दिल्ली-मुंबई के कारोबारियों के लिए बढ़ गई हैं मुश्किलें! नहीं मिल रही है लेबर, इस वजह से वापस नहीं आ रहे हैं प्रवासी मजदूर

दिल्ली-मुंबई के कारोबारियों के लिए बढ़ गई हैं मुश्किलें! नहीं मिल रही है लेबर, इस वजह से वापस नहीं आ रहे हैं प्रवासी मजदूर
दिल्ली-मुंबई के कारोबारियों के लिए बढ़ गई मुश्किलें, वापस नहीं आ रहे हैं मजदूर

पूरे देश Unlock की प्रक्रिया धीरे-धीरे शुरू हो रही है. लेकिन इसके बावजूद लॉकडाउन की वजह से अपने गांव गए प्रवासी मजदूर (Migrant Labor) वापस शहर आने से डर रहे हैं. प्रवासी मजदूरों के वापस नहीं आने से दिल्ली और महाराष्ट्र में छोटे कारोबारियों (Small Business owners) को सबसे ज्यादा परेशानी होगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 6, 2020, 7:12 AM IST
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नई दिल्ली. पूरे देश Unlock की प्रक्रिया धीरे-धीरे शुरू हो रही है. लेकिन इसके बावजूद लॉकडाउन की वजह से अपने गांव गए प्रवासी मजदूर (Migrant Labor) वापस शहर आने से डर रहे हैं. प्रवासी मजदूरों के वापस नहीं आने से दिल्ली और महाराष्ट्र में छोटे कारोबारियों (Small Business owners) को सबसे ज्यादा परेशानी होगी. यह दावा इंडिया रेंटिग्स एंड रिसर्च की एक रिपोर्ट में किया गया है. रिपोर्ट कहती है कि मजदूरों की कमी के कारण ऑटोमेशन की गति तेज हुई है लेकिन विनिर्माण क्षेत्र (manufacturing sector) को हाल फिलहाल क्षमता का कम इस्तेमाल और हायर प्रोडक्शन कॉस्ट का सामना करना पड़ेगा. इससे उनके मुनाफे पर असर होगा.

प्रवासी मजदूर शहरों में आने से कतरा रहे हैं
कोरोना संक्रमण के प्रकोप को रोकने के लिए मार्च के अंत में पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था. इससे प्रवासी मजदूरों के समक्ष रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया गया था और वे अपने गांवों को पलायन कर गए. रिपोर्ट के मुताबिक अब अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो गई है और आर्थिक गतिविधियों के फिर से पटरी पर लौटने की उम्मीद की जा रही है. लेकिन कोविड-19 संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ने और कई राज्यों के लॉकडाउन लगाने से प्रवासी मजदूर शहरों में आने से कतरा रहे हैं. इससे दिल्ली और महाराष्ट्र में विनिर्माण क्षेत्र खासकर माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज में उत्पादन प्रभावित होगा.

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इन राज्यों से आते हैं सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर 


एजेंसी का कहना है कि उसने कोरोना के कारण हुए रिवर्स माइग्रेशन का विभिन्न राज्यों और सेक्टरों पर असर का आकलन किया है. महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और गुजरात में सबसे अधिक प्रवासी मजदूर आते हैं. इस विश्लेषण के मुताबिक रिवर्स माइग्रेशन से दिल्ली और हरियाणा की इंड्रस्ट्रियल यूनिट्स के सबसे अधिक असर पड़ने की आशंका है जबकि महाराष्ट्र और गुजरात इससे सबसे कम प्रभावित होंगे. इससे सबसे ज्यादा असर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर होगा क्योंकि यह दूसरे राज्यों से आने वाले 60 लाख प्रवासियों को रोजगार देता है.

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मजदूरी बढ़ने से विनिर्माण लागत बढ़ गई है 
रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़ी संख्या में स्किल्ड श्रमिक अपने गांव लौट गए हैं. ऐसे श्रमिकों की कमी से आउटपुट पर बहुत दबाव है और क्षमता का पूर्ण इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज के लिए निर्यात मांग में कुछ रिकवरी हुई है लेकिन मजदूरों की कमी के कारण उन्हें इसे पूरा करना मुश्किल हो रहा है. मजदूरी बढ़ने से विनिर्माण लागत बढ़ गई है जिससे वित्त वर्ष 2021 की दूसरी तिमाही में कुछ कंपनियों का मार्जिन प्रभावित होगा.
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