EPF vs NPS: बजट में ईपीएफ के नियम बदलने के बाद कौन है बेहतर रिटायरमेंट सेविंग ऑप्शन

बुजुर्गों को मिलेगी ज्यादा पेशन

बुजुर्गों को मिलेगी ज्यादा पेशन

कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ (Employees’ Provident Fund) और नेशनल पेंशन सिस्‍टम यानी एनपीएस (National Pension System) दो प्रकार की रिटायरमेंट सेविंग स्कीम हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 15, 2021, 4:53 PM IST
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नई दिल्ली. रिटायरमेंट के बाद अपने भविष्य को वित्तीय रूप से सुरक्षित रखने के लिए मार्केट में कई ऑप्शन मौजूद हैं. इनमें निवेश के जरिए रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी का खर्च उठाया जा सकता है. इनमें कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ (Employees’ Provident Fund) और नेशनल पेंशन सिस्‍टम यानी एनपीएस (National Pension System) सबसे बेहतर विकल्प माने जाते हैं, जो टैक्स सेविंग के साथ-साथ अच्छा रिटर्न भी प्रदान करते हैं.

क्या है ईपीएफ (EPF)

कर्मचारी भविष्य निधि के तहत कर्मचारियों को अपनी सैलरी से कम से कम 12 फीसदी वेतन जमा करनी होती है. नियोक्ता भी कर्मचारी के ईपीएफ में इतनी ही रकम डालता है. यह योगदान कर्मचारी के रिटायरमेंट फंड में होता है. 58 साल की उम्र के बाद ईपीएफ फंड की पूरी रकम निकाली जा सकती है. हालांकि, मेडिकल खर्च, घर बनाने, शिक्षा आदि के लिए इसमें से आंशिक रकम भी निकालने का प्रावधान है.

क्या है एनपीएस (NPS)
गौरतलब है कि नेशनल पेंशन सिस्‍टम एक सरकारी रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है, जिसे केंद्र सरकार ने साल 2004 में लॉन्च किया था. साल 2009 के बाद से इस स्कीम को प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए भी खोल दिया गया. अब सरकारी के साथ प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाला कोई भी कर्मचारी अपनी मर्जी से इस योजना में शामिल हो सकता है.

किसी निवेशक को खुद ही एनपीएस में अकाउंट खुलवाना होता है. इसके तहत टियर-1 अकाउंट्स में कम से कम 500 रुपये और टियर-2 अकाउंट्रस में 1,000 रुपये तक का निवेश किया जा सकता है. एनपीएस अकाउंट में निवेश की कोई तय लिमिट नहीं है.

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2.5 लाख से ज्‍यादा है PF कॉन्ट्रिब्यूशन तो ब्याज पर लगेगा टैक्‍स

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट (Budget 2021) में प्रस्ताव रखा कि विभिन्न पीएफ में कर्मचारी कॉन्ट्रिब्यूशन पर होने वाली ब्याज आय के मामले में टैक्स छूट को 2.5 लाख रुपये सालाना कॉन्ट्रिब्यूशन तक सीमित किए जाए. यह नया प्रस्ताव 1 अप्रैल 2021 को या उसके बाद होने वाले पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन पर लागू होगा. इसका मतलब हुआ कि पीएफ में 2.5 लाख रुपये सालाना तक के कॉन्ट्रिब्यूशन से होने वाली ब्याज आय ही टैक्स फ्री होगी. यह मुख्य रूप से उच्च आय वाले कर्मचारियों को प्रभावित करेगा. आम आदमी इस बदलाव से प्रभावित नहीं होगा और इसलिए उसके लिए ईपीएफ अभी भी एक आकर्षक ऑप्शन है.

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रिटर्न और पेंशन

पीएफ के तहत रिटर्न सालाना सरकार द्वारा घोषित ब्याज दर के साथ तय किया जाता है. हालांकि, एनपीएस पर रिटर्न एनएवी पर निर्भर है जो बढ़ सकती है या गिर सकती है. इस प्रकार पीएफ सुरक्षा और सुनिश्चित रिटर्न प्रदान करता है जबकि एनपीएस उच्च जोखिम और उच्च रिटर्न प्रदान करता है. आम आदमी के लिए दोनों विकल्प टैक्स लाभ और अच्छे रिटर्न प्रदान करते हैं. एनपीएस और ईपीएफ के बीच का ऑप्शन टैक्सपेयर्स के ज्ञान, कर्मचारी की जोखिम की प्रवृत्ति, कर्मचारी द्वारा प्रयोग किए जाने वाले ऑप्शन, रिटर्न, सुरक्षा, लॉक-इन, मैच्योरिटी आदि पर निर्भर करता है.
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