Exclusive Interview: 1991 के ऐतिहासिक बजट से तुलना के सवाल पर क्या बोलीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण?

किसान आंदोलन पर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, "हम चाहते हैं कि किसान कृषि मंत्री के साथ अपने मुद्दों पर बात करें."

Exclusive Interview: केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कहा कि सरकार चाहती हैं कि किसान अपनी चिंताओं से हमें अवगत कराएं और उन खास प्वाइंट्स को हाईलाइट करें, जो उन्हें कृषि कानून में गलत लगता है. हमें लगता है कि प्रदर्शन कर रहे किसानों को भ्रमित किया गया है.

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    नई दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के पेश किए गए बजट 2021 की तुलना 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव (PV Narasimha Rao) की सरकार में तत्‍कालीन वित्‍‍‍त मंंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) के पेश किए गए बजट से की जा रही है. ऐसे में साहसी सुधारक या फिर चैंपियन ऑफ इनक्लूसिव ग्रोथ के तौर पर खुद को याद किए जाने के सवाल पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने न्यूज18 नेटवर्क समूह (News18 Network) के एडिटर इन चीफ राहुल जोशी (Rahul Joshi) के साथ एक्‍‍‍‍‍‍‍‍‍सक्‍लूसिव इंंटरव्‍यू के दौरान कहा कि वह इस बारे में बिल्कुल नहीं सोचती हैं और ना ही कभी अपना दिमाग इस बारे में लगाया.

    किसानों के मुद्दों पर क्‍या बोलीं वित्‍त मंत्री
    किसानों के मुद्दे और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकार और कृषक संगठनों (Farmers Union) के बीच गतिरोध पर वित्त मंत्री ने कहा कि वास्तव में ये चकित करता है, क्योंकि 2014 से ही एमएसपी (MSP) में लगातार इजाफा हो रहा है. ऐसे में सरकार की नीयत पर शक करने की कोई वजह नहीं है. अगर कोई समस्या है तो आपको बातचीत करनी चाहिए.



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    वित्त मंत्री ने कहा, 'हम चाहते हैं कि किसान कृषि मंत्री के साथ अपने मुद्दों पर बात करें. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कहा कि वह किसानों के सुझाव पर कुछ बिंदुओं के संशोधन को तैयार हैं. सरकार चाहती हैं कि किसान अपनी चिंताओं से हमें अवगत कराएं और उन खास प्वाइंट्स को हाईलाइट करें, जो उन्हें कृषि कानून में गलत लगता है. हमें लगता है कि प्रदर्शन कर रहे किसानों को भ्रमित किया गया है. उन्होंने कहा कि बजट 2021 एक ईमानदार प्रयास है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीब और जरूरतमंद के लिए कभी भी कुछ भी करने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं.'

    'अभी तक नहीं देखी बाजार की प्रतिक्रिया'
    बजट पर आ रही प्रतिक्रियाओं के बारे में वित्त मंत्री ने कहा, 'अभी तक मैंने बाजार की प्रतिक्रिया देखी नहीं है, लेकिन उम्मीद है कि लोगों को सरकार की नीयत समझ आएगी. अगर मेरे पास ज्यादा संसाधन होते तो हम लोगों को उपलब्ध कराते, लेकिन हमारे पास बहुत ज्यादा संसाधन नहीं थे और ना ही हमारे पास अभी संसाधन हैं. टैक्स बढ़ाने पर हमने विचार नहीं किया, क्योंकि हम टैक्स बढ़ाकर बजट के लिए आवंटन नहीं जुटाना चाहते.' उन्होंने कहा, 'निजीकरण के लक्ष्यों पर अधिक अनुमान लगाने के लिए मेरी आलोचना होती है. मैं मानती हूं कि 2 लाख करोड़ रुपये के निजीकरण के लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सका है.'

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    इससे पहले बजट भाषण पढ़ते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, 'यह बजट चुनौतियों से भरे माहौल में पेश हो रहा है. कोरोना वायरस महामारी के कारण लोगों ने जान गंवाई. इस दौरान हमने 40 करोड़ किसानों के खाते में पैसा जाए, इसकी व्यवस्था की गई. सरकार ने 4 आत्मनिर्भर पैकेज की घोषणा की. हमने GDP की 13 फीसदी राशि यानी 27 लाख करोड़ रुपये मार्केट में डाले.'

    बता दें कि नरेंद्र मोदी सरकार का यह सातवां पूर्ण बजट है. पिछले 6 बजट में केंद्र सरकार ने कई बड़ी घोषणाएं की हैं.

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