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सरकार के सामने बड़ी चुनौती, कैसे पूरा होगा 24 घंटे बिजली का सपना

भाषा
Updated: December 23, 2019, 6:41 PM IST
सरकार के सामने बड़ी चुनौती, कैसे पूरा होगा 24 घंटे बिजली का सपना
इलेक्ट्रिसिटी बल्ब

मंत्रालय के समक्ष अगले साल सभी को सातों दिन 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य को पूरा करना और ग्राहकों को मानकीकृत सेवाएं उपलब्ध कराने से जुड़ी नई प्रशुल्क नीति को लागू करना हैं.

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नई दिल्ली. बिजली कंपनियों के बढ़ते बकाये की वसूली पर जोर और वितरण कंपनियों के लिये बिजली खरीद समझौते के तहत भुगतान सुरक्षा प्रणाली की व्यवस्था जैसे उपायों से इस साल विद्युत मंत्रालय सुर्खियों में रहा. हालांकि मंत्रालय के समक्ष अगले साल सभी को सातों दिन 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य को पूरा करना और ग्राहकों को मानकीकृत सेवाएं उपलब्ध कराने से जुड़ी नई प्रशुल्क नीति को लागू करना तथा वितरण कंपनियों की खराब वित्तीय स्थिति के बीच क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने की चुनौतियां बनी हुई हैं.

कई एजेंडे पर काम कर रही सरकार
बिजली मंत्री आर के सिंह पहले ही 2020 के लिये एजेंडा तय कर चुके हैं. इसमें ग्राहकों को सातों दिन 24 घंटे बिजली, मानकीकृत सेवाओं के लिये उपभोक्ताओं को अधिकार, उदय- दो का क्रियान्वयन, स्मार्ट-प्रीपेड मीटर्स लगाना, बिजली वितरण कंपनियों को समय पर भुगतान, गैस अधारित संयंत्रों को पटरी पर लाना शामिल हैं.

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साल की उपलब्धियों के बारे में सिंह ने से कहा, ‘‘हमने देश में बिजली क्षेत्र को स्वस्थ बनाने के लिये कई उपाय किये हैं. देश में अब बिजली अधिशेष की स्थिति है और पूरे देश को एक ग्रिड में पिरोया गया है.’’

24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की प्रणाली बनाई
उन्होंने कहा, ‘‘हमने हर गांव और हर घर को बिजली से जोड़ा है. हमने एकीकृत बिजली विकास योजना (आईपीडीएस) और दीन दयाल ग्राम ज्योति योजना क्रियान्वित की है ताकि वितरण से जुड़ी गड़बड़िया दूर हों. हमने सभी को सातों दिन 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने को लेकर नियामकीय प्रणाली बनायी है. साथ ही हम कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिये नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दे रहे हैं.’’

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हालांकि, बिजली उद्योग संगठनों का कहना है कि बिजली वितरण कंपनियों पर विद्युत उत्पादकों के बढ़ते बकाये का भुगतान और दबाव वाली परियोजनाओं पर ऋण शोधन की कार्यवाही में जाने से रोकने की जरूरत जैसे मुद्दों के समाधान की जरूरत है.

बिजली उत्पादकों को नहीं मिल रहा वितरण कंपनियों से भुगतान
स्वतंत्र बिजली उत्पादकों के संगठन के महानिदेशक हैरी धॉल ने कहा, ‘‘दबाव वाली बिजली परियोजनाओं को ऋण शोधन कार्यवाही का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन उत्पादक कंपनियों पर दबाव इस लिए है क्योंकि वितरण कंपनियों से भुगतान नहीं मिल पर रहा है. जिन परियोजनाओं का वितरण कंपनियों पर अच्छी-खासी राशि बकाया है, उन्हें राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में नहीं भेजा जाना चाहिए.’’

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48 फीसदी बढ़ा बकाया
मंत्रालय के प्राप्ति पोर्टल के अनुसार बिजली वितरण कंपनियों पर उत्पादक इकाइयों का बकाया अक्टूबर में 48 प्रतिशत बढ़कर 81,010 करोड़ रुपये पहुंच गया. इसमें पिछला बकाया यानी 60 दिन की मोहलत अवधि के बाद की बकाया राशि बढ़कर 67,143 करोड़ रुपये पहुंच गयी है. पिछले साल इसी महीने में यह राशि 39,338 करोड़ रुपये थी.

बिजली उत्पादकों के संघ के महानिदेशक अशोक खुराना ने कहा, ‘‘मुख्य मसला यह है कि बिजली वितरण कंपनियां उत्पादक कंपनियों का समय पर भुगतान करें. अगर बिजली उत्पादक कंपनी बिजली बेचती है तो उसका भुगतान होना जरूरी है.’’

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First published: December 23, 2019, 6:41 PM IST
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