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3 महीने में 20 से 40 रुपये लीटर तक महंगे हो गए खाने के तेल, देखें आज की रेट लिस्ट...!

खाने के तेल ने बिगाड़ा रसोई का बजट
खाने के तेल ने बिगाड़ा रसोई का बजट

कुछ दिनों से सब्जि़यों के दाम में राहत मिली तो अब सरसों और रिफाइंड तेल के दाम में बढ़ोतरी शुरू हो गई है. बीते तीन महीनों में खाने के तेलों के दाम 20 रुपये लीटर से लेकर 40 रुपये लीटर तक बढ़ गए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 12, 2021, 5:15 PM IST
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नई दिल्ली. बीते तीन महीने से खाने के तेलों ने आम लोगों के किचन का बजट बिगाड़ दिया है. कुछ दिनों से सब्जि़यों के दाम में राहत मिली तो अब सरसों और रिफाइंड तेल के दाम में बढ़ोतरी शुरू हो गई है. बीते तीन महीनों में खाने के तेलों के दाम 20 रुपये लीटर से लेकर 40 रुपये लीटर तक बढ़ गए हैं. खाद्य तेल बाज़ार में ऐसी आशंका भी जताई जा रही है कि अभी यह दाम और बढ़ेंगे. वहीं तेलों की चढ़ रही इस महंगाई से अप्रैल-मई में जाकर ही छुटकारा मिलने की उम्मीद है.

तीन महीने के अंदर अब सरसों के तेल का दाम 140 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं. कई नामी ब्रांड के तेल 140 रुपये लीटर मिल रहे हैं तो लोकल ब्रांड सरसों का तेल 135 रुपये लीटर भी मिल जा रहा है. जबकि अक्टूबर से पहले यही सरसों का तेल 90 रुपये लेकर 100 रुपये लीटर तक बिक रहा था. लेकिन देखते ही देखते बीते तीन महीनों में सरसों के तेल के दाम में 40 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है. दिसंबर से जनवरी में ही सरसों के तेल के दाम 10 रुपये लीटर बढ़ गए हैं.

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रिफाइंड तेल की बात करें तो वो भी तेलों की इस महंगाई से अछूता नहीं है. तीन माह पहले 15 लीटर रिफाइंड के टिन की कीमत 1650 रुपये थी, अब इसके दाम 1950 रुपये हैं. इसके साथ ही एक लीटर रिफाइंड 98 रुपये से 130 रुपये का हो गया है. तेल के जानकार बताते हैं कि रिफाइंड के 15 लीटर की टिन पर पिछले तीन माह में 300 रुपये की तेजी आई है. ये तेजी अभी जारी रहने की आशंका है.



तेल महंगे होने के यह हैं सबसे बड़े कारण
अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष शंकर ठक्कर का कहना है, “भारत में खाने के तेल की खपत का 65 फीसदी से भी ज़्यादा अधिक तेल आयात करना पड़ता है. जबकि इस वक्त विदेशों में तेल की कीमतें खुद ही बढ़ी हुई हैं. क्योंकि मौसम खराब होने के चलते पहले ही वहां पर फसलें खराब हो चुकी हैं.''

खराब मौसम से प्रभावित हुआ सोयाबीन
लैटिन अमेरिका में खराब मौसम ने सोयाबीन के उत्पादन को खासा प्रभावित किया है. इंडोनेशिया में पाम तेल का उत्पादन नहीं बढ़ा है. वहीं मलेशिया में ऑटो ईधन के रूप में 30 फीसद तक पॉम ऑयल मिलाने की मंजूरी के चलते भी इसकी सप्लाई पर असर पड़ा है. अर्जेंटीना में हड़ताल के चलते भी नरम तेलों की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा था.”
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