ICICI Bank-Videocon मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED ने दीपक कोचर को गिरफ्तार किया

ICICI Bank-Videocon मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED ने दीपक कोचर को गिरफ्तार किया
दीपक कोचर (File Photo)

आईसीआईसीआई-वीडियोकॉन मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार को बिजनेसमैन दीपक कोचर को गिरफ्तार कर लिया है. मनी लॉन्ड्रिंग जांच एजेंसी ईडी ने हाल ही में दीपक कोचर से पूछताछ की थी. इसके बाद नये सबूत के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 8, 2020, 12:04 AM IST
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मुंबई. प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने सोमवार को मनी लॉन्ड्रिंग केस में दीपक कोचर (Deepak Kochhar) को गिरफ्तार कर लिया है. करीब डेढ़ साल पहले ​बिजनेसमैन दीपक कोचर और उनकी पत्नी चंदा कोचर (Chanda Kochhar) के खिलाफ आईसीआईसीआई बैंक-वीडियोकॉन मामले (ICICI Bank-Videocon Case) में केस दर्ज हुआ था. चंदा कोचर आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व प्रबंध निदेशक व सीईओ रह चुकी हैं. मनी लॉन्ड्रिंग जांच एजेंसी ED ने हाल ही में दीपक कोचर से पूछताछ की थी. इसके बाद नये सबूत के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया है.

बता दें कि ED ने चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर, वीडियोकॉन ग्रुप के वेणुगोपल धूत (Venugopal Dhoot) और अन्य के खिलाफ 1,875 करोड़ रुपये के कर्ज को मंजूरी देने के मामले में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की जांच के लिए PMLAके तहत आपराधिक मामला दर्ज किया था. यह लोन आईसीआईसीआई बैंक से वीडियोकॉन ग्रुप को दिया गया था. इसके बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा FIR के आधार पर ईडी ने इस मामले पर कार्रवाई की थी. सीबीआई ने कोचर दंपत्ति के अलावा धूत की कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. इसमें धूत की वीडियोकॉन इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स लि. और वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लि. थीं. CBI की FIR में दीपक कोचर की कंपनी न्यूपावर रिन्यूवेबल्स का भी नाम है.


पिछले महीने ही कथित रूप से दीपक कोचर की एक कंपनी ने दिल्ली हाई कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जब्त की गई संपत्तियों को छुड़ाने के लिये पहुंची थी. प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले मार्च 2019 में इस कंपनी की संपत्तियों को जब्त किया था. इस कंपनी का नाम पैसिफिक कैपिटल सर्विस प्रा. लि. है. कंपनी ने कोर्ट से कहा था कि ED उसकी संपत्ति को एक साल के लिए ही जब्त कर सकता है. एक साल तक जब्ती के बाद कोई चार्जशीट नहीं फाइल की गई है.



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इसके बाद ED ने इस याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि संपत्ति जब्ती को लेकर एक ऐसी ही याचिक बॉम्बे हाई कोर्ट में लंबित है. पिछले साल मार्च में ही पैसिफिक सर्विस प्रा. लि. के कार्यालय पर ईडी द्वारा छापे में एक डायरी, हार्ड डिस्क और 10.5 लाख रुपये जब्त किये गये थे.

कोचर दंपत्ति ने खारिज किये अपने ऊपर लगे आरोप
ईडी द्वारा पूछताछ में चंदा कोचर ने किसी भी गड़बड़ी को नकारा है. उन्होंने कहा था कि लोन को मंजूरी के सामूहिक फैसला था. इसे किसी एक व्यक्ति ने मंजूर नहीं किया था. दीपक कोचर ने भी पहले अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर चुके हैं.

क्या है ये आईसीआईसीआई-विडियोकॉन धूत मामला
साल 2010 में धूत की कंपनी द्वारा दीपक कोचर और उनके रिश्तेदारों की कंपनी को 64 करोड़ की रकम न्यूपावर रीन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दी गई. इसी मामले के बाद साल 2012 में आईसीआईसी बैंक से विडियोकॉन ग्रुप को करीब 3,250 करोड़ रूपये का लोन दिया गया. आईसीआईसीआई बैंक से लोन मिलने के करीब 6 महीने के बाद ही धूत ने कंपनी का स्वामित्व दीपक कोचर के एक ट्रस्ट को करीब 9 लाख रूपये ट्रांसफर में किया था, जिसे जांच एजेंसी धूत की रकम मानकर चल रही है.

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CBI के द्वारा दर्ज मामला के मुताबिक इस कंपनी को वेणुगोपाल धूत और चंदा कोचर के पति दीपक कोचर सहित उनके दो अन्य रिश्तेदारों के साथ मिलकर उस न्यूपावर रीन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड (NRPL) कंपनी को खड़ा किया था. उसके बाद ही ICICI बैंक की कर्जदार कंपनी विडियोकॉन इंडस्ट्रीज द्वारा चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की कंपनी में निवेश करने को लेकर हुई फर्जीवाड़े मामले की जानकारी मिलने के बाद सबसे पहले केन्द्रीय जांच एजेंसी CBI ने ये मामला दर्ज किया था. बाद में उसी मामले को आधार बनाते हुए ईडी ने भी इस मामले को टेकओवर करके चंदा कोचर, दीपक कोचर सहित कई आरोपियों से कई बार पूछताछ की थी. इसी आरोप की वजह से चंदा कोचर को अक्टूबर 2018 में अपने पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था.
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