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क्यों बढ़ रहे हैं Palm Oil के दाम, दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है यह तेल

क्यों बढ़ रहे हैं Palm Oil के दाम, दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है यह तेल

पाम ऑयल के दामों में पिछले 2 महीनों से लगातार तेजी देखने को मिल रही है.

पाम ऑयल के दामों में पिछले 2 महीनों से लगातार तेजी देखने को मिल रही है.

खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव सुधांशु पाण्डेय ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर बताया है कि केन्द्र ने त्योहारों के मौसम को ध्यान में रखते हुए लोगों को राहत देने के लिए खाद्य तेलों की कीमतों को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं.

    Edible Oil Price: इस समय खाद्य तेलों के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं. त्योहारी सीजन के चलते मांग बढ़ने पर खाने के तेल की कीमतों में और उछाल आया है. दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेल पाम ऑयल के दामों में पिछले 2 महीनों से लगातार तेजी देखने को मिल रही है.

    पाम ऑयल की कीमतों में उछाल की वजहों में से एक वजह यह भी है कि पाम ऑयल की मांग ज्यादा हैं और सप्लाई कम है. सितंबर में मलेशिया का इंवेंट्री गिरी है. अगस्त में इंवेंट्री 14 महीने के उच्च स्तर पर थी. इसके अलावा इंडोनेशिया ने सितंबर में एक्सपोर्ट ड्यूटी 93 डॉलर से बढ़ाकर 166 डॉलर की है. इसका भी तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है. साथ ही एनर्जी संकट ने भी पाम की कीमतों को बढ़ाने का काम किया है.

    उधर, जानकार बता रहे हैं कि पाम ऑयल का सबसे बड़े उत्पादक देश मलेशिया में पाम तेल का उत्पादन पांच वर्षों में कम स्तर पर है. पाम की खेती का सबसे बड़ा संकट है श्रमिकों की कमी. इस समय यह उद्योग श्रमिकों की कमी से भी जूझ रहा है. बताया जा रहा है कि अगले वर्ष मार्च तक पाम उत्पादन की कमी से जूझना पड़ेगा.

    मलेशियाई पाम ऑयल एसोसिएशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नगीब वहाब के अनुसार, देश में पाम ऑयल का उत्पादन इस साल 18 मिलियन टन से नीचे आ सकता है. मलेशियाई पाम ऑयल एसोसिएशन इस क्षेत्र के ताड़ के 40 फीसदी बागानों का नेतृत्व करता है. एसोसिएशन के अनुसार पिछले के मुकाबले इस साल पाम ऑयल में 6 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है.

    नगीब वहाब के अनुसार पाम उद्योग कोरोना महामारी से पहले भी श्रमिकों की कमी से जूझ रहा था. उन्होंने बताया कि फसल की कटाई के दौरान श्रमिकों की अधिक जरूरत पड़ती है. उन्होंने बताया कि श्रमिकों की जिस कमी से पाम उद्योग जूझ रहा है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. श्रमिकों की कमी से पाम उत्पादन पर जो असर पड़ रहा है उसका असर अगल कई वर्षों तक रहेगा.

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    नगीब ने कहा कि पैदावार साल के अंत तक कम हो जाएगी और 2022 की पहली तिमाही तक कमजोर रहने की संभावना है. दूसरी तिमाही में उत्पादन में सुधार हो सकता है, लेकिन इसके लिए सरकार को 32,000 विदेशी श्रमिकों को देश में प्रवेश करने की मंजूरी देनी होगी.

    कुशल कटाई श्रमिकों की कमी के चलते किसानों ने फलों को पेड़ पर ही लटके छोड़ दिया है.

    खाद्य तेलों की कीमतों पर सरकार एक्शन में
    भारत में खाने के तेल की कीमतों में लगातार हो रही तेजी को देखते हुए सरकार एक्शन मोड में आ गई है. केंद्र सरकार ने आज सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ खाद्य तेल की कीमतों पर नियंत्रण के लिए भंडारण सीमा आदेश पर कार्रवाई की समीक्षा बैठक बुलाई.

    खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव सुधांशु पाण्डेय ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर बताया है कि केन्द्र ने त्योहारों के मौसम को ध्यान में रखते हुए लोगों को राहत देने के लिए खाद्य तेलों की कीमतों को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं.

    उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने बताया कि उनका विभाग खाद्य तेलों की कीमतों और स्टॉक पर लगातार नजर रखे हुए है.

    Tags: Edible oil price, Palm oil

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