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यूरोप में 'महंगाई डायन' ने मारा, 19 देशों में पहली बार 10% तक मुद्रास्फीति की दर, और गहराई मंदी की आशंका

शुक्रवार को महंगाई को लेकर जारी हुआ यूरो स्टेट डेटा

शुक्रवार को महंगाई को लेकर जारी हुआ यूरो स्टेट डेटा

Europe Inflation Rate: यूरो स्टेट डेटा के अनुसार, यूरोजोन में कंज्यूमर प्राइसेज सितंबर महीने में 10 फीसदी बढ़ी है. जबकि ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

यह लगातार पांचवा महीना है जब महंगाई में वृद्धि अर्थशास्त्रियों के अनुमान से ज्यादा है.
ऊर्जा और खाने-पीने के सामानों की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हुई है.
लिथुआनिया में तो महंगाई दर 22 फीसदी से ज्यादा आई है. 

नई दिल्ली. यूरोपीय देशों में बढ़ती महंगाई से मंदी और आर्थिक संकट का खतरा बढ़ता जा रहा है. यूरोजोन में आने वाले 19 देशों में पहली बार मुद्रास्फीति की दर दोहरे अंक के साथ 10 फीसदी तक पहुंच गई है. शुक्रवार को जारी यूरो स्टेट डेटा के अनुसार, यूरोजोन में कंज्यूमर प्राइसेज सितंबर महीने में 10 फीसदी बढ़ी है. जबकि अगस्त में यह दर 9.1 फीसदी और इसके आगे 9.7 फीसदी रहने का अनुमान था लेकिन 10 प्रतिशत की यह दर काफी ज्यादा है.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यह लगातार पांचवा महीना है जब कंज्यूमर गुड्स में वृद्धि अर्थशास्त्रियों के अनुमान से ज्यादा है. अब महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए सेंट्रल बैंकों पर इंटरेस्ट रेट में एग्रेसिव तरीके से बढ़ोतरी करने का दबाव बढ़ गया है.

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खाने-पीने की वस्तुओं जबरदस्त तेजी
यूरो स्टेट डेटा के मुताबिक, इन सभी 19 देशों में महंगाई बढ़ने के पीछे एक बड़ी वजह है ऊर्जा और खाने-पीने के सामानों की कीमतों में वृद्धि है. ऊर्जा की कीमतों में सालाना आधार पर 40.8% की वृद्धि हुई, जो अगस्त में 38.6% थी. इसके बाद भोजन, शराब और तंबाकू की कीमतों में 11.8% की वृद्धि हुई, जो पिछले महीने 10.6% थी. प्रिंसिपल ग्लोबल इन्वेस्टर्स की चीफ ग्लोबल स्ट्रेजिस्ट सीमा शाह ने कहा कि मुद्रास्फीति की दर अपने चरम पर रहती है तो महाद्वीप की स्थिति गंभीर हो सकती है.

लिथुआनिया में महंगाई दर 22 फीसदी पर पहुंची
वहीं लिथुआनिया में तो महंगाई दर 22 फीसदी से ज्यादा आई है. महंगाई से जुड़े इन आंकड़ों के सामने आने के बाद इस पर काबू पाने के लिए सबकी नजरें यूरोपीय सेंट्रल बैंकों की आगामी मीटिंग पर लगी हुई है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंफ्लेशन पर कंट्रोल करने के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंग्लैंड दूसरी दफा इंटरेस्ट रेट में 0.75 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है और इसका सीधा असर यूरोपीय शेयर बाजारों पर देखने को मिलेगा.

जर्मनी में ऊर्जा की कीमतों में जोरदार बढ़ोतरी
एनर्जी से जुड़ी ऊंची कीमतों के कारण जर्मनी में मुद्रास्फीति सितंबर में लगभग 25 वर्षों में अपने चरम पर आ गई है. गुरुवार को सामने आए डेटा से इसका पता चला. जर्मनी में कंज्यूमर प्राइसेज सितंबर में 10.9 फीसदी बढ़े, जो अगस्त में 8.8 फीसदी थे. रूस से घटती गैस आपूर्ति के कारण ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद दशकों बाद महंगाई इतनी बढ़ी है.

वहीं अर्जेंटीना में महंगाई पिछले एक साल पहले की तुलना में लगभग 80 प्रतिशत तक बढ़ गई है.
ग्लोबल स्तर पर फूड और एनर्जी की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते ये हालात पैदा हुए हैं. वहीं सरकार ने खुदरा विक्रेताओं को कीमतों को स्थिर करने के लिए प्रेरित किया है.

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अमेरिका में खुदरा महंगाई दर बढ़ने से लगातार ब्‍याज दरें बढ़ाई जा रही हैं. फेडरल रिजर्व लगातार ब्याज दरों में तीसरी बार 0.75 फीसदी की बढ़ोतरी कर चुका है. फेड रिजर्व के मुखिया जेरोम पॉवेल का कहना है कि खुदरा महंगाई अभी 40 साल के शीर्ष पर है और इसके काबू में आने तक ब्‍याज दरें बढ़ाना पड़ सकता है. उन्‍होंने कहा कि हम खुदरा महंगाई को 2 फीसदी तक लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो अभी 8 फीसदी के दायरे में है. अमेरिका के अलावा भारत समेत दुनिया के कई देश महंगाई पर नियंत्रण के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का ऐलान कर चुके हैं.

Tags: Europe, Inflation, Rbi policy

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