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नौकरी करने वालों के लिए बड़ी खबर- आज EPFO की बैठक में हो सकता है पैसों से जुड़ा बड़ा फैसला

श्रम मंत्री संतोष गंगवार

श्रम मंत्री संतोष गंगवार

EPFO की बुधवार को होने वाली बैठक में कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) पर साल 2019-20 के लिए 8.5% ब्याज दिए जाने के निर्णय की पुष्टि में विलंब का मामला उठाया जा सकता है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की बुधवार को होने वाली बैठक में कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) पर साल 2019-20 के लिए 8.5% ब्याज दिए जाने के निर्णय की पुष्टि में विलंब का मामला उठाया जा सकता है. ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी मंडल ने पांच मार्च की बैठक में ईपीएफ पर 2019-20 के लिए ब्याज दर 8.50 प्रतिशत रखने की सिफारिश की थी जो पहले से 0.15 प्रतिशत कम है. न्यासी मंडल के अध्यक्ष श्रम मंत्री संतोष गंगवार हैं. ईपीएफ की यह प्रस्तावित दर सात साल की न्यूनतम दर होगी. केंद्रीय न्यासी बोर्ड के इस निर्णय को वित्त मंत्रालय की सहमति के लिए भेज दिया गया था पर अभी तक वित्त मंत्रालय से उसका अनुमोदन प्राप्त नहीं हुआ है.

    सात साल की न्यूनतम दर
    बता दें कि वित्त मंत्रालय की सहमति से ही ईपीएफ पर वार्षिक ब्याज दर में संशोधन का फैसला लागू होता है. न्यास के एक सदस्य ने अपना नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि हम ब्याज दर के अनुमोदन में विलंब का मुद्दा इस बैठक में उठाएंगे. केंद्रीय न्यासी मंडल इस बारे में निर्णय मार्च में ही कर चुका है. यह मुद्दा नौ सितंबर की बैठक की कार्यसूची में नहीं है पर हम इसे उठा सकते हैं. इससे पहले वर्ष 2018 19 के लिए ईपीएफ खाताधारकों को अपने जमा धन पर 8.65 प्रतिशत की दर से ब्याज मिला था.

    PF पर ब्याज घटने का असर
    ईपीएफओ अपने सालाना एक्रुअल्स का 85 प्रतिशत हिस्सा डेट मार्केट में और 15 प्रतिशत हिस्सा एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स के जरिए इक्विटीज में लगाता है. पिछले साल मार्च के अंत में इक्विटीज में ईपीएफओ का कुल निवेश 74,324 करोड़ रुपये का था और उसे 14.74% का रिटर्न मिला था. हालांकि, सरकार को यह भी ध्यान में रखना होगा कि पीएफ पर ब्याज दर घटने से वर्कर्स का सेंटीमेंट खराब होगा.

    ये भी पढ़ें : पीएफ स्कीम का दायरा बढ़ा सकती है सरकार, EPFO से जुड़ सकेंगे डॉक्टर, वकील और सीए जैसे प्रोफेशनल्स

    सरकार ने मार्च के बाद कर्मचारियों और नियोक्ताओं को कोविड 19 संकट से उबरने के लिए भविष्य निधि से संबंधित कई राहत उपायों की घोषणा की है. कर्मचारी अब पीएफ खाते में से तीन महीने की बेसिक सैलरी और डीए या पीएफ में जमा रकम के 75 फीसदी में से जो कम हो, उतनी रकम निकाल सकते हैं. इस रकम को दोबारा इसमें जमा करने की जरूरत नहीं है.

    इतनी रही पिछले वर्षों की ब्याज दर
    ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2016-17 में भविष्य निधि पर 8.65 प्रतिशत और 2017-18 में 8.55 प्रतिशत का ब्याज दिया था. जबकि 2015-16 में यह 8.8 प्रतिशत वार्षिक था. इससे पहले 2013-14 और 2014-15 में भविष्य निधि पर 8.75 और 2012-13 में 8.5 प्रतिशत ब्याज दिया गया.

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