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इस साल सीमित रहेगा खाद्य तेल का आयात, 15 लाख टन ज्‍यादा होगा घरेलू उत्‍पादन

तेल वर्ष 2020-21 में खाद्य तेल का आयात सीमित रहने का अनुमान है.
तेल वर्ष 2020-21 में खाद्य तेल का आयात सीमित रहने का अनुमान है.

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के मुताबिक, वित्‍त वर्ष 2020-21 (FY21) में भारत का खाद्य तेल आयात (Edible Oil Import) 1.25-1.35 करोड़ टन रहने का अनुमान है. दरअसल, तिलहन किसान (Farmers) ज्‍यादा रकबे में सरसों की फसल लगा रहे हैं. ऐसे में घरेलू उत्‍पादन बढ़ना तय है. देश का खाद्य तेल आयात तेल वर्ष 2019-20 (नवंबर-अक्टूबर) में 13 फीसदी घटकर 1.35 करोड़ टन रहा था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 23, 2020, 10:39 PM IST
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नई दिल्ली. कोविड-19 महामारी (Coronavirus Crisis) के कारण होटलों में खपत काफी कम (Low Consumption) होने और घरेलू उत्पादन (Domestic Production) में बढ़ोतरी की उम्‍मीदों के कारण तेल वर्ष 2020-21 में भारत का खाद्य तेल आयात (Edible Oil Import) 1.25 करोड़ से 1.35 करोड़ टन रहने का अनुमान है. व्‍यापारियों के संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के मुताबिक, देश का खाद्य तेल आयात तेल वर्ष 2019-20 (नवंबर-अक्टूबर) में 13 फीसदी घटकर एक करोड़ 35.2 लाख टन रहा था.

देश में कमजोर मांग का स्‍तर आयात पर डालेगा असर
एसईए के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि वर्ष 2020-21 में खाद्य तेल आयात सीमित रहने का अनुमान है. उन्‍होंने कहा कि घरेलू (Oilseed) उत्पादन बढ़ने और खाद्य तेल उत्पादन 10-15 लाख टन ज्‍यादा रहने की उम्‍मीद है. ऐसे में खाद्य तेल का आयात कम होना तय है. कोविड-19 महामारी (COVID-19 Pandemic) के मद्देनजर घरेलू खपत कम (Domestic Consumption) होने की वजह से कमजोर मांग (Weak Demand) का स्तर इस साल आयात पर असर डालेगा.

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किसानों ने ज्‍यादा रकबे में लगाई है सरसों की फसल


चतुर्वेदी ने कहा कि भारत एक मूल्य-संवेदनशील बाजार (Price Sensitive Market) है. लिहाजा, देश में किसी भी उत्‍पाद की ऊंची कीमतें (Price Hike) नकारात्मक तौर पर खपत को प्रभावित कर सकती हैं. एसईए ने कहा कि तिलहन किसान (Farmers) विशेष रूप से सरसों उत्पादक ज्‍यादा रकबे में सरसों की फसल लगा रहे हैं. दरअसल, इस बार सरसों की बेहतर कीमत मिलने की वजह से ऐसा हुआ है. ऐसे में तेल उत्पादन में अच्छी वृद्धि होने की पूरी उम्‍मीद है. चतुर्वेदी ने कहा कि इन सभी पहलुओं को मिलाकर देखें तो देश का खाद्य तेल आयात सीमित रहने की पूरी संभावना बनती है.



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खाद्य तेलों की कीमतों में हुई 30 फीसदी तक वृद्धि
आलू प्याज के बढ़ते दाम के बाद अब खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है. खाने में इस्‍तेमाल होने वाले सभी खाद्य तेलों मूंगफली, सरसों का तेल, वनस्पति, सोयाबीन, सूरजमुखी और ताड़ की औसत कीमतें फिर बढ़ गई हैं. पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी के तेल की कीमतों में 20 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. खाद्य तेल की बढ़ती कीमतें सरकार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है. यही कारण है कि इसकी कीमतों को कम करने के तरीकों को लेकर सरकार विचार कर रही है.
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