रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स का निर्यात, मोबाइल फोन्स की हिस्सेदारी सबसे अधिक

लॉकडाउन के दौर में करीब 45 दिनों के लिए उत्पादन बिल्कुल बंद हो चुका था.

लॉकडाउन के दौर में करीब 45 दिनों के लिए उत्पादन बिल्कुल बंद हो चुका था.

दिसंबर 2020 में इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स का निर्यात पिछले साल की सामान अवधि की तुलना में 50 फीसदी बढ़ा ​है. इसका एक बड़ा हिस्सा मोबाइल फोन्स का है. पिछले साल ही सरकार ने निर्यात बढ़ाने के लिए पीएलआई स्कीम लेकर आई थी.

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नई दिल्ली. भारत द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स का निर्यात नये रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. पिछले साल 2020 में 8,806 करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स का निर्यात हुआ है. करीब 35 फीसदी के साथ इसका एक बड़ा हिस्सा मोबाइल फोन्स का रहा है. कुल 3,061 करोड़ रुपये के मोबाइल फोन्स भारत से निर्यात किए गए हैं. दिसंबर 2019 की तुलना में यह आंकड़ा करीब 50 फीसदी अधिक है.

इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) के मुताबिक, 'इस इंडस्ट्री ने कोरोना वायरस महामारी की वजह से अभूतपूर्व चुनौतियों को पार कर लिया है. नेशनल पॉलिसी ऑन इलेक्ट्रॉनिक्स, 2019 के तहत अब इसमें मोमेंटम देखने को मिल रही है.'

लॉकडाउन के दौरान बंद रहा था प्रोडक्शन
ICEA ने कहा कि पीएलआई स्कीम की वजह से कोविड काल में भी इस इंडस्ट्री ने 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है. कोविड की वजह से उत्पन्न हुई चुनौतियों के बीच भी इलेक्ट्रॉनिक गुड्स का निर्यात 50,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है. जबकि, लॉकडाउन के दौर में करीब 45 दिनों के लिए उत्पादन बिल्कुल बंद हो चुका था. महामारी के दौरान मोबाइल फोन इंडस्ट्री ने घरेलू मांग को भी पूरा किया है. इसके बाद भी दिसंबर 2020 तक 14,000 करोड़ रुपये के मोबाइल फोन्स का निर्यात भी किया गया है.
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बजट में इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स के निर्यात पर ड्यूटी बढ़ी
निर्यात होने वाले उत्पादों पर ड्यूटीज़ और टैक्स में छूट के लिए बने RoDTEP स्कीम से इसे बढ़ावा देने में मदद मिलेगी. ICEA ने सरकार को भी इस बारे लिखा है कि इस सेक्टर के लिए भी RoDTEP लागू किया जाए. हालांकि, सरकार की ओर से आम बजट में इसे लेकर कोई ऐलान नहीं हुआ है. सरकार ने बजट में कुछ आइटम्स पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने का ही फैसला लिया है.

निर्यात बढ़ाने सरकार ने पेश किया है पीएलआई स्कीम
केंद्र सरकार के लिए निर्यात को बढ़ावा देना एक प्रमुख एजेंडा है. यही कारण है कि सरकार ने पिछले प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेटिव्स (PLI) स्कीम का ऐलान किया था. इस स्कीम के तहत भारत में बनने वाले मोबाइल फोन्स के लिए अगले 5 साल में से 4 से 6 फीसदी का कैश इंसेटिव्स का लाभ मिलेगा.

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जिन कंपनियों को पीएलआई स्कीम के तहत मंजूरी मिलेगी, वो कंपनियों अगले 5 साल में 10.5 लाख करोड़ रुपये के उत्पादों का निर्यात कर सकेंगी. कुल निर्यात के हिसाब से देखें तो यह करीब 60 फीसदी होता है.

सरकार ने हाल ही में पीएलआई स्कीम का दायरा आईटी प्रोडक्ट्स तक बढ़ा दिया है. सरकार चाहती है कि अगले 5 साल में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का आंकड़ा 2.45 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच जाए.
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