सड़क पर आए दिवालिया कंपनी Cox & Kings के कर्मचारी, सब्जी बेचने को मजबूर

कॉक्स एंड किंग्स के ढाई हजार से अधिक पूर्व कर्मचारियों की शिकायतों की सुनवाई के लिए 24 जनवरी, 2021 की तारीख दी है.
कॉक्स एंड किंग्स के ढाई हजार से अधिक पूर्व कर्मचारियों की शिकायतों की सुनवाई के लिए 24 जनवरी, 2021 की तारीख दी है.

Cox & Kings पर मनी लॉन्ड्रिंग (Money laundering) केस की जांच चल रही है. इस 20,000 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है. ईडी ने कहा कि घोटाले में कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े लोगों के एक नए समूह का पता लगाया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 22, 2020, 4:25 PM IST
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नई दिल्ली. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने दिवालिया कंपनी और कॉक्स एंड किंग्स (Cox & Kings) के ढाई हजार से अधिक पूर्व कर्मचारियों (Ex- Employees) की शिकायतों की सुनवाई के लिए 24 जनवरी, 2021 की तारीख दी है. कंपनी ने इन सभी कर्मचारियों को जून, 2019 से अक्टूबर, 2020 तक के वेतन (Salary) का भुगतान नहीं किया गया है. पूर्व कर्मचारियों का लंबित वेतन 3 लाख से लेकर 70 लाख रुपये तक है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) लॉन्डिंग एक्ट (Money Laundering Act) के तहत इस 20 हजार करोड़ रुपये के घोटाले की जांच कर रहा है.

कर्मचारियों को अंधेरे में रखा- कंपनी के एक पूर्व मीटिंग मेंबर कैलाश दाते ने बताया 'हमने अंतरिम भुगतान के लिए NCLT को याचिका दी है. हम एक छोटी राशि की मांग कर रहे हैं जो बैंकों के बकाया से 3 प्रतिशत से कम है.' वहीं, लेनदारों ने 7 हजार करोड़ रुपये की मांग की है जिनके अभी तक कंपनी ने कर्ज चुकाए नहीं हैं. ऐसे में पूर्व कर्मचारी उम्मीद कर रहे हैं कि एनसीएलटी उनकी याचिका पर न्यायपूर्ण सुनवाई करे. उन्होंने आगे बताया कि कंपनी के प्रमोटर बार-बार बकाया वेतन देने के अपने वादे पर अमल नहीं कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि कंपनी की हालत पिछले साल जून में ही खस्ता हो गई थी. लेकिन हमे अंधेरे में रख अक्टूबर 2020 तक काम करवाया गया.'

कई लेनदार कतार में शामिल- सूत्रों के मुताबिक, कॉक्स एंड किंग्स की जांच के लिए गठित कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीओसी) की तीन बैठकें हुई हैं और यह वसूली के बारे में NCLT के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करेंगी. वहीं, यह केस बदलावों के कई दौर से गुजर सकता है. क्योंकि अधिक से अधिक लेनदार कतार में शामिल हैं. नाम उजागर न करने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया 'यह प्रक्रिया बहुत लंबी समय तक चलने वाली है, जिन कंपनियों के लेनदारों को बकाया का भुगतान किए बिना ही कर्मचारियों को अंधेरे में रखते रहे, ने भी बड़ी संख्या में एनसीएलटी का रुख किया है.



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गर्त में कर्मचारियों का भविष्य- वहीं, कंपनी के दिवालिया पर कर्मचारी सड़क पर आ गए हैं. मौजूदा स्थिति में वे गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. इनमें कई कर्मचारियों को आजीविका के लिए तरह-तरह के अजीबोगरीब काम करने पड़ रहे हैं. कॉक्स एंड किंग्स कंपनी के एक पूर्व कर्मचारी श्रीनिवास येल ने बताया 'कंपनी के दिवालिया घोषित होने पर कई कर्मचारी ऑटोरिक्शा चलाने पर मजबूर हो गए, कोई मछली बेचकर अपना घर चला रहा है तो कोई जूस और सब्जियां बेच बच्चों का पेट पाल रहा है.'

पूर्व कर्मचारी केशव राणे ने कहा 'मैं अमेरिका और लंदन के लिए टिकट बुक करता था, आज मैं एक आजीविका के लिए मछली बेचता हूं, यह मेरे लिए बहुत अपमानजनक है, लेकिन मेरे पास और कोई विकल्प भी तो नहीं है.' बता दें कि कंपनी पर केशव का 70 लाख रुपये वेतन बकाया है.

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बेनामी संपत्ति के लिए स्थापित की फर्जी कंपनियां- इसमें कंपनी पर मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच चल रही है. इस 20,000 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय कर रहा है. ईडी ने कहा कि घोटाले में कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े लोगों के एक नए समूह का पता लगाया गया है. ईडी ने दावा किया है कि ये कंपनी के प्रमोटरों द्वारा स्थापित कुछ फर्जी कंपनियां थीं. जिन्हें विदेश में बेनामी फंड जमा करने के लिए प्रमोटरों और दिवालिया कंपनी के शीर्ष अधिकारियों द्वारा स्थापित किया गया था.

ईडी ने निकाला घोटाले का सुराग- जांच एजेंसी ने कहा कि कंपनी के कुछ सहायक अभी भी काम कर रहे थे. इनमें कॉक्स एंड किंग्स ग्लोबल सर्विसेज भी शामिल थीं, जो अभी भी अमेरिका में चल रही थी. ईडी ने पाया कि कंपनी, प्रमोटर्स द्वारा भारतीय परिचालन से पूरी तरह अछूती थी. वहीं, ED के अधिकारियों ने बताया कि बैंक अधिकारी जो कॉक्स और किंग्स के प्रमोटरों और शीर्ष अधिकारियों के संपर्क में थे, उनसे पूछताछ की जाएगी कि क्या उन्होंने ऋण देने से पहले उचित प्रक्रियाओं का पालन किया और कंपनी से कोलेटरल की मांग की?
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