आम्रपाली बिल्डर्स के मालिकों पर कार्रवाई शुरू, ED ने कसा शिकंजा! दर्ज हुआ मनी लॉन्ड्रिंग केस

ईडी के लखनऊ कार्यालय ने नोएडा पुलिस के समक्ष कंपनी के खिलाफ कम से कम 16 प्राथमिकी दर्ज होने का संज्ञान लेते हुए इस महीने की शुरुआत में धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है.

News18Hindi
Updated: July 23, 2019, 1:27 PM IST
आम्रपाली बिल्डर्स के मालिकों पर कार्रवाई शुरू, ED ने कसा शिकंजा! दर्ज हुआ मनी लॉन्ड्रिंग केस
आम्रपाली बिल्डर्स के मालिकों पर कार्रवाई शुरू, ED ने कसा शिकंजा! दर्ज हुआ मनी लॉन्ड्रिंग केस
News18Hindi
Updated: July 23, 2019, 1:27 PM IST
आम्रपाली प्रोजेक्ट्स में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने कंपनी और उसके मालिकों के खिलाफ मनी लौंड्रिंग (धनशोधन) का आपराधिक मामला दर्ज किया है.ईडी के लखनऊ कार्यालय ने नोएडा पुलिस के समक्ष कंपनी के खिलाफ कम से कम 16 प्राथमिकी दर्ज होने का संज्ञान लेते हुए इस महीने की शुरुआत में धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है.फ्लैट खरीदारों के मुकदमे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और डायरेक्टर की संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश दिया है. साथ ही, कंपनी के मालिकों के खिलाफ ईडी को मनी लांड्रिंग के आरोप की जांच करने के आदेश दिए हैं.आपको बता दें कि फिलहाल आम्रपाली के सीएमडी समेत अन्य जेल में बंद हैं. जांच में पता चला कि घर खरीदारों को पैसे ने कंपनी के डायरेक्टर और आला अधिकारियों ने अपनी मौज-मस्ती में खर्च किया था.

ये भी पढ़ें-बड़ी राहत! SC ने कहा- अब NBCC बनाएगा आम्रपाली के अधूरे फ्लैट

अब क्या होगा-मनी लॉन्ड्रिंग के तहत आम्रपाली के मालिकों की जांच होगी. इसके बाद इन पर सख्त कार्रवाई होगी. अधिकारियों ने कहा कि ईडी कंपनी के प्रवर्तकों से पूछताछ करने और मनी लॉन्ड्रिंग संबंधी कानून का उल्लंघन करने को लेकर जब्त किये जाने योग्य संपत्तियों की पहचान करने पर विचार कर रही है. आपको बता दें कि मनी लॉन्ड्रिंग (कालेधन को सफेद करना) भारतीय कानून के तहत अपराध है, जिसके लिए सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है.

आम्रपाली ग्रुप के सीएमडी, अनिल शर्मा (फाइल फोटो)


>> अब आम्रपाली ग्रुप के मालिकों पर भी इसी कानून तहत कार्रवाई होगी. भारतीय संसद ने वित्तीय अपराधों को रोकने और वित्तीय अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट बनाया है.

>> इस कानून के तहत वित्तीय अपराध करने वाले को तीन साल से सात साल तक की कठोर सजा का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा आरोपी पर जुर्माना लगाया जा सकता है और उसकी संपत्ति भी जब्त की जा सकती है.

>> अगर वित्तीय अपराध कोई कंपनी या फर्म करती है, तो उसके अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाती है. कई बार शेल कंपनी बनाकर वित्तीय धोखाधड़ी की जाती है और काले धन को सफेद किया जाता है. साथ ही टैक्स चोरी की जाती है.
Loading...

ये भी पढ़ें-देशभर में बिल्डरों पर सुप्रीम कोर्ट का शिकंजा, दिया ये आदेश



>> शेल कंपनियां वो होती हैं, जो सिर्फ कागजों में होती हैं. हालांकि इनका वास्तव में धरातल पर कोई अस्तित्व नहीं होता. हाल ही में मोदी सरकार ने तीन लाख से ज्यादा शेल कंपनियों में ताला लगाया था.

>> इसके अलावा तस्करी, वेश्यावृत्ति, हथियारों की खरीद-फरोख्त, गबन, शेयरों की गैर कानूनी तरीके से खरीद-फरोख्त, रिश्वतखोरी और कंप्यूटर के जरिए धोखा करके धन अर्जित करना भी वित्तीय अपराध की कटेगरी में आता है.

सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि कंपनी के मालिकों ने लोगों को धोखा दिया है. यह गंभीर धोखाधड़ी का मामला है. जो भी ताकतवर लोग उनके पीछे खड़े हैं उनमें से किसी को नहीं छोड़ा जाएगा. सबके खिलाफ क्रिमिनल केस चलेगा. अथॉरिटी और बैंकर्स ने भी लोगों का विश्वास तोड़ने का काम किया है इसलिए खरीदारों को इतनी दिक्कतें उठानी पड़ी हैं.
First published: July 23, 2019, 1:23 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...