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कभी भी खरीद सकते हैं सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, जानिए कैसे

सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड में निवेश के लिए आरबीआई की ओर से इसके जारी किए जाने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है.

सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्‍ड में निवेश के लिए आरबीआई की ओर से इसके जारी किए जाने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है.

सॉवरेन गोल्‍ड बॉन्ड (SGB) का मैच्योरिटी पीरियड 8 साल का है. इस पर हर साल 2.5 फीसदी ब्याज मिलता है. वहीं, 8 साल की मैच्योरिटी के बाद रिडीम करने पर कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gain Tax) में छूट मिलती है.

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    अजीत कुमार

    नई दिल्‍ली. आम निवेशक सोने में निवेश (Investment in Gold) को लेकर हमेशा उत्सुक होते हैं. हालांकि, उनके सामने दुविधा होती है कि आखिर सोने में निवेश के उपलब्ध विकल्पों में से किसे प्राथमिकता दी जाए. सोने में निवेश आप फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में कर सकते हैं. लेकिन, फिजिकल फॉर्म में गोल्ड (Physical Gold) खरीदना निवेश के नजरिये से बेहतर विकल्प नहीं है. इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में भी निवेश के दो विकल्प प्रचलित हैं. पहला, गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) और दूसरा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) है. इनमें भी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सबसे बेहतर है.

    क्या है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड?
    इस बॉन्ड का मैच्योरिटी पीरियड 8 साल का है यानी जो निवेशक लंबी अवधि तक निवेश बनाए रख सकते हैं, उनके लिए सोने में निवेश का यह सबसे बेहतर विकल्प है. इसमें कई तरह के फायदे हैं, जैसे इस पर हर साल 2.5 फीसदी ब्याज मिलता है. वहीं, 8 साल की मैच्योरिटी के बाद रिडीम करने पर कैपिटल गेन टैक्स में छूट मिलती है. साथ ही एक्स्ट्रा एक्सपेंस (टोटल एक्सपेंस रेश्यो) भी नहीं है. हालांकि, समस्या यह है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड हमेशा सब्सक्रिप्शन के लिए उपलब्ध नहीं होते. फिलहाल ये बॉन्ड सब्सक्रिप्शन के लिए उपलब्ध नहीं हैं. इस बांड की अगली सीरीज/किस्त इस महीने के आखिर तक या अगले महीने से उपलब्ध हो सकती है.

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    अगर एसजीबी अभी खरीदना हो तो?
    जो निवेशक अगली सीरीज तक इंतजार नहीं कर सकते और उन्हें लग रहा है कि कीमतों में तेजी की वजह से उस समय जारी होने वाले बॉन्ड का इश्यू प्राइस ज्यादा होगा, तो वे अभी डीमैट फॉर्म में स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड के लिए उपलब्ध सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीद सकते हैं. स्टॉक एक्सचेंज पर ये बॉन्ड आमतौर पर सोने की मौजूदा कीमतों से कम यानी डिस्काउंट के साथ उपलब्ध होते हैं. ट्रेडेबल बॉन्ड खरीदने पर भी कैपिटल गेन टैक्स में छूट मिलेगी, बशर्ते आप उन्हें उनकी मैच्योरिटी (8 साल) तक होल्ड करते हैं.

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    एसआईपी जैसे भी खरीद सकते हैं
    स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड के लिए उपलब्ध सॉवरेन बॉन्ड में लिक्विडिटी काफी कम होती है. इसलिए अगर आप ज्यादा वॉल्यूम में खरीदना चाहेंगे तो डिस्काउंट या तो काफी कम हो जाएगा या मार्केट प्राइस के बराबर आ जाएगा. इसलिए आप कम वॉल्यूम में यानी कुछ यूनिट ही खरीदें. हां, आप एसआईपी की तर्ज पर हर सीरीज में थोड़ा-थोड़ा करके यानी कुछ-कुछ यूनिट भी खरीद सकते हैं. इससे आपको एवरेजिंग का फायदा भी हो जाएगा.

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    मैच्योरिटी से पहले रिडीम करते हैं तो
    अगर आप सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को मैच्योरिटी पीरियड से पहले रिडीम करते हैं तो टैक्स फिजिकल गोल्ड की तरह ही लगेगा. आसान शब्‍दों में समझें तो अगर आप एसजीबी खरीदने के 36 महीने से पहले बेच देते हैं तो होने वाली कमाई यानी लाभ को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाएगा, जो आपके ग्रॉस टोटल इनकम में जोड़ दिया जाएगा. इस पर आपको अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा. अगर आप खरीदने के 36 महीने बाद बेचते हैं तो लाभ यानी रिटर्न पर इंडेक्सेशन के फायदे के साथ 20 फीसदी (सेस और सरचार्ज मिलाकर 20.8 फीसदी) लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स देना होगा.

    इंडेक्सेशन के तहत महंगाई के हिसाब से पर्चेज प्राइस को बढा दिया जाता है, जिससे रिटर्न कम हो जाता है और टैक्स में बचत होती है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को पांच साल के बाद रिडीम करने का विकल्प होता है. साथ ही डीमैट फॉर्म में भी बॉन्ड लेने वाले कभी भी स्टॉक एक्सचेंज पर इसे बेच या ट्रांसफर कर सकते हैं.

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    ब्याज पर टैक्स
    सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर हर वित्त वर्ष 2.5 फीसदी ब्याज भी मिलता है. इस ब्याज पर टैक्स में छूट नहीं है. यह ब्याज अन्य स्रोतों से होने वाली आय के तौर पर आपकी ग्रॉस इनकम में जुड़ जाएगा और आपको टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा. एक बात और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर टीडीएस का प्रावधान नहीं है.

    (लेखक पर्सनल फाइनेंस मामलों के जानकार हैं.)

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