गन्ना किसानों के लिए आई बड़ी खबर: सरकार 3 रुपये तक बढ़ाएगी एथेनॉल की कीमतें!

Ethanol Price Hike Soon: केंद्र सरकार एथेनॉल की कीमतें 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ा सकती है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने कैबिनेट को प्रस्ताव भेजा है.
Ethanol Price Hike Soon: केंद्र सरकार एथेनॉल की कीमतें 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ा सकती है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने कैबिनेट को प्रस्ताव भेजा है.

Ethanol Price Hike Soon: केंद्र सरकार एथेनॉल की कीमतें 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ा सकती है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने कैबिनेट को प्रस्ताव भेजा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 28, 2020, 11:29 AM IST
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नई दिल्ली. सरकार एथेनॉल की कीमतें 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ा सकती है. पेट्रोलियम मंत्रालय (Petroleum Ministry) ने कैबिनेट को प्रस्ताव भेजा है. CNBC-आवाज़ को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बढ़ी हुई कीमत 1 दिसंबर, 2020 से लागू करने का प्रस्ताव है. अभी एथेनॉल (Ethanol Price Hike Soon:) की कीमत 43.75 रु प्रति लीटर से लेकर 59.48 रु प्रति लीटर है. आपको बता दें कि एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जिसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. एथेनॉल का उत्पादन यूं तो मुख्य रूप से गन्ने की फसल से होता है लेकिन शर्करा वाली कई अन्य फसलों से भी इसे तैयार किया जा सकता है. इससे खेती और पर्यावरण दोनों को फायदा होता है. भारतीय परिपेक्ष्य में देखा जाए तो एथेनॉल ऊर्जा का अक्षय स्रोत है क्योंकि भारत में गन्ने की फसल की कमी कभी नहीं हो सकती. ऐसे में एथेनॉल की कीमतें बढ़ने से किसानों को फायदा होगा. क्योंकि शुगर मिल आसानी से गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान कर पाएंगी.

1 दिसंबर से 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ सकती है एथेनॉल की कीमतें-अगले सीज़न (दिसंबर 2020-नवंबर 2021) तक एथेनॉल का उत्पादन दोगुना होने का अनुमान है. उत्पादन बढ़ने से सरकार पेट्रोल में 8 फीसदी एथनॉल मिलाने का लक्ष्य पूरा कर पायेगी. सूत्रों के मुताबिक नेशनल बायोफ्यूल पॉलिसी के तहत 2022 तक 10 फीसदी और 2030 तक 20 फीसदी Ethanol Blending जरूरी करने का लक्ष्य है. आपको बता दें कि चीनी कंपनियों से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां जिस कीमत पर एथेनॉल खरीदती हैं वो सरकार तय करती है.


एथेनॉल के इस्तेमाल से 35 फीसदी कम कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन होता है. इतना ही नहीं यह कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन और सल्फर डाइऑक्साइड को भी कम करता है. इसके अलावा एथेनॉल हाइड्रोकार्बन के उत्सर्जन को भी कम करता है. एथेनॉल में 35 फीसदी फीसद ऑक्सीजन होता है. एथेनॉल फ्यूल को इस्तेमाल करने से नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आती है.



एथेनॉल इको-फ्रैंडली फ्यूल है और पर्यावरण को जीवाश्म ईंधन से होने वाले खतरों से सुरक्षित रखता है. इस फ्यूल को गन्ने से तैयार किया जाता है. कम लागत पर अधिक ऑक्टेन नंबर देता है और MTBE जैसे खतरनाक फ्यूल के लिए ऑप्शन के रूप में काम करता है.यह इंजन की गर्मी को भी बाहर निकालता है. एल्कोहल बेस्ड फ्यूल गैसोलीन के साथ मिलकर ई 85 तक तैयार हो गया. कहने का मतलब एथेनॉल फ्यूल हमारे पर्यावरण और गाड़ियों के लिए सुरक्षित है.
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