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Lockdown के कारण भारत के 38% स्टार्टअप्स हुए कंगाल, 12% के पास बचा है बस अगले 1 महीने के लिए पैसा

हुरुन ग्‍लोबल यूनिकॉर्न 2020 की सूची में भारत एक पायदान खिसक गया है.

हुरुन ग्‍लोबल यूनिकॉर्न 2020 की सूची में भारत एक पायदान खिसक गया है.

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लागू किये लॉकडाउन के कारण छोटे-बड़े सभी उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं. इस लॉकडाउन का असर नवीन सेवा देकर दैनिक जीवन को सुखदायक बनाने का प्रयत्न करने वाले स्टार्टअप्स (Startups) पर भी पड़ा है.

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    नई दिल्ली. कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लागू किये लॉकडाउन के कारण छोटे-बड़े सभी उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं. इस लॉकडाउन का असर नवीन सेवा देकर दैनिक जीवन को सुखदायक बनाने का प्रयत्न करने वाले स्टार्टअप्स (Startups) पर भी पड़ा है. उन पर आर्थिक संकट की घड़ी आन पड़ी है. स्टार्टअप्स के लिए सबसे बेहतर मार्केट भारत में अब कई स्टार्टअप्स के सामने अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है. एक ताजा सर्वे में पता चला है कि देश के 38 प्रतिशत स्टार्टअप्स के पास पैसा नहीं बचा है. वहीं 30 प्रतिशत स्टार्टअप्स के पास अगले 1 से 3 महीने तक का पैसा बचा है. लॉकडाउन के कारण इन स्टार्टअप्स को कठिन आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा है.

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    ये सर्वेक्षण लोकलसर्कल्स संस्था ने किया है. कोरोना महामारी और इसकी रोकथाम के लिए लागू किये लॉकडाउन के परिणाम जानने के लिए संस्था ने सर्वेक्षण किया है. महाराष्ट्र टाइम्स के अनुसार इस सर्वेक्षण में कुल 28 हजार लोगों से प्रश्न पूछे गये. इनमें से 8400 उद्यमी एसएमई स्टार्टअप्स सेक्टर के थे. इस सर्वेक्षण में जवाब देने वालों में 16 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनके पास अगले 3 से 6 महीने के लिए ही पैसा बचा है. अन्य 12 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनके पास अगले 1 महीने के लिए ही पैसा बचा है.

    इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट में कहा गया है कि 4 प्रतिशत स्टार्टअप्स ने लॉकडाउन के कारण अपना कारोबार बंद कर दिया है. पिछले 2 महीनों में ज्यादातर उद्योगों की कमाई 80 से 90 प्रतिशत तक घट गई है. इसकी वजह से इन उद्योगों को बाजार में अपना अस्तित्व टिकाये रखना कठिन हो गया है.

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    कोरोना का रोकथाम के लिए केंद्र सरकार ने 25 मार्च से देशव्यापी लॉकडाउन लागू किया था. करीब 80 दिनों से अधिक समय तक सख्त लॉकडाउन लागू होने के कारण संपूर्ण बाजार बंद होने से वस्तुओं की मांग में जोरदार गिराटव हुई है. जिसकी वजह से बड़े उद्योगों के साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग सहित स्टार्टअप्स को भी नुकसान उठाना पड़ा है.

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