युवा उद्यमियों की मदद से बदलते भारत की तस्वीर बना रही ये टीम, ऐसे करते हैं काम

युवा उद्यमियों की मदद से बदलते भारत की तस्वीर बना रही ये टीम, ऐसे करते हैं काम
इनेक्टस आर्यभट्ट

आर्यभट्ट इनेक्ट्स की शुरुआत 2016 में हुई थी. इस टीम ने अपनी दो प्रोजेक्ट्स की मदद से साल 2030 तक यानी अगले 10 साल में 17 सतत विकास का लक्ष्य रखा है.

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नई दिल्ली. भारत लगातार तेजी से आगे बढ़ रहा है. लेकिन इसके बावजूद भी ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां विभिन्न रूप सके सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और मानवीय मुद्दे मौजूद हैं, जो एक लंबे समय से इस देश की प्रगति में बाधा बने हुए हैं. इसलिए उम्मीद को पुर्नजीवित करके इन चुनौतियों का डट कर सामना करने और एक बेहतर कल की तलाश के लिए मेहनती और समर्पित लोगों की एक ऐसी टीम को साथ लाने की आवश्यकता है, जो अलग-अलग ​पृष्ठभूमि से अलग-अलग विचारधाराओं का प्रतिनि​धत्व करने के बावजूद एक सामान्य लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं. ऐसी ही एक टीम है, जिसका नाम इनेक्टस आ​र्यभट्ट है.

'इनेक्टस आर्यभट्ट' का सफर 2016 में शुरू हुआ था, जहां एक छात्रों का एक समूह समुदायों के समग्र विकास की दिशा में प्रयास करने के​ लिए तत्पर था. इनेक्टस आर्यभट्ट (Enactus Aryabhatt) कठिन हालातों पर विजय पाने के लिए दृढ़ युवा उद्यमियों की एक छात्र-संचालन टीम है. यह विश्वस्तरीय गैर-लाभकारी संगठन इनेक्टस की एक शाखा है. इनेक्टस का उद्देश्य असंख्य सामाजिक मुद्दों से निपटना है, जो समाज को प्रभावित कर रहा है. ये छात्र अमीरों और गरीबों के बीच सामाजिक और आर्थिक दूरी को कम करने की दिशा में जरूरी कदम उठाते हैं, जैसे बेरोजगारों का उत्थान, संसाधनकों का विवेकपूर्ण उपयोग, अपव्यय को कम करना, रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देना और एक ऐसे समुदाय के निमार्ण की दिशा में काम करना जो सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण के मोर्चे पर बेहतर हो सके.

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प्रोजेक्ट उत्कर्ष से महिलाओं को सक्षम बनाने का लक्ष्य
इनेक्ट्स ने अपनी दो परियोजनाओं की मदद से साल 2030 तक यानी अगले 10 साल में 17 सतत विकास का लक्ष्य रखा है. इसमें सबसे पहले प्रोजेक्ट और 'प्रोजेक्ट उत्कर्ष.'

आज के बदलते दौर में महिलाओं को उनकी दामपत्य मूलक भूमिकाओं के लिए विवश किया जाता है और उन्हें उनके परिवारों के सामाजिक मानदंडो में सीमित कर दिया जाता है. अत्यधिक गरीबी का सामना करने के साथ-साथ ये महिलाएं समाज की अपेक्षाओं को पूरा करने और अपनों के पेट पालने की कश्मकश में रह जाती हैं. इसीलिए प्रोजेक्ट उत्कर्ष को 2017 में शुरू किया गया था जो कि महिलाओं के उत्थान पर पूरी तरह से केंद्रित है. उनकी पाक-कला को उद्यमशिलता के दृष्टिकोण से जोड़कर उन्हें सशक्त बनाने का प्रयास करती है, ताकि उन्हें कमाई का स्त्रोत उपलब्ध हो सके. ये महिलाएं गाजर और चुकंदर जैसी सब्जियों के बेकार गूदे का उपयोग कर वेजिटोज नाम स्नैक्स बनाती हैं, जिसमें उच्च मात्रा में फाइबर, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं. खास बात है कि इन स्नैक्स को उत्पादन ​स्वच्छता मॉड्यूल और पर्यावरण के अनुकूल की जाती है. इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य बड़े पैमाने पर किये बेचे जाने वाले तेल हुए चिप्स के मुकाबले एक स्वस्थ्य विकल्प प्रदान करना है.

बेकार फूलों से नदियों को बचना
'प्रोजेक्ट पलाश' इनेक्टस का दूसर महात्वकांक्षी प्रोजेक्ट है. भारत में हर तरह के आयोजन में फूलों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है. लेकिन, बहुत कम लोगों को पता होगा कि इन आयोजनों के बाद लगभग हर दिन 20 लाख टन फूलों का कचार छोड़ दिया जाता है. धार्मिक स्थलों पर इस्तेमाल होने वाले फूलन नदियों के प्रदूषकों का 16 फीसदी हिस्सा होता है. खराब हो चुके ये फूल और कीटनाशकों के अवशेष पानी को दूषित करते हैं. प्रोजेक्ट पलाश का उद्देश्य इन फूलों का उपयोग करने और प्राकृतिक रंगों को तैयार करने के लिए किया जाता है. इन रंगों का उपयोग कपड़ों पर किया जाता है जो कला और पर्यावरण के अनूठे मिश्रण को बढ़ावा देता है. इसे प्रोजेक्ट के तहत वंचित लोगों को रोजगार के अवसर मिलते हैं. महिला उद्यमी आॅर्गेनिक डाई तैयार करती हैं और कपड़ों में कलरेंट मिलता है.

इन महिला उद्यमियों द्वारा तैयार दुपट्टे और स्कार्फ सीधे कॉलेज फेस्ट, सांस्कृतिक मेलों और हस्तकला के आउटलेट्स पर लगाये गये स्टालों के माध्यम से ग्राहकों को बेचे जाते हैं.

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