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रेलिगेयर फिनवेस्ट घोटाला : ईडी ने फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर मलविंदर सिंह को गिरफ्तार किया

News18Hindi
Updated: November 14, 2019, 6:52 PM IST
रेलिगेयर फिनवेस्ट घोटाला : ईडी ने फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर मलविंदर सिंह को गिरफ्तार किया
ED ने फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर मलविंदर सिंह को गिरफ्तार किया है.

फोर्टिस हेल्थकेयर (Fortis Healtcare) और दवा कंपनी रैनबैक्सी (Ranbaxy) के पूर्व प्रमोटर मलविंदर मोहन सिंह (Malvinder Mohan Singh) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार कर लिया है.

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  • Last Updated: November 14, 2019, 6:52 PM IST
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नई दिल्ली. फोर्टिस हेल्थकेयर (Fortis Healtcare) और दवा कंपनी रैनबैक्सी (Ranbaxy) के पूर्व प्रमोटर मलविंदर मोहन सिंह (Malvinder Mohan Singh) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार कर लिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेलिगेयर एंटरप्राइजेज (Relagare Enterprises) के पूर्व सीएमडी सुनील गोधवानी (Sunil Godhwani) की भी गिरफ्तारी हुई है. ED ने रेलिगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड (आरएफएल) घोटाला मामले में ये कार्रवाई की है. आपको बता दें कि ईडी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है. RFL रेलिगेयर एंटरप्राइजेज की सब्सिडियरी है. मलविंदर सिंह और उनके भाई शिविंदर रेलिगेयर एंटरप्राइजेज के भी पूर्व प्रमोटर हैं.

ऐसे हुआ खुलासा- दोनों भाइयों के बीच फोर्टिस हेल्थकयर और रेलिगेयर एंटरप्राइज लिमिटेड को लेकर विवाद है.

>> एक जांच में हुए खुलासे में पता चला है कि  दोनों ने फोर्टिस से फंड को अन्य जगह पर डायवर्ट किया और फाइनेंशियल स्टेटमेंट में गड़​बड़ियां की हैं.

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Enforcement Directorate ED arrests ex-Fortis Healthcare promoter Malvinder Singh in Religare Finvest case
रेलिगेयर एंटरप्राइजेज (Relagare Enterprises) के पूर्व सीएमडी सुनील गोधवानी (Sunil Godhwani) की भी गिरफ्तारी हुई है


>> इस खुलासे के बाद बाजार नियामक सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड (SEBI) ने दोनों भाइयों और उनसे संबंधित 8 फर्म्स को 403 करोड़ रुपये फोर्टिस के खाते में जमा करने का आदेश दिया है.

क्या है मामला- इस मामले में दायर हुई FIR से पता चलता है कि रेलिगेयर ग्रुप को कुल 3,000 करोड़ रुपये की चपत लगाने के मुख्य किरदार मलविंदर मोहन सिंह (एमएमएस) और शिविंदर मोहन सिंह (एसएमएस) बंधु थे. धोखाधड़ी के इस खेल में कंपनी से पहले के बकाये के तौर पर जिस दिन भुगतान प्राप्त किया गया, उसी दिन उसी कंपनी को उतनी ही राशि या उससे अधिक राशि दी गई.
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कुछ मामलों में बहीखाते की प्रविष्टियां पूर्व की तारीखों में की गई, जबकि दोबारा भुगतान उसी दिन या एक से दो दिन के अंतराल में किया गया, जबकि उसी कंपनी को या कुछ अन्य कंपनियों को पैसे दिए गए.

इस प्रकार पूरा मामला सुनियोजित था जिसमें बकाये का पैसा लिया गया और फिर भुगतान किया गया. सिंह बंधुओं ने कंपनी के सीईओ सुनील गोधवानी के साथ मिलकर धोखाधड़ी की पूरी साजिश रची और जानबूझकर रेलिगेयर फिनवेस्ट को डुबोया, ताकि बगैर किसी दखलंदाजी के पैसों की हेराफेरी की जा सके.

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First published: November 14, 2019, 6:01 PM IST
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