नौकरी करने वालों को लग सकता है बड़ा झटका, इस वजह से फिर घट सकती हैं पीएफ की ब्याज दरें

पहले पीएफ की ब्याज दर 8.65 फीसदी थी, जिसे मार्च महीने में घटाकर 8.50 फीसदी किया गया.
पहले पीएफ की ब्याज दर 8.65 फीसदी थी, जिसे मार्च महीने में घटाकर 8.50 फीसदी किया गया.

ईपीएफओ (EPFO) एक बार फिर से पीएफ (PF-Provident Fund) की ब्याज दरों में कटौती कर सकता है. आपको बात दें कि पहले पीएफ की ब्याज दर 8.65 फीसदी थी, जिसे मार्च महीने में घटाकर 8.50 फीसदी किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 26, 2020, 11:23 AM IST
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नई दिल्ली. कोरोना के इस संकट में आम आदमी की मुश्किलें रोजाना बढ़ती जा रही हैं. एक ओर महंगाई (Inflation) दूसरी ओर सेविंग पर ब्याज दरें (Small Saving Interest Rates) लगातार कम हो रही हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईपीएफओ (EPFO-Employees Provident Fund Organisation) की तरफ से एक बार फिर ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है. इसके पीछे मुख्य वजह निवेश पर घटते रहने वाले रिटर्न को बताया जा रहा है, जिसके चलते प्रॉविडेंट फंड पर दिए जाने वाले ब्याज (Provident Fund interest rate) को घटाने पर विचार किया जा रहा है. आपको बता दें कि वित्त वर्ष 2019-20 के पीएफ दरें 8.65 फीसदी से घटाकर 8.50 फीसदी कर दी गई है. लेकिन अभी तक उसे वित्त मंत्रालय से मंजूरी नहीं मिल सकी है. श्रम मंत्रालय इसके बारे में तभी नोटिफाई करेगा, जब वित्त मंत्रालय इसे अपनी मंजूरी दे देता है.

क्या है मामला- अंग्रेजी के अखबार इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, अखबार को सूत्रों ने बताया है कि ब्याज दरों पर फैसला लेने के लिए ईपीएफओ का फाइनेंस विभाग, इन्वेस्टमेंट विभाग और ऑडिट कमेटी जल्द बैठक करने वाले हैं. इसमें ये तय किया जाएगा कि ईपीएफओ कितना ब्याज दर देने की हालत में है. आपको बता दें कि EPFO अपने कुल फंड का 85 फीसदी हिस्सा डेट मार्केट (बॉन्ड्स) में और 15 फीसदी हिस्सा एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) के जरिए शेयर बाजार में लगाता है.पिछले साल मार्च के अंत में इक्विटीज में EPFO का कुल निवेश 74,324 करोड़ रुपये का था और उसे 14.74% का रिटर्न मिला था.

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क्यों ब्याज दरें घटेंगी? EPFO ने 18 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है. इसमें से करीब 4500 करोड़ रुपये एनबीएफसी कंपनी दीवान हाउसिंग और आईएलएंडएफएस में लगाए गए हैं.  डीएचएफएल जहां बैंकरप्सी रिजॉल्यूशन प्रॉसेस से गुजर रही है, वहीं IL & FS को बचाने के लिए सरकारी निगरानी में काम चल रहा है. ऐसे में EPFO की बड़ी रकम फंस गई है.
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