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नौकरी जाने पर अब नहीं सताएगी पैसों की टेंशन, ऐसे बनाएं अपना बैकअप प्लान

News18Hindi
Updated: January 23, 2020, 9:02 PM IST
नौकरी जाने पर अब नहीं सताएगी पैसों की टेंशन, ऐसे बनाएं अपना बैकअप प्लान
आज से ही शुरू करें बुरे वक्त से निपटने की बेस्ट प्लानिंग

आज का जो दौर है उसमें गुल्लक से काम नहीं चलने वाला है. इसीलिए हम आपको आज ऐसी प्लानिंग के बारे में बता रहे हैं जि‍नकी बदौलत आप और आपका परि‍वार फाइनेंशि‍यल क्राइसेस के दौर को भी बिना टेंशन के झेल पाएगा.

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  • Last Updated: January 23, 2020, 9:02 PM IST
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नई दिल्ली. प्राइवेट नौकरी (Private Jobs) करने वालों के लिए जॉब में हमेशा अनि‍श्‍चि‍तता बनी रहती है. मंदी हो..या फिर कंपनी को घाटा हो जाए...और नहीं तो परफॉर्मेंस इश्‍यू को लेकर कंपनियां अचानक नौकरी छोड़ने का नोटिस थमा देती हैं. बीते दिनों कई बड़ी कंपनियों जैसे ऑयो रूम्स, उबर इंडिया और मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) ने इसी तरह के कदम उठाए हैं. हालांकि, कंपनियों ने इनके पीछे ग्लोबल मंदी के बाद बिक्री में आई कमी को जिम्मेदार ठहराया है. इससे बचने के लिए कंपनी ने लागत घटाने के चलते ये कदम उठाए है. लेकिन ऐसे में उस एम्प्लॉई (Employee) के सामने बड़ी परेशानियां खड़ी हो जाती हैं. क्योंकि हर महीने के खर्चें तो कम नहीं होते वहीं, आमदनी के लिए नई नौकरी की तलाश तेज करनी पड़ती है.

आज का जो दौर है उसमें गुल्लक से काम नहीं चलने वाला है. इसीलिए हम आपको आज ऐसी प्लानिंग के बारे में बता रहे हैं जि‍नकी बदौलत आप और आपका परि‍वार फाइनेंशि‍यल क्राइसेस के दौर को भी बिना टेंशन के झेल पाएगा.

जाने-माने फाइनेंशियल प्लानर (Financial Planner) कहते हैं कि नौकरी करने वालों को सही समय पर अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग शुरू कर देनी चाहिए. क्योंकि, पुरानी कहावत है बुरे वक्त में अपना साया भी साथ छोड़ देता है. इसीलिए हमेशा खयाल रहें कि आपके हाथ में जो पैसा है वहीं बुरे समय में काम आएगा.

फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या कहते हैं कि नौकरी शुरू करते वक्त ही आपको तुरंत इमरजेंसी फंड तैयार करना शुरू कर देना चाहिए. साथ ही, जरूरी खर्चों का हिसाब रखें. इसके अलावा निवेश पर मिल रहे मुनाफे का आकलन करें और सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण नई नौकरी की तलाश में लगे रहें.



आज से ही शुरू करें बुरे वक्त से निपटने की बेस्ट प्लानिंग

(1) इमरजेंसी फंड तैयार रखें- इसके लिए 5 से 6 महीने का खर्च जमा करें. जरूरत के वक्त निकासी वाले विकल्प चुनें. इसके लिए लिक्विड फंड में निवेश किया जा सकता है. आज 500 रुपये की छोटी सी किस्त से शुरुआत की जा सकती है और अगर पिछले सालों के रिटर्न का एवरेज निकालें तो करीब 12 से 15% का रिटर्न देने में म्यूचुअल फंड्स कामयाब रहे हैं.बाजार का सेंटीमेंट खराब होने पर म्यूचुअल फंड्स ने निगेटिव रिटर्न भी दिया है लेकिन अगर लॉन्ग टर्म के लिए होल्ड करेंगे तो निगेटिव रिटर्न की चुभन कम होगी, क्योंकि कम्पाउंड इंट्रेस्ट का फायदा भी मिलता है. इसलिए इनमें निवेश का टाइम हॉराइजन कम से कम 3 से 5 साल होना ही चाहिए. लंबे समय निवेश रखेंगे तो पावर ऑफ कम्पाउंडिंग का फायदा उठा पाएंगे. आपका इन्वेस्टमेंट जैसे-जैसे रिइन्वेस्ट होगा तो उस पर सिंपल नहीं कम्पाउंड इंट्रेस्ट मिलेगा.

(2) अपने खर्चों का पूरा रखें हिसाब-किताब- अपने खर्चों का आकलन करने के लिए हर महीने के बजट पर गौर करें. इसमें जरूरी और गैरजरूरी खर्चों में फर्क समझें. बच्चों की फीस, किराया, बिल भुगतान प्लान करें. वहीं गैरजरूरी खर्चों को टालना अच्छा होता है.

(3) एक्सट्रा इनकम का पता लगाएं-अपनी बेहतरी के लिए एक्सट्रा कमाई का जरिया खोजें. फ्रीलांस वर्क के जरिए कमाई करना भी एक विकल्प हो सकता है. इसके अलावा निवेश में डिविडेंड या ब्याज से भी कमाई हो सकती है.

(4) सैलरी से मिले पे-आउट को प्लान करें- नौकरी जाने पर मिले पैसों को संभालना चाहिए. उस पैसे को सही जगह प्लान करके निवेश करें.

(5) पर्याप्त इंश्योरेंस कवर लें-अच्छी प्लानिंग के लिए टर्म और हेल्थ इंश्योरेंस का सही कवर लेना चाहिए. निवेश की हुई इंश्योरेंस पॉलिसी पर गौर करें.

(6) रिटायरमेंट का पैसा खर्च नहीं करें- PF से मिली रकम खर्च नहीं करना समझदारी होती है. कुछ पैसा रिटायरमेंट के लिए बचाकर रखना चाहिए.

(7) टैक्स देनदारी पर ध्यान दें- टैक्स की बात करें तो नौकरी जाने पर मिले पैसों पर टैक्स देखें. टैक्स प्लानिंग के लिए सलाहकार की मदद लें.

(8) नई नौकरी की तलाश-नौकरी जाने के बाद नई नौकरी की तलाश में तेजी से जुटना चाहिए. नेटवर्किंग के जरिए भी नौकरी खोजनी चाहिए. इसके अतिरिक्त स्किल डेलवपमेंट पर फोकस बढ़ाना जरूरी है.



मान लीजिए कि आप 25,000 रुपये महीने खर्च करते हैं तो बफर फंड में आपके पास 1,30,000 होने ही चाहिए. इमरजेंसी फंड के पैसों का एक हिस्सा आप सेविंग अकाउंट में रखें ताकि इसे तुरंत निकाल सकें क्योंकि इमरजेंसी फंड में लिक्विडिटी रहनी चाहिए.

लेकिन इसके अलावा 2 जगह इस फंड को पार्क कर सकते हैं. इसे फिक्स्ड डिपॉजिट बना सकते हैं. आप स्वीप-इन अकाउंट की सुविधा लें. इसका मतलब है कि FD का इंट्रेस्ट मिलता रहेगा पर जब जरूरत होगी तो आप इसे आसानी से निकाल पाएं.

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दूसरा ऑप्शन जहां आपको FD के 4-6% से ज्यादा इंट्रेस्ट मिलेगा. लिक्विड फंड. ये एक तरह का डेट फंड हैं जिन्हें अल्ट्रा शॉर्ट म्यूचुअल फंड भी कहा जाता है.

इनकी मैच्योरिटी छोटी होती है. ये 3 महीने की मैच्योरिटी रखते हैं और इन पर इंट्रेस्ट 7-8% तक मिलता है. इनसे आप पैसे जल्दी रीडीम कर सकते हैं क्योंकि इनमें कोई लॉक इन पीरियड नहीं होता और 3 महीने की मैच्योरिटी के बाद आप इसे फिर रिइन्वेस्ट करके कम्पाउंड इंट्रेस्ट पा सकते हैं.

अब डराने लगे हैं बेरोज़गारी के आंकड़े
देश और दुनिया में आर्थिक सुस्ती गहराने से बेरोजगारी की स्थिति चिंताजनक हो गई है. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर से दिसंबर, 2019 के चार महीनों में देश की बेरोजगारी दर बढ़कर 7.5 फीसदी पहुंच गई. यही नहीं, उच्च शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी दर बढ़कर 60 फीसदी तक पहुंच गई है.

वहीं, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की एक रिपोर्ट ने अनुमान जताया है कि इस साल बेरोजगारी का आंकड़ा बढ़कर लगभग 2.5 अरब हो जाएगा. सीएमआईई की रिपोर्ट में कहा गया है, मई-अगस्त 2017 के बाद लगातार सातवीं बार बेरोजगारी बढ़ी है. मई-अगस्त 2017 में बेरोजगारी की दर 3.8 फीसदी थी.

सीएमआईई के सर्वे के अनुसार, ग्रामीण भारत की तुलना में शहरी भारत में बेरोजगारी की दर ज्यादा है. यह सर्वे 1,74,405 परिवार की राय पर तैयार किया गया है. इसके अनुसार, सितंबर से दिसंबर महीने के दौरान शहरी भारत में बेरोजगारी की दर 9 फीसदी तक पहुंच गई. शहरों में बेरोजगारी राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा है. वहीं, ग्रामीण भारत में इस दौरान बेरोजगारी 6.8 फीसदी रही. यह हाल तब है जब कुल बेरोजगारी में करीब 66 फीसदी हिस्सा ग्रामीण भारत का होता है.



रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी की दर पिछले तीन साल के मुकाबले सबसे खराब है. साल 2016 में उच्च शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी की दर 47.1 प्रतिशत थी. वहीं, 2017 में यह 42 प्रतिशत और 2018 में 55.1 प्रतिशत थी. यानी साल 2019 सबसे खराब दौर रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, 20 से 29 साल के ग्रेजुएट युवाओं में बेरोजगारी की दर 42.8 पहुंच गई है जो भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है.

वहीं,  सभी उम्र के ग्रेजुएट के लिए औसत बेरोजगारी दर 18.5 फीसदी पर पहुंच गई जो इसका उच्चतर स्तर है. इसी तरह का हाल पोस्ट-ग्रेजुएट के लिए भी है लेकिन 2016 के बाद से यह खराब नहीं है, जब यह 24.6 प्रतिशत था. कॉलेज से निकल जॉब मार्केट में आने वाले युवाओं की स्थिति भी बेहतर नहीं है. 20 से 24 साल के उम्र के युवाओं के बीच सितंबर से दिसंबर के दौरान बेरोजगारी की दर दोगुनी होकर 37 फीसदी पर पहुंच गई.

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ऐसे बुरे वक्त को अपने आप से दूर रखने के लिए आपको आज से ही प्लानिंग शुरू करनी होगी. अगर आप ठान लेंगे तो आप बचत (saving) भी कर पाएंगे और निवेश (investment) भी कर पाएंगे. जानकारों के मुताबिक, जितनी जल्दी बचत की आदत डाली जाए, भविष्य के लिए उतना ही अच्छा होता है. इससे आपके जीवन में एक पॉजिटिव बदलाव आएगा. आप चाहें तो नए साल में कुछ रिजॉल्यूशन लेकर इसकी शुरुआत कर सकते हैं.

तो आज से जुट जाएं फाइनेंशियल प्लानिंग में!

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First published: January 23, 2020, 9:02 PM IST
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