कितना फायदेमंद है इलेक्ट्रिक वाहन? जानिए इसमें क्यों दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं भारतीय लोग

कितना फायदेमंद है इलेक्ट्रिक वाहन? जानिए इसमें क्यों दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं भारतीय लोग
इलेक्ट्रिक वाहनों की तुलना में मौजूदा विकल्प अधिक किफायती.

कोविड-19 समेत अन्य कई फैक्टर्स ने पैसेंजर सेग्मेंट की इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) के लिए कई तरह की चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. साथ ही आम लोगों के लिए मौजूदा विकल्प ही किफायती साबित हो रहे हैं. हालांकि, टू और थ्री व्हीलर्स वाहनों के लिए पहला वेव बेहतर रहा है.

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नई दिल्ली. देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (Electric Vehicles) के मामले में टू और थ्री-व्हीलर्स वाहनों ने 'पहले वेव' में अच्छा प्रदर्श​न किया है. लेकिन, अभी भी पैसेंजर वाहनों के सेग्मेंट में पर्याप्त उत्साह नहीं देखने को मिल रहा. इसका सबसे बड़ा कारण इलेक्ट्रिक वाहनों पर शुरुआत में होने वाला खर्च है. Kearney नाम की एक कंसल्टेंट फर्म द्वारा जारी व्हाइट पेपर से पता चलता है कि टोटल कॉस्ट ऑफ ओन​रशिप (TCO) एक सबसे बड़ा फैक्टर है. TCO में वाहनों का अधिग्रहण करने, उन्हें चलाने और मेंटेन करने का खर्च शमिल होता है. व्हाइट पेपर के ​इस एनलिसिस से पता चलता है कि पारंपरिक ईंधन विकल्प की तुलना में यह ज्यादा महंगा पड़ रहा है.

आम लोागों के लिए पेट्रोल कारें किफायती
इस रिपोर्ट में मौजूदा पेट्रोल दरों के आधार पर कहा गया है कि अगर कोई पेट्रोल कार प्रति दिन 40 से 45 किलोमीटर तक चलती है तो इलेक्ट्रिक कारों की तुलना में यह सस्ती पड़ेगी. इस थ्रेशहोल्ड के अतिरिक्ति दूरी की तुलना इलेक्ट्रिक कारों का प्रदर्शन फायदेमंद है. लेकिन, भारतीय शहरों में अधिकतर लोग औसतन 35 से 40 किलोमीटर ही कार चलाते हैं. इस वजह से उन्हें इलेक्ट्रिक वाहनों की तुलना में यह सस्ता पड़ता है.

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CNG भी है बेहतर विकल्प


पेट्रोल के अलावा लोगों के पास सीएनजी का विकल्प पहले से ही मौजूद है. ऐसे में माना जा रहा है कि कम खर्च को लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों को बाजार में CNG वाहनों से कड़ी ​टक्कर मिल सकती है. इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों की TCO एनलिसिस से पता चलता है कि 170 से 180 किलोमीटर के बाद ही इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल फायदेमंद है. हालांकि, इससे कॉमर्शियल फ्लीट वाले वाहनों को फायदा मिलेगा.

कोविड-19 ने खड़ी की नई चुनौती
Kearney के अनुसार, कोविड-19 की वजह से पैदा हुए संकट ने भी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बाजार में संकट को बढ़ा दिया है. मैक्रोइकोनॉमिक फैक्टर्स और कोविड-19 की वजह से क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट हुई है, सप्लाई चेन प्रभावित हुआ है और कंज्यूमर डिमांड भी कम हुआ है. इससे इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति बढ़ते आकर्षण में कमी आई है. छोटी अवधि में इसमें कोई सुधार की गुंजाईश भी नहीं दिख रही.

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पिछड़ सकता है इलेक्ट्रिफिकेशन एजेंडा
इसके साथ ही, कुछ सेक्टर्स पर विशेष ध्यान देने की वजह से केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक वाहन और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को बूस्ट करने के लिए लॉन्ग-टर्म में वित्तीय मदद को भी कम कर सकती है. दरअसल, इंडस्ट्रीज की मौजूदा हालत और लॉकडाउन के बाद से अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान की वजह से इलेक्ट्रिफिकेशन एजेंडा पिछड़ सकता है. अभी भी कई तरह की चुनौतियां पर ध्यान देना बाकी है.
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