बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर, इस वजह से 25 करोड़ घरों में स्मार्ट मीटर लगाने में होगी देरी!

बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर, इस वजह से 25 करोड़ घरों में स्मार्ट मीटर लगाने में होगी देरी!
25 करोड़ इलेक्ट्रिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर्स लगाये जाने हैं.

स्मार्ट प्रीपेड मीटर्स (Smart Prepaid Meters) को लेकर ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of Power) ने राज्यों को कहा है कि वो देश में बने मीटर्स ही लगाएं. इस वजह से मौजूदा प्रक्रिया में देरी संभव है. साथ ही इन देसी स्मार्ट प्रीपेड मीटर्स के दाम में भी इजाफा हो सकता है.

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नई दिल्ली. अब आपके घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर (Smart Prepaid Electricity Meter) लगने में लंबा वक्त लग सकता है, चीन के साथ सीमा विवाद की वजह से ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of Power) ने राज्यों से देश में बने स्मार्ट मीटर ही लगाने के निर्देश दिए हैं. सरकार डिस्ट्रीब्युशन रिफॉर्म (Electric Distribution Reform) के तहत करीब 25 करोड़ स्मार्ट प्रीपेड मीटर्स कंज्यूमर्स के घरों में लगाना चाहती है. इसमें पुराने मीटर्स को बदलकर ये नये स्मार्ट प्रीपेड मीटर्स लगाये जाएंगे.लेकिन, पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ विवाद के बाद जो स्थितियां बनी हैं, उसके मद्देनजर ऊर्जा मंत्रालय को लगता है कि ये मीटर्स के तकनीकी रूप से सक्षम होंगे और इनका कनेक्शन ग्रिड से होगा, लिहाजा यह सेफ्टी व सिक्योरिटी का मसला बना सकता है.

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देसी स्मार्ट प्रीपेड मीटर्स जोर
इसी बात को ध्यान में रखकर राज्यों से यह कहा गया है कि वो देश में ही बने स्मार्ट प्रीपेड मीटर्स का ही प्रोक्योरमेंट करें. साथ ही साथ यह भी ध्यान में रखा जाएगा कि अगर किसी विदेशी कंपनी को इन स्मार्ट मीटर्स को तैयार करने का टेंडर दिया भी जाता है तो उसमें भी चीन की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए. यह भी आश्वास्त होना चाहिए कि इन मीटर्स की मैन्युफैक्चरिंग देश के अंदर ही हो.
चीनी कंपनी की वजह से 20 लाख मीटर्स का टेंडर होल्ड पर


स्मार्ट प्रीपेड मीटर्स के लिए अब कुछ राज्य खुद टेंडर जारी कर रहे हैं. वहीं, कुछ राज्य EESL के जरिए टेंडर जारी कर रहे हैं. EESL ने करीब 20 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर्स का जिम्मा एक इनोवेशन कंपनी को दिया था, लेकिन अब इसे होल्ड पर डाल दिया गया है क्योंकि उसमें एक चीनी कंपनी की भूमिका दिख रही है.

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बढ़ सकता है 25 फीसदी तक दाम
सीएनबीसी आवाज़ को सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इससे इन स्मार्ट प्रीपेड मीटर्स की कॉस्ट में 20 से 25 फीसदी का इजाफा हो सकता है. लेकिन, इसका दूसर पक्ष यह भी है कि डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ोतरी होगी. इससे एलएंडटी, आईपीआई, एचपीएल इलेक्ट्रिक जैसी कंपनियां हैं, उनको बड़े ऑर्डर्स मिल सकते हैं. इनकी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ सकती है. इससे इन कंपनियों को फायदा हो सकता है.(आलोक प्रियदर्शी, CNBC आवाज़)
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