Amazon-Future Retail Deal: फेमा उल्लंघन को लेकर अमेज़न की जांच करेगा प्रवर्तन निदेशालय

फॉरेन मैनेजेंट एक्सचेंज एक्ट, 199 फॉरेक्स कन्वर्ज़न से जुड़ा कानून है.

फॉरेन मैनेजेंट एक्सचेंज एक्ट, 199 फॉरेक्स कन्वर्ज़न से जुड़ा कानून है.

प्रर्वतन निदेशालय (ED) ने अमेज़न के खिलाफ फेमा कानून के उल्लंघन को लेकर जांच शुरू कर दी है. अमेजन ने फ्युचर रिटेल-रिलायंस डील पर आपत्ति जताई थी. दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि तीन अग्रीमेंट के जरिए फेमा का उल्लंघन किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 29, 2021, 9:23 AM IST
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नई दिल्ली. अमेज़न पर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा प्रतिकूल टिप्पणी करने के करीब एक महीने बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब इस कंपनी के खिलाफ जांच शुरू कर दी है. ईडी इस बात की जांच करेगा कि क्या फ्युचर रिटेल (Amazon-Future Retail Deal) के साथ डील में अमेजन ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट, 1999 (FEMA) का उल्लंघन किया है या नहीं. बता दें कि अमेजन ने किशोर बियानी (Kishore Biyani) की मालिकान वाली फ्युचर रिटेल को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) द्वारा अधिग्रहण को कोर्ट में चुनौती दी थी. पिछले महीने ही इस केस पर फैसला लेते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि अमेजन अप्रत्यक्ष रूप से बिग बाज़ार ओनर को नियंत्रित कर रहा था. इसके लिए सरकार की मंजूरी नहीं ली गई थी.

कोर्ट ने अमेज़न के तीन अग्रीमेंट को ध्यान में रखते हुए यह टिप्पणी किया था. इसी में आगे कहा गया था कि इन अग्रीमेंट के जरिए फेमा का उल्लंघन किया गया है. फॉरेन मैनेजेंट एक्सचेंज एक्ट, 1999 फॉरेक्स कन्वर्ज़न से जुड़ा कानून है. इकोनॉमिक टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी है.

अनलिस्टेड भारतीय ईकाई का सहारा ले रही अमेज़न

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि अमेज़न कई अग्रीमेंट के जरिए फ्यूचर रिटेल को नियंत्रित करना चाहती है. इसके लिए वो अपनी अनलिस्टेड भारतीय ईकाई का सहारा ले रही है. इससे फेमा के अंतर्गत एफडीआई नियमों (FDI Rules) का उल्लंघन हो रहा है. हालांकि, कोर्ट ने अमेज़न को इस बात के लिए सही ठहराया कि उसने फ्युचर ग्रुप-रिलायंस रिटेल डील  (Future Group-Reliance Retail Deal) को लेकर वैधानिक प्राधिकारी के सामने प्रतिनिधत्व किया.
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दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले महीने ही तीन सहमतियों की शर्तों का विश्लेषण किया. ये तीनों सहमति - एफसीपीएल में फ्यूचर रिटेल की हिस्सेदारी सहमति, अमेजन के साथ एफसीपीएल की हिस्सेदारी और अमेजन के साथ एफसीपीएल का शेयर सब्सक्रिप्शन सहमति  था.

दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा?



कोर्ट ने कहा, ‘अपने प्रोटेक्टिव राइट्स बनाने के अलावा, इन तीनों सहमतियों से पता चलता है कि ये फ्युचर रिटेल को नियंत्रित करने की दिशा में हैं. इसके लिए सरकार की मंजूरी प्राप्त करना जरूरी है. ऐसा नहीं करने पर फेमा-एफडीआई नियमों का उल्लंघन होगा.’ भारत सरकार के नियमों के मुताबिक, कोई भी मल्टी-ब्रांड रिटेल सेग्मेंट भारत में एफडीआई पॉलिसी के तहत 51 फीसदी से ज्यादा का विदेशी निवेश नहीं कर सकता है.

बता दें कि अमेजन ने रिलायंस-फ्युचर डील पर आपत्ति जताई थी और इस डील को रोकना चाहती थी. फ्युचर रिटेल ने 23 दिसंबर को कहा था कि उसके बोर्ड ने 24,713 करोड़ रुपये के एसेट्स को रिलायंस रिटेल के हाथों बेच दिया है. कोर्ट ने इसे वैध ठहराया है.

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ध्यान देने योग्य है कि ईडी ने भी पिछले साल हाई कोर्ट को जानकारी दी थी कि वो कथित तौर पर विदेशी एक्सचेंज कानून के उल्लंघन को लेकर अमेजन की जांच कर रही है. ईडी ने कोर्ट को यह जानकारी एक जनहित याचिका के जवाब में दिया था, जिसमें अमेज़न और फ्लिपकार्ट द्वारा फेमा कानून के उल्लंघन के बारे में जानकारी मांगी गई थी.

(डिस्केलमर- न्यूज18 हिंदी, रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का हिस्सा है. नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का स्वामित्व रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास ही है.)



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