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अब ओवरटाइम कराना है तो कंपनी को लेनी होगी कर्मचारी से इजाज़त!

बिना सहमति कर्मचारियों से ओवरटाइम नहीं करा पाएंगी कंपनियां

बिना सहमति कर्मचारियों से ओवरटाइम नहीं करा पाएंगी कंपनियां

भारत में कंपनियों को अब ओवरटाइम कराने से पहले कर्मचारियों से लिखित सहमति की आवश्यकता होगी. नए प्रस्ताव के मुताबिक कोई भी कंपनी कर्मचारियों की लिखित मंजूरी के बिना उससे ओवरटाइम नहीं करा पाएगी.

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    भारत में कंपनियों को अब ओवरटाइम कराने से पहले कर्मचारियों से लिखित सहमति की आवश्यकता होगी. मोदी सरकार कर्मचारियों को राहत देने के लिए एक प्रस्ताव ला रही है. इस प्रस्ताव के तहत कोई भी कंपनी कर्मचारियों की लिखित मंजूरी के बिना उससे ओवरटाइम नहीं करा पाएगी. व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियां बिल 2019 (Occupational Safety Health and Working Conditions Bill)  में प्रस्ताव के मुताबिक बिना लिखि‍त इजाजत ओवरटाइम कंपनियां किसी कर्मचारी से ओवरटाइम नहीं करा पाएंगी.

    बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बारे में एक बिल केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने लोकसभा में पेश किया. सरकार इस प्रस्ताव के द्वारा उस पूर्व प्रस्ताव को हटा रही है, जिसके मुताबिक किसी कर्मचारी से ओवरटाइम काम कराने की इजाजत मिली हुई थी. ओवरटाइम लेने से पहले कर्मचारी की सहमति लेनी जरूरी होगी. महीने में अधिकतम ओवरटाइम 100 घंटे की बजाय 125 घंटे हो सकेंगे.



    कर्मचारियों को मिलेंगी ये सुविधाएं
    इसी महीने मोदी सरकार ने कर्मचारियों के कार्यालय, सुरक्षा, स्वास्थ्य और वर्किंग कंडीशन को लेकर हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड बिल 2019 को मंजूरी दी है. इस कानून में कंपनियों को अपने कर्मचारियों का सालाना हेल्थ चेकअप करना होगा. अब सिर्फ अपने ग्रैंड पैरेंट्स के अलावा डिपेंडेंट ग्रैंड पैरेंट्स को भी शामिल किया जाएगा.

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    नेशनल स्टैटिस्ट‍िकल ऑफिस (NSO) के पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे 2017-18 के मुताबिक, देश में ज्यादातर कामगार हफ्ते में 48 घंटे से ज्यादा काम करते हैं, जो कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा निर्धारित समय सीमा से ज्यादा है. सर्वे के मुताबिक वेतनभोगी या नियमित कर्मी हफ्ते में 53 से 56 घंटे तक काम करते हैं. इसी प्रकार स्वरोजगार में लगे लोग हफ्ते में 46 से 54 घंटे और कैजुअल वर्कर 43 से 48 घंटे तक काम करते हैं.

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