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करोड़पति बना देगा कबाड़ से शुरू यह बिजनेस, जानें पूरी ABCD

करोड़पति बना देगा कबाड़ से शुरू यह बिजनेस, जानें पूरी ABCD

ई-वेस्‍ट से पर्यावरण और लोगों की सेहत को काफी नुकसान पहुंच रहा.

ई-वेस्‍ट से पर्यावरण और लोगों की सेहत को काफी नुकसान पहुंच रहा.

इलेक्‍ट्रॉनिक उपकरणों के बढ़ते इस्‍तेमाल के साथ इससे निकलने वाले कचरे से पर्यावरण पर जोखिम भी बढ़ रहा है. दुनियाभर की सरकारें ई-वेस्‍ट के निस्‍तारण के लिए चिंतित हैं और इसकी रीसाइकलिंग को लेकर जागरुक कर रही हैं. कई कंपनियां इस दिशा में काम भी कर रही हैं.

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नई दिल्‍ली. सोचिए ! आपके खराब हो चुके मोबाइल, कंप्‍यूटर, लैपटॉप, टीवी, रिमोट, एलईडी का क्‍या होता है. आप में से अधिकतर लोग इसे कचरे में फेंककर भूल जाते हैं. लेकिन, यही कचरा किसी की करोड़ों रुपये की कमाई का जरिया बन जाता है. हम बात कर रहे हैं E-Waste Management Business की, जो आपको कबाड़ के जरिये करोड़पति बना सकता है.

अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (IFC) के मुताबिक, अभी देश में सालाना करीब 50 लाख टन ई-कचरा (E-Waste) निकलता है. गैजेट्स और इलेक्‍ट्रॉनिक उत्‍पादों के बढ़ते इस्‍तेमाल के साथ यह मात्रा भी हर साल आश्‍चर्यजनक रूप से बढ़ती जाएगी. इससे बड़ी मात्रा में ई-कचरे का ढेर भी बढ़ेगा और अगर आप इस बिजनेस से जुड़े हैं तो आपकी कमाई भी बढ़ती जाएगी.

बिना लागत ऐसे करें कमाई
आप पुराने, बेकार इलेक्ट्रॉनिक सामानों तथा ऐसी अन्‍य वस्तुओं को सस्ते दामों में खरीदकर उनको रीसाइक्लिंग सेंटर में बेचकर पैसे कमा सकते हैं. इसके लिए आपको सबसे पहले यह बता करना होगा कि कौन सी कंपनी या दुकान से ई-कचरा बड़ी मात्रा में निकलता है. इस तरीके से आपकी शुरुआती कमाई थोड़ी कम रहेगी लेकिन इसमें आपको खास निवेश करने की जरूरत नहीं होगी.

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ई-वेस्ट रीसाइकलिंग से बरसेंगे पैसे
इसके लिए आपको बड़े फंड की जरूरत होगी, लेकिन ई-वेस्ट रीसाइकलिंग के जरिये कम समय में ही मोटा मुनाफा भी कमाया जा सकता है. इस काम को स्‍टेप बाई स्‍टेप ऐसे शुरू कर सकते हैं-

छंटनी : ई-वेस्ट को रीसाइकलिंग प्लांट में लाकर उसकी मैन्युअली छंटनी की जाती है। उपकरणों में से बैटरी आदि को निकालकर अलग कर दिया जाता है. लैपटॉप, HDD, मेमोरी को भी अलग कर दिया जाता है.
डिस्‍मेंटल : उपकरणों को अलग करने के बाद उसे डिस्‍मेंटल किया जाता है, जिसमें कई लोगों की जरूरत पड़ती है. इस प्रक्रिया के तहत उपकरणों से निकाले गए मेटल और प्‍लास्टिक को अलग किया जाता है, ताकि रीसाइकलिंग में दिक्‍कत न हो.
छोटे आकार में बांटना : डिस्‍मेंटल करने के बाद भी जिन मैटेरियल का आकार बड़ा है, उन्‍हें दो-दो इंच के व्‍यास में काटकर छोटा कर लिया जाता है. इस तरह सभी ई-वेस्‍ट एक आकार के हो जाते हैं. अब क्रसर मशीन के जरिये इनका चूरा बना दिया जाता है.
धातुओं को अलग करना : बड़े चुंबक की मदद से चूरा बने कचरे में से सभी लौह उपकरणों को अलग कर लेते हैं. इस प्रक्रिया से अलग हुए धातु वाले कच्‍चे मैटेरियल को वापस फैक्‍टरियों को बेच दिया जाता है, जिनका इस्‍तेमाल अन्‍य उत्‍पाद बनाने में होता है.
वाटर सेपरेशन प्रोसेस : अब पानी की मदद से ई-वेस्‍ट में से प्‍लास्टिक और ग्‍लास को अलग कर लिया जाता है. इसे प्‍लास्टिक उपकरण या चप्‍पल-जूते बनाने वाली कंपनियों को बेच सकते हैं. शेष बचे ग्‍लास को मोबाइल या अन्‍य उपकरणों की स्‍क्रीन बनाने वाली फैक्‍टरियों को बेचकर मोटा मुनाफा कमा सकते हैं. इस प्रक्रिया से निकली तांबा, स्‍टील जैसी धातुओं को भी अलग कंपनियों को बेच सकते हैं.

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कितनी जगह और मशीनरी की जरूरत
इस बिजनेस को शुरू करने के लिए 5 हजार वर्गफीट जगह चाहिए, जहां रीसाइकलिंग से लेकर सभी प्रोसेस किए जा सकेंगे. बिजनेस में लगने वाली मशीनों को 25 लाख में खरीदा जा सकता है. प्रोजेक्‍ट के हिसाब से अन्‍य खर्चे भी होंगे. मशीनों को चलाने के लिए 20 किलोवाट का बिजली कनेक्‍शन लेना होगा. इसे 8 से 10 लोगों के साथ शुरू किया जा सकता है.

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ये कागजात होंगे जरूरी
-सबसे पहले जीएसटी पंजीकरण कराना होगा.
-उद्यम यानी एमएसएमई का लाइसेंस लेना होगा.
-फायर और पॉल्‍यूशन बोर्ड से एनओसी चाहिए.
-राज्‍य और आईएसडीसी से खतरनाक कचरे के प्रबंधन की मेंबरशिप लेनी होगी.

Tags: Business ideas, Plastic waste

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