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सावधान! इनकम टैक्स भरते वक्त ये गलतियां पहुंचा सकती हैं जेल, ऐसे बचें

सावधान! इनकम टैक्स भरते वक्त ये गलतियां पहुंचा सकती हैं जेल, ऐसे बचें

वित्त वर्ष 2018-19 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए ITR फॉर्म अधिसूचित कर दिए हैं.

वित्त वर्ष 2018-19 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए ITR फॉर्म अधिसूचित कर दिए हैं.

वित्त वर्ष 2018-19 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए ITR फॉर्म अधिसूचित कर दिए हैं.

    वित्त वर्ष 2018-19 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए ITR फॉर्म अधिसूचित कर दिए हैं. इसके तहत अब आप असेसमेंट ईयर 2019-20 के इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) 31 जुलाई 2019 तक दाखिल कर सकते हैं.. आपसे रिटर्न फाइल करने में कोई गलती न हो, इसका ध्‍यान रखना बेहद जरूरी है. गलत सूचना देने पर दंड के साथ जुर्माने का भी प्रावधान है. आयकर रिटर्न भरने में आपसे गलती न हो, इसके लिए हम कुछ टिप्‍स बता रहे हैं. इन टिप्‍स को फॉलो कर आप रिटर्न फाइलिंग में गलतियों और उनके चलते होने वाले नुकसान से बच सकते हैं. (ये भी पढ़ें: ITR फाइलिंग के लिए जरूरी हैं ये डॉक्यूमेंट्स, यहां देखें पूरी लिस्ट)

    आपके बता दें कि हाल में, दक्षिण मुंबई स्थित ज्वेलरी कंपनी के एक डायरेक्टर को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल न करना महंगा पड़ा. मजिस्ट्रेट अदालत ने उसे तीन महीने की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. इस डायरेक्टर ने जानबूझकर आकलन वर्ष 2014-15 का रिटर्न दाखिल नहीं किया था. जबकि इसके बारे में उसे लगातार नोटिस जारी किए गए. बताया जाता है कि मामले में इस तरह सजा सुनाए जाने का यह शायद पहला मामला है. मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कंपनी शाह टाइम एंड जेवेल्स और उसके डायरेक्टर परेश सी शाह दोनों को दोषी पाया. विशेष सरकारी अधिवक्ता अमित मुंडे ने बताया कि दोनों पर 5,000-5,000 रुपये का दंड भी लगाया गया है.

    न करें आखिरी तारीख का इंतजार- 2.50 लाख रुपए से ज्‍यादा की सालाना आय वाले हर शख्‍स के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना जरूरी है. रिटर्न दाखिल करने में देरी होने पर धारा 234-एफ के तहत 10,000 रुपये तक जुर्माना लग सकता है. इसलिए अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना वक्‍त पर रिटर्न दाखिल करें.



    बैंक अकांउट का सही ब्‍यौरा देना- यह जरूरी है कि आप IFSC कोड, बैंक का नाम, बैंक खाता संख्या इत्यादि सटीक बैंक खाता डिटेल इनकम टैक्‍स रिटर्न में दें, ताकि आप तुरंत रिफंड हासिल कर सकें.

    फॉर्म 16 का इस्तेमाल- आईटीआर1 फॉर्म भरने के लिए सैलरी के ब्रेकअप की जरूरत होती है. ऐसी और इस तरह की सभी जानकारी फॉर्म 16 में मौजूद रहती हैं, इसलिए आपको काफी हद तक फॉर्म 16 की जरूरत होती है. टैक्स फाइलिंग प्‍लेटफॉर्म्‍स पर फॉर्म 16 अपलोड करने का विकल्‍प मौजूद रहता है. फॉर्म 16 सुनिश्चित करता है कि आपके रिटर्न में कम से कम समय लगे और उसमें कम से कम गलतियां हों. इसके अलावा आपको यह चिंता भी नहीं रहती कि इंप्‍लॉयर के टैन और अन्य जानकारी का सही उल्लेख किया गया है या नहीं क्योंकि वह खुद-ब-खुद भरे जाते हैं. ये भी पढ़ें: 1 रुपये के भी टैक्स डिमांड की अनदेखी पड़ सकती है भारी, जानें कैसे करें सेटलमेंट



    फॉर्म 26AS की उपलब्धता- फॉर्म 26AS भी रिटर्न फाइलिंग में मदद कर सकता है. इस फॉर्म में आपके आय स्रोतों पर कटौती किए गए टैक्स का ब्‍यौरा शामिल होता है, जिसमें वेतन, ब्याज, पेशेवर रसीद इत्यादि शामिल है. एक तरह से आप फॉर्म 16 में दिखाई दे रहे टीडीएस को 26एएस के रूप में दिखा सकते हैं. इसके अलावा यह फॉर्म आपको अन्य आय का विवरण प्राप्त करने में मदद करता है, जिसे आपको इनकम टैक्‍स रिटर्न में दिखाना चाहिए. इन पर काटे गए टीडीएस के क्रेडिट का दावा भी होना चाहिए. हालांकि, बचत खाते से ब्याज पर कोई टीडीएस कटौती नहीं होती है. इसलिए सुनिश्चित करें कि आप अपनी आय में इस आय का खुलासा करें, भले ही कोई कर देय न हो. बता दें कि सेविंग्‍स अकाउंट से 10,000 रुपए तक की ब्‍याज से हुई आय कर मुक्‍त है.

    ये भी पढ़ें: इनकम टैक्स रिटर्न भरने पर आपको मिलते हैं ये बड़े फायदे

    रिटर्न पाने के लिए दावा हो उचित- वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान, हो सकता है कि आपने ऐसे इंस्‍ट्रूमेंट्स में इन्‍वेस्‍ट किया हो, जो आपको धारा 80C के तहत टैक्‍स से छूट दिलाते हों. ऐसे में आपने जिस सीमा तक छूट का दावा किया है, उसे साबित करने क लिए आपके पास इन्‍वेस्‍टमेंट के पुख्‍ता सबूत होने चाहिए. यह भी ध्यान दें कि यदि इंप्‍लॉयर ने फॉर्म 16 में आपको दिए जाने वाले लीव ट्रैवल अलाउंस और मेडिकल अलाउंस से संबंधित छूट नहीं दी है तो आप रिटर्न दाखिल करते वक्त उसका दावा नहीं कर सकते हैं.



    सही फॉर्म चुनें- यह सुनिश्चित करें कि फाइल किए गए इनकम टैक्स रिटर्न में आपने आय के सभी स्रोतों का खुलासा किया है. वहीं अगर आप किसी भी बिजनेस या पेशे से आय प्राप्त करने वाले वेतनभोगी व्यक्ति हैं, तो रिटर्न फाइलिंग के लिए उचित फॉर्म का इस्‍तेमाल करें.

    ये भी पढ़ें: इन 6 तरह की इनकम पर नहीं लगता है एक भी रुपये का टैक्स, देखें पूरी लिस्ट

    न छिपाएं कोई आय- यह भी ध्यान रखना होगा कि आपको हर आय का खुलासा करना होगा, भले ही उस पर आपको छूट मिल रही हो. कैपिटल गेन्स में भी कोई भी व्यक्ति रिटर्न फाइल करते वक्त ही इसका खुलासा कर सकता है और इस पर क्लेम कर सकता है. उदाहरण के लिए यदि आप संपत्ति बेच रहे हैं और उस लाभ को पूरी तरह नई संपत्ति पर खर्च कर रहे हैं तो इस लेन-देन का पूरा ब्‍यौरा रिटर्न में दाखिल करें. यह आपको प्रॉपर्टी की बिक्री पर मिलने वाली राशि में से काटे गए TDS का रिफंड हासिल करने में भी मदद करेगा.

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