Exclusive: उदय कोटक ने कहा-भारत को चीन पर घटे भरोसे का फायदा उठाने से चूकना नहीं चाहिए

सीआईआई के अध्‍यक्ष उदय कोटक ने कहा कि कोरोना वायरस के बाद के भारत में फ्लेक्सिवल लेबर पॉलिसी की जरूरत है.
सीआईआई के अध्‍यक्ष उदय कोटक ने कहा कि कोरोना वायरस के बाद के भारत में फ्लेक्सिवल लेबर पॉलिसी की जरूरत है.

कोटक महिंद्रा बैंक के प्रबंध निदेशक और उद्योग संगठन सीआईआई के अध्‍यक्ष उदय कोटक (Uday Kotak) ने CNN News18 को दिए Exclusive Interview में आत्‍मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bhara) से लेकर अर्थव्‍यवस्‍था (Indian Economy) को दोबारा पटरी पर लाने जैसे कई मुद्दों पर बात की.

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नई दिल्‍ली. कोटक महिंद्र बैंक के एमडी और उद्योग संगठन सीआईआई (CII) के अध्‍यक्ष उदय कोटक (Uday Kotak) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्‍मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat) का मतलब प्रतिस्‍पर्धी भारत भी है. इसका मतलब है कि भारत शेष दुनिया के साथ राजनीतिक और कारोबारी गतिवधियों के जरिये लगातार जुड़ा हुआ है. कोरोना वायरस के कारण ज्‍यादातर देशों का चीन (China) पर भरोसा कम हुआ है. ऐसे में चीन के बाहर उत्‍पाद निर्माण की संभावनाओं पर चर्चा चल रही है. भारत (India) को चीन पर घटे दुनिया के भरोसे का फायदा उठाने से चूकना नहीं चाहिए. भारत को अमेरिका व चीन (US-China) और हॉन्‍ग कॉन्‍ग व ताइवान (Hong Kong-Taiwan) के बीच जारी राजनीति के कारण बने अवसरों को हाथों-हाथ लेना चाहिए. इस समय भारत के पास दुनियाभर से निवेश खींचने का अच्‍छा मौका है.

नौकरियों के साथ श्रमिकों की देखभाल पर भी देना होगा ध्‍यान
उदय कोटक से जब वैश्‍विक महामारी के कारण डंवाडोल हुई अर्थव्‍यवस्‍था को पटरी पर लाने के तरीके पर सवाल पूछा गया तो उन्‍होंने कहा कि हालात काफी मुश्किल भरे हैं. हेल्‍थ सेक्‍टर से जुड़े लोग और वैज्ञानिक कोविड-19 का समाधान ढूंढने के लिए दिनरात मेहनत कर रहे हैं. फिलहाल ये दोनों क्षेत्र आर्थिक और वित्त क्षेत्र की मदद से समाधान पाने की कोशिश कर रहे हैं. उदय कोटक ने CNN News18 को दिए Exclusive Interview में कहा कि वैश्विक महारी का अंतिम समाधान विज्ञान ही है, लेकिन हम इसे आर्थिक और वित्त क्षेत्र की मदद से ही जीतेंगे. साथ ही कहा कि इंडस्‍ट्रीज को नौकरियों के साथ कर्मचारियों की देखभाल पर भी ध्‍यान देना चाहिए. उन्‍होंने कहा कि कोरोना वायरस के कारण वास्‍तविक से लेकर डिजिटल वर्ल्‍ड तक बड़े बदलाव हुए हैं.

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वास्‍तविक और डिजिटल वर्ल्‍ड में पैदा हो जाएगा असंतुलन


वैश्विक महामारी के कारण उपभोक्‍ता मॉल या दुकान पर जाकर खरीदारी करने के बजाय ऑनलाइन शॉपिंग को तव्‍वजो दे रहे हैं. इससे वास्‍तविक और डिजिटल वर्ल्‍ड के बीच असंतुलन पैदा हो जाएगा. ठीक इसी तरह अगर प्रवासी श्रमिकों को लगा कि वे शहरों में अपने जीवन से तंग आ चुके हैं और उनकी नौकरी भी सुरक्षित नहीं है तो असंतुलन की स्थिति बन जाएगी. इसके अलावा अगर उन्‍हें लगा कि उनके अपने घर से ज्‍यादा वायरस का जोखिम शहर में है तो वे निश्‍चित तौर पर गांव लौटने का फैसला लेंगे. दूसरे शब्‍दों में कहें तो गांव लौट चुके लोग शहर नहीं लौटने का फैसला लेंगे. ऐसे में हमें ग्रामीण और शहरी जीवन को परिभाषित करना होगा. इतिहास में पहली बार प्रवासी श्रमिकों ने फैसला लिया है कि शहरों से बेहतर जीवन गांव में है.

अर्थव्‍यवस्‍था में सबसे नीचे वालों की सुरक्षा की होगी जरूरत
मौजूदा हालात में कारोबार सुचारू रखने के लिए हमें फ्लेक्सिवल लेबर पॉलिसी की जरूरत है. इससे कंपनियां सही फैसला ले सकेंगी. अगर इन सभी तथ्‍यों को एकसाथ देखा जाए तो हमें अहसास होगा कि कोविड-19 के बाद की दुनिया में किस तरह के फैसले लेने की जरूरत होगी. हमें ऐसी प्रणाली तैयार करनी होगी जो अर्थव्‍यवस्‍था में सबसे नीचे वाले लोगों की सुरक्षा और देखभाल का पूरा ध्‍यान रखे. इसका एक तरीका डायरेक्‍ट कैश ट्रांसफर भी हो सकता है यानी सीधे उनके खाते में पैसे डालकर उनकी माली हालत को ठीक किया जाए. दूसरा हमें नौकरियां खोने वालों की हर तरह की सुरक्षा की चिंता भी करनी होगी. साथ ही लोगों के लिए नई तरह की नौकरियों का सृजन भी करना होगा.

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फरवरी-मार्च 2021 से पटरी पर लौट आएगी अर्थव्‍यवस्‍था
उदय कोटक से जब अर्थव्‍यवस्‍था के दूसरी छमाही में उबरने और मांग के बढ़ने की उम्‍मीदों पर सवाल किया गया तो उन्‍होंने कहा कि इकोनॉमी में फरवरी के मुकाबले सितंबर से 65 से 75 फीसदी तक सुधार हो सकता है. वहीं, फरवरी-मार्च 2021 से अर्थव्‍यवस्‍था पटरी पर लौट आएगी. फिलहाल भारत जीडीपी में सुधार की दिशा में बढ़ रहा है. हमें लोगों का जीवन और आजीविका बचाने के लिए जो भी करना पड़े करना होगा. हम अर्थव्‍यवस्‍था को सुधारने के लिए जल्‍दबाजी में कोई कदम उठाने का जोखिम नहीं ले सकते हैं. लिहाजा, अर्थव्‍यवस्‍था में तेजी के लिए कुछ समय इंतजार करना पड़ सकता है.

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