बाजार में सस्ती हो रही मुर्गी, फिर भी बढ़ रहे अंडे के भाव, जानिए क्यों

बाजार में सस्ती हो रही मुर्गी

बाजार में सस्ती हो रही मुर्गी

इस साल सर्दियों के सीजन में जहां एक ओर अंडे के रेट बढ़ते जा रहे हैं वहीं, मुर्गी के रेट्स में गिरावट देखने को मिल रही है. पोल्ट्री बाज़ार (Poultry Market) के जानकारों ने बताया कि इस साल अंडे ने अपने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 28, 2020, 12:51 PM IST
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नई दिल्ली. इस साल सर्दियों के सीजन में जहां एक ओर अंडे के रेट बढ़ते जा रहे हैं वहीं, मुर्गी के रेट्स में गिरावट देखने को मिल रही है. पोल्ट्री बाज़ार (Poultry Market) के जानकारों ने बताया कि इस साल अंडे ने अपने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं. यूपी में तो 100 अंडे के रेट 600 रुपये से ऊपर जा चुके हैं. वहीं देश में अंडे की सबसे बड़ी मंडी बरवाला (Barwala) में रेट 550 रुपये तक पहुंच चुके हैं. वहीं, इस समय मुर्गी के रेट्स करीब 30 रुपये किलो पर आ गए हैं.

जानिए क्यों महंगा हो रहा है अंडा

पोल्ट्री फार्म के मालिक अनिल के मुताबिक, यह अंडे का अब तक का सबसे महंगा रेट है. कोरोना के चलते लाखों मुर्गियां जिंदा जमीन में दफन कर दी गईं. अंडे-चूजे तक जमीन में दबा दिए गए. फ्री में भी कोई मुर्गी का खरीदार नहीं मिल रहा था. कोरोना वायरस में करीब 60 फीसद मुर्गियों को मार दिया गया, जिसकी वजह से अब बाजार में अंडा देने वाली मुर्गियां कम हैं और अंडे की डिमांड ज़्यादा है. इसलिए अंडे के रेट्स में इतना उछाल देखने को मिल रहा है.

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आखिर क्यों आ रही इस डिमांड में कमी

चिकन मार्केट एक्सपर्ट और यूपी पोल्ट्री फार्म एसोसिएशन के अध्यक्ष नवाब अली के मुताबिक, “अंडा न देनी वाली मुर्गी या फिर कम मात्रा में अंडा देने वाली मुर्गी की बिक्री 30 से लेकर 40 रुपये किलो तक में होती है. वहीं, कोरोना के चलते अंडा देने वाली मुर्गी कम हो गई थीं. अब अगर कोई मुर्गी महीने में 15-16 दिन भी अंडा दे रही है तो पोल्ट्री फार्म वाले उनका पालन कर रहे हैं.

आपको बता दें एक महीने पहले मुर्गी का भाव करीब 80 रुपये किलो था. बता दें यह मुर्गी शादी-ब्याह और होटल में चिकन कोरमा बनाने में ज़्यादा इस्तेमाल होती हैं. इसका मीट थोड़ा सा टाइट होता है तो चिकन तंदूरी, फ्राई और टिक्का में इसका इस्तेमाल नहीं होता है जबकि कोरमे में यह आराम से खा ली जाती है.



मुर्गी के रेट पर आ गया  ब्रायलर चिकन

रेस्टोरेंट के संचालक हाजी अखलाक का कहना है कि तंदूरी-टिक्का और फ्राई चिकन के लिए ब्रायलर ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि अंडा देने वाली मुर्गी के मुकाबले ब्रायलर का मीट मुलायम होता है, लेकिन कोरोना के चलते ब्रायलर का माल कम आ रहा था तो अक्टूबर-नवंबर में 120 रुपये किलो तक ब्रायलर बिका था, लेकिन सस्ती होने के चलते कोरमा में अंडे वाली मुर्गी खपाई जा रही थी.

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आपको बता दें अब खुद ब्रायलर चिकन ही 75 से 80 के रेट पर आ गया है तो इसलिए मुर्गी के रेट्स में कमी देखने को मिल रही है. वहीं, नवाब अली का भी कहना है कि गाज़ीपुर मंडी हमेशा 10 से 20 रुपये किलो तक ऊपर रहती है जबकि इस वक्त ब्रायलर 70 से 80 रुपये किलो आराम से मिल जाएगा.

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