कम कीमत के ड्रोन देने के लिए प्रोत्‍साहित कर रही है. लेकिन यह ड्रोन पर यह छूट इस संबंध में जारी हुए लैटर की तारीख से 6 महीने तक ही मिलेगी. लेकिन इस छूट को लेने के लिए कुछ और दूसरी शर्तों का भी पालन करना होगा. अगर ड्रोन लेने के बाद कोई इन शर्तों का उल्लघंन करता है तो छूट समाप्त कर दी जाएगी.

मानव रहित विमान दरअसल ड्रोन कहलाता है. ये ड्रोन कई खूबियों से लैस होते हैं. डेटा भेजने से लेकर दूसरी डिवाइस से कम्युनिकेशन तक, इसमें कई फीचर्स होते हैं. इसमें वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए हाई क्वालिटी कैमरा भी लगा होता है.



ICRIST को इन शर्तों का भी करना होगा पालन
आईसीआरआईएसएटी को स्थानीय प्रशासन, रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, भारतीय वायु सेना से वायु सुरक्षा मंजूरी और भारतीय विमान पत्‍तन प्राधिकरण (एएआई) से रिमोटली पायलेटिड एयर क्राफ्ट सिस्टम्स के परिचालन की पूर्व अनुमति प्राप्‍त करने के लिए आवश्‍यक मंजूरी प्राप्‍त करेगा.

प्रोफेशनल लोगों के अलावा शौकिया लोग भी इसका जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं. खासकर वीडियो ग्राफी, रियल स्टेट, फोटोग्राफी, घूमने और मनोरंजन के तौर पर ज्यादा होता है.

आरपीएएस के माध्यम से प्राप्‍त की गई तस्वीरों, वीडियो-ग्राफ का उपयोग केवल आईसीआरआईएसएटी द्वारा किया जाएगा. आरपीएएसकी सुरक्षा और आरपीएएस केद्वारा एकत्र किए गए डेटा की सुरक्षा की जिम्‍मेदारी संस्‍थान की होगी।

आरपीएएसका संचालन विजुअल लाइन ऑफ साइट (वीएलओएस) के तहत सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन के समय ही सीमित रहेगा।

संस्‍थान यह सुनिश्चित करेगा कि आरपीएएस अच्‍छी तरह से काम कर रहा है और वह उपकरण की खराबी के कारण उत्‍पन्‍न होने वाली किसी भी स्थिति के लिए जिम्‍मेदार होगा.

उपकरणों के साथ शारीरिक संपर्क के कारण किसी भी व्यक्ति को लगी चोट के मामले में,संस्‍थान ही मेडिको-लीगल मुद्दों के लिए जिम्मेदार होगा.

यह संस्‍थान सुरक्षा, जनता की सुरक्षा और गोपनीयता, संपत्ति-परिचालन आदि सुनिश्चित करेगा. किसी भी घटना के मामले में, डीजीसीए को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा.

सीएआर के प्रावधानों के अनुसार हवाई अड्डे के आसपास आरपीएएस को संचालित नहीं किया जाएगा. अगर हवाई अड्डे के पास संचालित किया जाना है, तो भारतीय विमान पत्‍तन प्राधिकरण से आरपीएएस के समय और परिचालन क्षेत्र के संबंध में अग्रिम रूप से अनुमति ली जाएगी.

संस्‍थान यह सुनिश्चित करेगा कि आरपीएएस को केवल प्रशिक्षित औरअनुभवी बोनाफ़ाइड कर्मी ही संचालित करें.

यह पत्र अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा रिमोट पायलेटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम के बारे में लागू किए गए अन्‍य प्रतिबंधों का उल्‍लंघन नहीं करेगा.

ड्रोन के बारे में जानिए-प्रोफेशनल लोगों के अलावा शौकिया लोग भी इसका जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं. खासकर वीडियो ग्राफी, रियल स्टेट, फोटोग्राफी, घूमने और मनोरंजन के तौर पर ज्यादा होता है.दुनिया में सबसे ज्यादा ड्रोन का इस्तेमाल मिलिट्री में होता है. यहां ड्रोन का कारोबार 70 अरब डॉलर से ज्यादा है. इसके बाद उपभोक्ताओं के इस्तेमाल और सिविल-कमर्शियल मामलों का नंबर आता है.सैन्य क्षेत्र के अलावा अलग-अलग क्षेत्रों की बात करें तो कंस्ट्रक्शन में सबसे ज्यादा इसका इस्तेमाल है. यहां कारोबार 11.16 अरब डॉलर है. इन क्षेत्रों में कृषि, इंश्योरेंस क्लेम, ऑयल गैस रिफाइनरी, पत्रकारिता और रियल स्टेट शामिल है.दुनियाभर में ड्रोन के मार्केट पर नजर डालें तो 2019 में 72 अरब रुपए से ज्यादा का बाजार है. अनुमान है ये 2025 तक 900 अरब से ज्यादा का बाजार बन जाएगा.
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