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खुशखबरी: नौकरी करने वालों को मुफ्त मिलेगी ₹7 लाख की ये सुविधा, जानिए कैसे उठाएं फायदा?

EPFO के सभी सब्सक्राइबर इंप्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम 1976 (EDLI) के तहत कवर होते हैं.

EPFO के सभी सब्सक्राइबर इंप्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम 1976 (EDLI) के तहत कवर होते हैं.

केन्द्र की मोदी सरकार (Modi Government) ने कोरोनाकाल में नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत दी है.

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    नई दिल्ली. केन्द्र की मोदी सरकार (Modi Government) ने कोरोनाकाल (Coronavirus Pandemic) में नौकरीपेशा लोगों (Employee’s) को बड़ी राहत दी है. एम्‍प्‍लॉय डिपॉजिट लिंक्‍ड इंश्‍योरेंस स्‍कीम, 1976 (EDLI Scheme) के तहत दी जाने वाली बीमा राशि की सीमा अब 6 लाख से बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दी गई है. यानी अब आपको फ्री में 7 लाख रुपये तक का फायदा मिल सकता है. आपको बता दें ईपीएफओ (EPFO) की तरफ से अपने सब्सक्राइबर्स को जीवन बीमा की सुविधा दी जाती है.

    EPFO के सभी सब्सक्राइबर इंप्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम 1976 (EDLI) के तहत कवर होते हैं. हाल ही में इंश्योरेंस कवर की अधिकतम धनराशि 7 लाख रुपये हो गई है, जो पहले 6 लाख रुपये थी. गौरतलब है कि श्रम मंत्री संतोष गंगवार की अध्यक्षता वाले ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (सीबीटी) ने नौ सितंबर, 2020 को EDLI योजना के तहत अधिकतम बीमा राशि बढ़ाकर 7 लाख रुपये करने का निर्णय किया था.

    बढ़ी हुई यह लिमिट लागू कर दी गई है
    श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 28 अप्रैल को EDLI योजना के तहत अधिकतम बीमा राशि बढ़ाकर 7 लाख रुपये करने के फैसले को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी. अधिसूचना की तारीख से ही यह बढ़ी हुई लिमिट लागू हो गई है.

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    जानें कब ले सकते हैं इस स्कीम का फायदा?
    EDLI स्कीम के तहत क्लेम मेंबर इंप्लॉई के नॉमिनी की ओर से इंप्लॉई की बीमारी, दुर्घटना या स्वाभाविक मृत्यु होने पर किया जा सकता है. अब यह कवर उन कर्मचारियों के पीड़ित परिवार को भी मिलता है, जिसने मृत्यु से ठीक पहले 12 महीनों के अंदर एक से अधिक प्रतिष्ठानों में नौकरी की हो. भुगतान एकमुश्त होता है. EDLI में इंप्लॉई को कोई रकम नहीं देनी होती है. अगर स्कीम के तहत कोई नॉमिनेशन नहीं हुआ है तो कवरेज मृत कर्मचारी का जीवनसाथी, कुंवारी बच्चियां और नाबालिग बेटा/बेटे लाभार्थी होंगे.

    कंपनी करती है प्रीमियम भुगतान
    इस स्‍कीम के तहत प्रीमियम का भुगतान कंपनी की ओर से किया जाता है. संगठित यानी ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों की बेसिक सैलरी+DA का 12 फीसदी इंप्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) में जाता है. 12 फीसदी का ही योगदान कंपनी/एम्‍प्‍लायर की ओर से भी होता है. एम्‍प्‍लायर के 12 फीसदी योगदान में से 8.33 फीसदी इंप्लॉई पेंशन स्कीम EPS में और बाकी EPF में जाता है. इसके अलावा, EDLI स्कीम में केवल एम्‍प्‍लायर की ओर से प्रीमियम जमा होता है, जो कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 0.50 फीसदी होता है. हालांकि, अधिकतम बेसिक सैलरी लिमिट 15 हजार रुपये ही काउंट होगी.

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    जानें कैसे होता है कैलकुलेशन?
    EDLI स्कीम में क्लेम की गणना कर्मचारी को मिली आखिरी 12 माह की बेसिक सैलरी+DA के आधार पर की जाती है. ताजा संशोधन के तहत अब इस इंश्योरेंस कवर का क्लेम आखिरी बेसिक सैलरी+DA का 35 गुना होगा, जो पहले 30 गुना होता था. साथ ही अब 1.75 लाख रुपये का मैक्सिमम बोनस रहेगा, जो पहले 1.50 लाख रुपये मैक्सिमम था. यह बोनस आखिरी 12 माह के दौरान एवरेज पीएफ बैलेंस का 50 फीसदी माना जाता है. उदाहरण के तौर पर आखिरी 12 माह की बेसिक सैलरी+DA अगर 15000 रुपये है तो इंश्योरेंस क्लेम (35 x 15,000) + 1,75,000= 7 लाख रुपये हुआ.

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