चालू वित्‍त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि में हो सकती है 17% की गिरावट, कृषि क्षेत्र संभाल सकता है हालात

चालू वित्‍त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि में हो सकती है 17% की गिरावट, कृषि क्षेत्र संभाल सकता है हालात
रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्‍स एंड रिसर्च के मुताबिक, हालात बेहतर होने तक कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्‍यवस्‍था को संभाल सकता है.

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (India Ratings and Research) की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना वायरस के कारण संकट में आई भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को पटरी पर लाने में ग्रामीण क्षेत्र की मांग (Rural Demand) मदद कर सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि हालात बेहतर होने तक एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर (Agriculture Sector) अर्थव्‍यवस्‍था की रफ्तार कुछ हद तक बनाए रख सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 28, 2020, 8:40 PM IST
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नई दिल्‍ली. कोरोना वायरस के फैलने की रफ्तार पर ब्रेक लगाने के लिए लागू किए गए सख्‍त लॉकडाउन (Lockdown) के कारण देश की अर्थव्‍यवस्‍था (Indian Economy) पर बहुत बुरा असर पड़ा है. केंद्र सरकार ने डांवाडोल अर्थव्‍यवस्‍था को संभालने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्‍साहन पैकेज (Stimulus) की घोषणा भी की. उम्‍मीद की जा रही है कि हालात सुधरने पर सरकार दूसरे प्रोत्‍साहन पैकेज की घोषणा भी करेगी. इस बीच रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्‍स एंड रिसर्च (India Ratings and Research) की रिपोर्ट के मुताबिक, हालात सुधरने तक कृषि क्षेत्र (Agriculture Sector) देश की अर्थव्‍यवस्‍था को कुछ हद तक संभाल सकता है.

'ग्रामीण मांग सहरा दे सकती है, लेकिन शहरी मांग का विकल्‍प नहीं है'
रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वित्‍त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर में 17 फीसदी से ज्‍यादा की गिरावट दर्ज की जा सकती है. इंडिया रेटिंग्‍स की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना वायरस के कारण बने हालात के बाद ग्रामीण मांग से अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद मिल सकती है. हालांकि, इसमें ये साफ कर दिया गया है कि ग्रामीण मांग शहरी मांग का विकल्प नहीं बन सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा हालात से उबरने में इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर को फिलहाल काफी दिक्कत पेश आ रही है. ऐसे में अर्थव्यवस्था की रफ्तार को कुछ हद तक बनाए रखने में कृषि क्षेत्र मददगार साबित हो सकता है.

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ट्रैक्‍टर और मोटरसाइकिल की बिक्री के आंकड़ों से मिला प्रोत्‍साहन


इंडिया रेटिंग्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण मांग का बड़ा हिस्सा सस्‍टेनेबल कंज्‍यूमर गुड्स से अलग होता है, लेकिन जून 2020 में मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर की बिक्री के आंकड़े काफी अच्‍छे रहे हैं. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र की मांग से अर्थव्‍यवस्‍था को मजबूती मिलने की उम्‍मीद की जा सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में कृषि क्षेत्र का योगदान करीब 17 फीसदी है. हमारा मानना है कि ग्रामीण मांग अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर पर उपभोग मांग को बढाने में मदद कर सकती है, लेकिन यह शहरी मांग का विकल्प नहीं बन सकती है.

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'लॉकडाउन और उसके बाद कृषि क्षेत्र पर नहीं पड़ा ज्‍यादा असर'
रिपोर्ट में 2020-21 की पहली तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर में 17.03 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया गया है. इंडिया रेटिंग्स के मुताबिक, लॉकडाउन के दौरान और उसके बाद कृषि क्षेत्र पर बहुत ज्‍यादा असर नहीं पड़ा है. ऐसे में वित्‍त वर्ष 2020-21 में भी इसमें सालाना आधार पर करीब 3.5 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है. कई साल के बाद कृषि क्षेत्र में लगातार तीन मौसम में अच्छी फसल हुई है. रबी 2019, खरीफ 2019 और रबी 2020 में अच्छी पैदावार रही. वहीं, मानसून पूर्व की अच्छी बारिश और समय पर मानसून आने से देश के ज्यादातर हिस्सों में खरीफ 2020 की बुआई पिछले साल के मुकाबले काफी अच्छी रही है. ये सभी चीजें ग्रामीण मांग और कृषि क्षेत्र के जरिये अर्थव्‍यवस्‍था को सहारा मिलने का संकेत दे रही हैं.
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