क्या ETF में पैसा लगाने का ये सही समय है? कैसा है मिरे एसेट का नया ईएसजी एनएफओ

अगर आप भी थोड़ा रिस्क लेने को तैयार हैं और अच्छा रिटर्न चाहते हैं तो एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में पैसा लगाना आपके लिए सही विकल्प होगा. आइए जानें नए मिए
अगर आप भी थोड़ा रिस्क लेने को तैयार हैं और अच्छा रिटर्न चाहते हैं तो एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में पैसा लगाना आपके लिए सही विकल्प होगा. आइए जानें नए मिए

अगर आप भी थोड़ा रिस्क लेने को तैयार हैं और अच्छा रिटर्न चाहते हैं तो एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में पैसा लगाना आपके लिए सही विकल्प होगा. आइए जानें नए मिए

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 9, 2020, 1:26 PM IST
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नई दिल्ली. अगर आप भी थोड़ा रिस्क लेने को तैयार हैं और अच्छा रिटर्न चाहते हैं तो एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में पैसा लगाना आपके लिए सही विकल्प होगा. वैसे तो हर निवेश में थोड़ा-बहुत जोखिम होता है लेकिन कोरोना वायरस के कारण शेयर बाजार में जिस तरह की अनिश्चितता दिखाई दे रही है, उसे देखते हुए ETF में निवेश एक अच्छा ऑप्शन होगा, खासतौर से तब जब आप लॉन्ग-टर्म के लिए निवेश करना चाहते हों. ETF में निवेश कैसे आपके लिए बढ़िया साबित हो सकता यह समझने से पहले जानते हैं कि एक्सचेंज ट्रेडेड फंड क्या होता है और कितने तरह का होता है.

क्या होते हैं ईटीएफ- ETF शेयर बाजार में लिस्टेड फंड होते हैं जिनको शेयरों की तरह ही खरीदा-बेचा जाता है. इसमें म्यूचुअल फंडों की तरह एक्टिव पोर्टफोलियो मैनेजमेंट की जरूरत नहीं पड़ती है, इसलिए इन्हें इनैक्टिव इक्विटी इन्वेस्टमेंट माना जाता है.

म्यूचुअल फंडों की तरह ही इसमें इन्वेस्टमेंट थीम के मुताबिक कई शेयर होते हैं, लेकिन MFs के उलट इन्हें शेयर बाजार में ही खरीदा-बेचा जाता है.



इन्हें रियल टाइम बेसिस पर शेयर बाजार में खरीदा-बेचा जा सकता है. साथ ही इनकी कीमत भी रियल टाइम के आधार पर ही तय होती है. इनकी खरीद-फरोख्त की यूनिट और पैसा ट्रेडिंग वाले दिन के 2 दिनों बाद क्रमश: डीमैट अकाउंट और बैंक खाते में जमा हो जाते हैं. कम फंड मैनेजमेंट चार्ज के कारण इसमें कुछ म्यूचुअल फंड्स की तुलना में लम्बे समय में ज्यादा रिटर्न मिल सकता है.
मिरे एसेट मैनेजर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ स्वरूप मोहंती ने न्यूज 18 हिंदी से खास बातचीत की और सवालों के जवाब दिए ....

  • ईटीएफ पर क्यों बढ़ रहा म्यूचुअल फंडों का जोर


    वैसे तो भारत में ईटीएफ का अस्तित्व पिछले 20 साल से है, लेकिन ईटीएफ में बढ़त वास्तव में पिछले 5-6 साल में देखी गई है. भारत में ईटीएफ का एयूएम बढ़ने की कुछ वजहें इस प्रकार हैः

    सरकारें ईटीएफ का इस्तेमाल विनिवेश के एक पसंदीदा मार्ग के रूप में कर रही हैं, इसकी वजह से छोटे निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है.ईपीएफओ और निजी पीएफ संस्थाएं ईटीएफ का इस्तेमाल शेयर बाजार में अपना निवेश बढ़ाने के लिए कर रही हैं.

    एक्टिव फंड में अल्फा यानी बाजार से बेहतर रिटर्न हासिल करने की गुंजाइश घटने जाने से आम निवेशक भी निफ्टी, सेंसेक्स जैसे ईटीएफ के फायदों के प्रति जागरूक हो चुके हैं.

    जब बाजार परिपक्व और प्रभावी होता है तो अल्फा के अवसर घटते जाते हैं. हम शायद ऐसे दौर में प्रवेश कर चुके हैं, जब बड़ा अल्फा हासिल करना बहुत कठिन हो गया है. ऐसी हालात में कोई निवेशक ईटीएफ जैसे उत्पादों का ज्यादा हिस्सा अपने पोर्टफोलियो में रख सकता है ताकि बेंचमार्किंग के मुकाबले काफी कमतर प्रदर्शन के जोखिम से बचा जा सके और निवेश के द्वारा सतत रूप से संपदा का सृजन किया जा सके.

    किसी ईटीएफ में निवेश की सबसे आवश्यक विशेषता एक डीमैट/ट्रेडिंग अकाउंट रखना है, क्योंकि ईटीएफ की किसी एक्सचेंज पर शेयरों की तरह ही खरीद-फरोख्त की जाती है. हम यदि सेबी द्वारा जारी आंकड़ों को देखें तो वित्त वर्ष 2020 में सबसे ज्यादा डीमैट अकाउंट खोले गये.

    31 मार्च 2020 तक नए जुड़ने वाले डीमैट अकाउंट की संख्या 49 लाख तक पहुंच गई थी और एक साल पहले के मुकाबले यह 22.5 फीसदी ज्यादा था. एक पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा बढ़त है. आगे की बात करें तो यह संख्या और बढ़ेगी, क्योंकि निवेशक अपना धन वित्तीय एसेट में लगाना चाहेंगे. नए डीमैट अकाउंट खुलने से ईटीएफ की तरक्की को प्रोत्साहन मिलेगा, क्योंकि इससे छोटे निवेशक सीधे ईटीएफ में निवेश कर पाएंगे.


  • मिरे का नया ईएसजी एनएफओ भी एक ईटीएफ है. ऐसा क्यों?


    किसी भी एक्टिव फंड या ईटीएफ के द्वारा निवेशक शेयर बाजार में निवेश कर सकता है. लेकिन ईएसजी ईटीएफ ऐसे सूचकांकों पर आधारित है जिनका निर्माण ऐसे साफतौर से परिभाषित नियमों के आधार पर किया गया है, जो बहुत सटीक हैं और इनमें किसी तरह की दुविधा या अस्पष्टता की गुंजाइश नहीं है. इसमें शेयरों का चुनाव ईएसजी रिसर्च पर आधारित होता है.

    यह रिसर्च ईएसजी के ऐसे वैश्विक लीडर्स के द्वारा किया जाता है, जिनकी इस विषय पर विशेषज्ञता है, जबकि एक्टिव फंड में ऐसा हो सकता है कि ईएसजी रिसर्च सिर्फ उनके घरेलू विश्लेषकों द्वारा किया गया हो. इसके अलावा, ईएसजी पैरामीटर पर किसी कंपनी के प्रदर्शन को मापने का कोई वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य रास्ता नहीं है. हमें इस बात को समझना होगा कि ईएसजी के आंकड़े अपनी प्रकृति में काफी हद तक गुणात्मक होते हैं और इन सभी जानकारियों को आत्मसात करने के लिए इस क्षेत्र की विशेषता हासिल करने की जरूरत होती है. यह कंपनियों को साधारण रूप से सिर्फ वित्तीय पैमाने पर मूल्यांकित करने से काफी अलग है. इसके लिए ही हमें सस्टेनएनालिटिक्स (Sustainalytics) जैसे वैश्विक अनुसंधाना प्रदाता की मदद लेने की जरूरत पड़ती है. किसी ईटीएफ में नियम आधारित रवैया अपनाने की वजह से निवेशक वास्तव में यह जान पाता है कि फंड क्या करने वाला है और कहां निवेश नहीं करने वाला. ईएसजी जैसे थीम के मामले में यह काफी महत्वपूर्ण है. एक्टिव फंड मैनेजरों के मामले में एक अंतर्निहित जोखिम ईएसजी के असर के आकलन में उनकी विशेषज्ञता को लेकर होता है, क्योंकि इसके लिए ऐसे खास कौशल की जरूरत होती है, जो कि परंपरागत निवेश प्रबंधन से अलग होता है. किसी एक्टिव फंड का मैनेजर कोई जीवंत निर्णय ले सकता है, लेकिन इस प्रक्रिया में काफी वस्तुनिष्ठता आ जाती है, जो कि ईटीएफ के मामले में कम से कम होती है. हालांकि, ईटीएफ के मामले में इंडेक्सिंग रवैया उतना ही अच्छा हो सकता है, जितना हासिल आंकड़ों की गुणवत्ता हो. यह आंकड़े आमतौर पर ईएसजी रिसर्च के किसी वैश्विक अगुआ के द्वारा प्रदान किये जाने चाहिए और ईएसजी रिसर्च के लिए कंपनियों के निष्पक्ष और विस्तृत विश्लेषण के एक सुपरिभाषित और मजबूत ढांचे पर आधारित होन चाहिए.


  • निवेशक के पोर्टफोलियो में पैसिव बनाम एक्टिव घटक

    कोई निवेशक यदि पूरी तरह से एक्टिव फंडों में ही रुचि और निवेश रखता है, उसे अपनी संपदा सृजन में क्षरण के जोखिम का सामना करना पड़ सकता है, जब ऐसे एक्टिव फंड अच्छा प्रदर्शन नहीं करते. हालांकि फंड मैनेजरों के बेंचमार्क से कमतर प्रदर्शन करने की इस जोखिम को पैसिव निवेश से मार्केट में बीटा एक्सपोजर के द्वारा कम किया जा सकता है. मार्केट की गतिविधि पर नजर रखते हुए पैसिव फंड में यह निवेश किसी बड़ी गिरावट के दौर में स्वाभाविक हेज यानी जोखिम से बचाव के काम करता है. यदि कोई निवेशक पूरी तरह से पैसिव फंड पर ही निर्भर है तो वह फंड मैनेजरों के शेयरों के चयन का कौशल का फायदा उठाने और उसमें भागीदारी करने का अवसर गंवा देता है. किसी एक्टिव फंड में छोटे निवेश से ही किसी निवेशक को अतिरिक्त रिटर्न हासिल हो सकता है, अपनी पोर्टफोलियो की स्थिरता को जोखिम में डाले बिना. इसके अलावा एक्टिव फंड अपने स्वभाव से इक्विटी और निश्चित आय की तरफ झुकाव वाले होते हैं, लेकिन यदि निवेशक यदि सोने जैसी किसी कमोडिटी में निवेश का फायदा उठाना चाहता है तो उसके लिए पैसिव फंड बेहतर विकल्प हो सकते हैं, जिनके द्वारा परंपरागत एसेट वर्ग और कमोडिटी वाले पोर्टफोलियो का निर्माण किया जा सकता है. इसी तरह से, यदि कोई भारतीय निवेशक अपने एसेट का कुछ हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजार में आवंटित करना चाहता है, तो भारत में संचालित ऐसे फंड बेहतरीन उत्पाद साबित हो सकते हैं जो इस तरह के विदेशी बाजार को ट्रैक करते हों. इसकी वजह से किसी देश के स्थानीय कानून और नियमन की जानकारी रखने की जरूरत नहीं रह जाती और इससे रीपैट्रिएशन यानी मुद्रा विनिमय आदि का जोखिम भी कम हो जाता है. इसके अलावा ऐसे समय में जब वित्तीय बाजारों में नए-नए खिलाड़ी आ रहे हैं और मौजूदा निवेशक निवेश के लिए नए विचार या थीम की तलाश कर रहे हैं, शुरुआत करने के लिए पैसिव निवेश एक बेहतरीन साधन हो सकता है, क्योंकि इससे किसी अनजान इलाके में सहजता से प्रवेश करने और सही अंदाजा लगाने में मदद मिलती है. एक बार जब कोई निवेशक इसका अभ्यस्त हो जाता है, तो वह अपने एसेट का कुछ हिस्सा एक्टिव फंडों में आवंटित करना शुरू कर सकता है, क्योंकि निवेश और बाजार की बारीकियों की परख और समझ हो जाती है. इसलिए सवाल एक्टिव या पैसिव का नहीं है, बल्कि यह है कि एक्टिव और पैसिव उत्पादों का इस्तेमाल करते हुए किसी निवेशक के पोर्टफोलियो को उसके वांछित लक्ष्य और जोखिम प्रोफाइल के अनुरूप बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकता है.


  • भारत में ईएसजी निवेश गति पकड़ रहा है. इसकी क्या वजह है और निवेशकों को क्या फायदा है


     मुझे लगता है कि पिछले दो-तीन साल में शासन संबंधी मसलों के बढ़ने की वजह से भारतीय निवेशकों को यह आभास होने लगा है कि गैर वित्तीय सूचनाओं पर विचार करना और उनका मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण हो गया है. हम यह देख रहे हैं कि आमतौर पर लोग अपने उपभोग को लेकर सचेत हो रहे हैं. हम भारतीय आज की जरूरतों को पूरा करने पर जोर देते हुए और भविष्य की पीढ़ियों को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी तरह का समझौता न करना पड़े, इसका ध्यान रखते हुए समाज में अपने योगदान की जरूरत को समझने लगे हैं. भारतीय निवेशकों को एक बात की चिंता होती है कि ईएसजी फंडों में निवेश करने से उसे अपने वित्तीय रिटर्न से किसी तरह का समझौता तो नहीं करना होगा? लेकिन हमें यह जानकर अचरज होगा कि अनुभवजन्य अध्ययनों के विश्लेषण से यह पता चलता है कि ईएसजी निवेश करने में प्रदर्शन का नुकसान नहीं होता. सच तो यह है कि ईएसजी फंडों ने न केवल बेहतर प्रदर्शन किया है, बल्कि कम उतार-चढ़ाव भी दिखाया है, जिसकी वजह से निवेशकों को ज्यादा बेहतर जोखिम रिटर्न प्रोफाइल मिल पाता है. ईएसजी थीम पोर्टफोलियो आपके मुख्य पोर्टफोलियो का हिस्सा बन सकता है, क्योंकि ऐसे पोर्टफोलियो में इस तरह की संपदा तैयार करने की संभावना होती है, जिनमें लाॅन्ग टर्म में कम जोखिम होता है. इसलिए किसी ईएसजी पोर्टफोलियो में निवेश कर आप न केवल एक बेहतर भविष्य में निवेश कर रहे होते हैं, कंपनियों को ईएसजी दस्तूर अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर, बल्कि आप कम जोखिम के साथ संपदा सृजन की संभावना के साथ ऐसा कर पाते हैं. इसलिए ईएसजी एक अनूठी निवेश रणनीति है जो प्रदर्शन और नैतिकता को मापती है.


  • इक्विटी फंडों के लिए इस बाजार में मजबूत रिटर्न दे पाना कितना आसान या चुनौतीपूर्ण है?


    शेयरों में निवेश लॉन्ग टर्म के लिए होता है और किसी निवेशक को कोविड-19 जैसी जिंदगी में एक बार आने वाली घटनाओं से घबराना नहीं चाहिए. अतीत में हम यह देख चुके हैं कि बाजार विभिन्न चक्र से गुजरता है और एक ऐसा निवेशक जो सभी चक्र में अपना निवेश बनाए रखता है, वह ज्यादा संपदा का सृजन और संचय कर पाता है. इसके अलावा, यह बात भी गौर करनी होगी कि कोविड-19 का वित्त वर्ष 2021 में कमाई पर तो बड़ा असर होगा, लेकिन इसके बाद कंपनियों की कमाई अपने पुराने दौर में लौट जाने की उम्मीद है. इसलिए, कोई जब निवेश करता है तो यह देखना महत्वपूर्ण है कि उसके पोर्टफोलियो में शेयरों के चयन की प्रक्रिया क्या है. मिरे एसेट में हमारा भरोसा इस बात में है कि गुणवत्तापूर्ण कारोबार में हिस्सा लिया जाए. इसके लिए हम तीन खंडों में उनका मूल्यांकन करते हैं-कारोबार, प्रबंधन और मूल्यांकन. ऐसे कारोबार जो गुणवत्तापूर्ण नहीं होते उनसे बचा जाता है या ऐसे गुणवत्तापूर्ण कारोबार जिनमें निवेश की कीमत काफी होती है, उनसे भी बचकर रहते हैं. शेयरों के चयन की प्रक्रिया के साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि पोर्टफोलियो निर्माण के तंत्र का आकलन किस तरह से किया जाए. मिरे में हमारा यह मानना है कि अपने विभिन्न फंडों में विविधीकरण को बनाए रखने का अनुशासन कायम रहे. एक अनुशासित विविधीकृत पोर्टफोलियो गलतियों को संभालने और बेहतरीन जोखिम समायोजित रिटर्न देने में मदद करता है. मजबूत शेयर चयन प्रक्रिया के साथ ही पोर्टफोलियो के निर्माण में अनुशासित रवैया अपनाने से इस बात की संभावना प्रबल होती है कि कोई इक्विटी फंड बेहतरीन रिटर्न दे सके.
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