केवी सुब्रमण्यम ने आर्थिक सर्वेक्षण कोरोना वॉरियर्स को समर्पित किया, यहां पढ़ें उन्होंने और क्या कहा

संसद के दोनों सदनों में पेश किए जा चुके आर्थिक सर्वेक्षण को मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम ने लॉन्च किया.

संसद के दोनों सदनों में पेश किए जा चुके आर्थिक सर्वेक्षण को मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम ने लॉन्च किया.

Economic Survey 2021: भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम ने इस बार के आर्थिक सर्वेक्षण को कोविड-वॉरियर्स को डेडिकेट किया है. उन्होंने कहा कि अगर लॉकडाउन नहीं भी लगाया जाता तो भी कोरोना वायरस महामारी से भारतीय अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ता.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 29, 2021, 4:55 PM IST
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नई दिल्ली. संसद के दोनों सदनाे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आर्थिक सर्वेक्षण पेश किए जाने के बाद आज देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार के वी सुब्रमण्यम ने मीडिया को संबोधित किया. आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) को मुख्य आर्थिक सलाहकार और उनकी टीम ही तैयार करती है. केवी सुब्रमण्यम ने इस बार आर्थिक सर्वेक्षण देश के कोविड वॉरियर्स को डेडिकेट किया है. उन्होंने कहा कि लॉकडान के शुरुआत से ही इन कोविड वॉरियर्स ने न सिर्फ इंसानों की जान बचाई, बल्कि जल्द से जल्द रिकवरी में भी मदद की. पॉलिसी रिस्पॉन्स की वजह से भारत ने इस महामारी का ठीक से सामना किया. उन्होंने ने संक्रमण 37 लाख मामलों की गुंजाइश को खत्म करने में सफल रहा. उन्होंने कहा कि अगर लॉकडाउन नहीं भी लगाया जाता तो भी कोरोना वायरस महामारी से भारतीय अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ता.

CEA केवी सुब्रमण्यम ने कहा कि ढांचागत सुधारों का ऐलान करने वाला भारत इकलौता देश है. भारत ने ‘जीवन और जिविका’ बचाने पर ध्यान केंद्रित किया. भारत ने समझा कि जीडीपी ग्रोथ रिकवरी हो जाएगा कि लेकिन एक जीवन को वापस नहीं लाया जा सकेगा. इस बार के इकोनॉमिक सर्वे में काउंटर-साइक्लिक फिस्कल पॉलिसी की सिफारिश की गई है. इसके तहत प्राइवेट सेक्टर द्रवारा कुछ खराब करने के बाद ही सरकार दखल देगी. प्राइवेट सेक्टर जहां बेहतर करेगी, वहां से सरकार अपने कदम पीछे करेगी.

उन्होंने कहा कि कई राज्यों में कोविड-19 संक्रमण और मृत्यु में कम करने में लॉकडाउन की अहम भूमिका नजर आई है. बिना लॉकडाउन के भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोरोना का असर देखने को मिलता. लेकिन, लॉकडाउन ने बेहतर रिस्पॉन्स तैयार करने में मदद की और हम जीवन और जीविका बचाने पर ध्यान दे पाए. PMJDY ने इस दौरान बहुत मदद की.

आर्थिक सर्वे की खास बातें...
>> कोरोनावायरस संक्रमण का सबसे बुरा असर मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन पर पड़ा है. कृषि क्षेत्र से सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं.

>>सरकार के खर्च बढ़ाने और एक्सपोर्ट से ग्रोथ की गिरावट थमी है.

>> फिस्कल ईयर 2022 में GDP की ग्रोथ 11 फीसदी रह सकती है.



>> सर्वे के मुताबिक, इकोनॉमी में V शेप रिकवरी नजर आ रही है.

>> फिस्कल ईयर 2021 के लिए कंबाइंड फिस्कल डेफेसिट टारगेट से ज्यादा.

इकोनॉमिक सर्वे के कुछ अहम बातों को समझाते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा -

>> आर्थिक संकट के दौर में ग्रोथ को बूस्ट करने के लिए आर्थिक सर्वेक्षण 2021 में काउंटर-साइक्लिक पॉलिसी (Counter-Cyclical Policy) पर जोर दी गई है. आर्थिक संकट में फिस्कल मल्टीप्लायर्स असम्मान रूप से अधिक होती हैं.

>> आर्थिक ग्रोथ भारत को कर्ज में स्थिरत की ओर ले जाता है. हालांकि, इसका उलटा नहीं होता है. एडवांस अर्थव्यवस्थाओं में भी कम ग्रोथ के दौर इस तरह की स्पष्टता नहीं देखने को मिलती हैं.

>> नॉमिनल ब्याज दर और नॉमिनल जीडीपी विकास दर में बड़ा अंतर कर्ज में स्थिरता सुनिश्चित करने में सहूलियत प्रदान करता है.

>> भरत सरकार के कर्ज पर ब्याज दर भारत के ग्रोथ रेट से कम है. यह अपवाद नहीं, बल्कि नियमों के अनुसार है. ब्याज दर-विकास का अनुपात ओईसीडी देशों की तुलना में बेहतर है.

>> चूंकि, भविष्य में ब्याज दर-विकास दर निगेटिव में जाने की संभवना रखता है. ऐसी स्थिति में ग्रोथ पर फोकस फिस्कल पॉलिसी पर जोर देने कर्ज और जीडीपी अनुपात घटाया जा सकता है.

>> नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन के लिए फिस्कल खर्च से प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा मिलेगा. इससे उत्पादकता बढ़ेगी और रोजगार के अवसर पैदा होंगे.
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