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फेडरल रिजर्व के इस फैसले से अमेरिकी शेयर बाजार में हाहाकार, 10 कंपनियों की मार्केट वैल्यू से $1 लाख करोड़ साफ

एप्पल का बाजार मूल्यांकन करीब 225 अरब डॉलर है.

एप्पल का बाजार मूल्यांकन करीब 225 अरब डॉलर है.

अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद से आईटी शेयरों की बहुलता वाले शेयर बाजार सूचकांक नैसडैक में ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली. अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज नैसडैक 100 में अब तक 10 फीसदी की गिरावट दर्ज हो चुकी है. सोमवार को नैसडैक 4 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ. फेडरेल रिज़र्व (केंद्रीय बैंक) के प्रमुख जेरोम पावेल ने कहा है कि ब्याज दरों में इस तरह की बढ़ोतरी जारी रहेगी.

बता दें कि 2020 के बाद यह सबसे बड़ी 3 दिवसीय गिरावट है. ब्लूमबर्ग के अनुसार, टेक्नोलॉजी कंपनियों की बहुलता वाले इस एक्सचेंज ने 3 दिन में निवेशकों के 1.5 लाख करोड़ डॉलर डुबा दिए हैं.

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इन 10 स्टॉक्स की वैल्यू 1 ट्रिलिय डॉलर घटी
तीन दिन की बिकवाली में एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट, एमेजॉन, टेस्ला, अल्फाबेट (गूगल की पेरेंट कंपनी), एनवीडिया, मेटा (फेसबुक की पेरेंट कंपनी) एसएमएल, एयरबीएनबी और इन्टूइट का बाजार मूल्यांकन 1 ट्रिलियन डॉलर तक लुढ़क गया है. इन सभी कंपनियों में एप्पल का बाजार मूल्यांकन सर्वाधिक (225 अरब डॉलर) है.

इस साल 25 फीसदी गिरा नैसडैक
यूएस ट्रेजरी यील्ड्स में उछाल, बढ़ती महंगाई और ऊंची ब्याज दरों द्वारा मंदी की आहट से आशंकित नैसडैक इस साल अब तक 25 फीसदी लुढ़क चुका है. यह कोविड-19 की शुरुआत के बाद से अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है. गौरतलब है कि तब 1 महीने के अंदर नैसडैक 28 फीसदी लुढ़का था. हालांकि, गिरावट सिर्फ नैसडैक में दर्ज नहीं हो रही है. इसके अलावा एसएंडपी 500 भी 3.2 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ है. इसकी भी स्थिति महामारी के बाद के सबसे बुरे दौर में है.

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भारत का शेयर बाजार भी सहमा
भारतीय शेयर बाजार सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी बियर्स की चपेट में आ गए हैं. शेयर अपने 62,000 के ऑलटाइम हाई से लगभग 8,000 अंक फिसल चुके हैं और लोगों को डर है कि ये 54,000 के नीचे न लुढ़क जाए. एफआईआई लगातार भारतीय बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं. पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों का करीब 2.5 लाख रुपया डुबा दिया. आईएमएफ ने रविवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतें और महंगाई 1970 के दशक की याद दिलाती हैं. बकौल आईएमएफ, तब ऐसे ही शुरू हुई मुद्रास्फीति मंदी लेकर आई थी. हालांकि, आईएमएफ को भरोसा है कि अब केंद्रीय बैंक अधिक स्वतंत्र और भरोसेमंद हैं व ऐसी स्थिति शायद दोबारा नहीं आएगी.

Tags: USA share market

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