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लॉकडाउन ने समझाई कैशलैस इंडिया की अहमियत, ऑनलाइन पेमेंट में दाे साल का रिकॉर्ड टूटा

 डिजिटल पेमेंट के साथ हमें कई सावधानियां भी बरतनी चाहिए
डिजिटल पेमेंट के साथ हमें कई सावधानियां भी बरतनी चाहिए

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्राैद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार वित्तीय वर्ष 2019-2020 में डिजिटल लेनदेन की संख्या 4572 कराेड़ थी जबकि वित्तीय वर्ष 2018-19 में यह 3134 कराेड़ था ताे वर्ष 2017-18 में 2071 कराेड़ .

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 22, 2021, 5:08 PM IST
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अमित देशमुख


नई दिल्‍ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी की कैशलैस इंडिया (Cashless India) के विजन काे लेकर धीरे-धीरे लाेगाें में जागरूकता आ रही है. खासताैर पर पिछले सालभारत में काेराेना वायरल (Covid 19)फैलने से राेकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन (Lockdown)के बाद से डिजिटल पेमेंट की रफ्तार में अच्छी खासी बढ़ाेत्तरी हुई है. स्थिति यह है कि पिछले साल हुए ऑनलाइन पेमेंट ने उसके पिछले दाे सालाें की रिकॉर्ड ही ताेड़ दिया. यह अच्छी बात है कि लाेग डिजिटल (Digital)कह लीजिए या ऑनलाइन (Online)पेमेंट काे लेकर जागरूक हाे रहे है लेकिन इसमें भी खासी सावधानी बरतने की जरूरत है क्याेंकि पिछले कुछ समय से डिजिटल पेमेंट में धाेखाधड़ी भी बढ़ा है. ताे जानते है क्या है भारत में डिजिटल पेमेंट की स्थिति और साथ में इसे लेकर हमें काैन-काैन सी सावधानियां बरतनी चाहिए.


4500 कराेड़ से ज्यादा डिजिटल लेनदेन


इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्राैद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार वित्तीय वर्ष 2019-2020 में डिजिटल लेनदेन की संख्या 4572 कराेड़ थी जबकि वित्तीय वर्ष 2018-19 में यह 3134 कराेड़ था ताे वर्ष 2017-18 में 2071 कराेड़ का. रिपाेर्ट बताती है कि जनवरी 2020 से अगस्त 2020 डिजिटल लेनदेन की संख्या 3106.64 कराेड़ थी जिसमें लॉकडाउन के समय यानि मार्च से लेकर मई तक कुल 1050.59 कराेड़ बार लेनदेन हुआ इसने अनलॉक के बाद से यानि जून से और रफ्तार पकड़ी और साल के अंत तक यह 4572 कराेड़ तक पहुंच गया.


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इसलिए भी बढ़ रही है लगातार संख्या


आरबीआई ने डिजिटल लेनदेन काे लेकर हाे रही बढ़ाेत्तरी काे लेकर एक अध्ययन भी करवाता था जिसमें भारत में तेजी से प्रचलित हाे रही डिजिटल पेमेंट की वजहाें के बारे में बताया गया. इस रिपाेर्ट के अनुसार बड़े मूल्य से लेकर छाेटे मूल्य तक यूपीआई व अन्य नेटवर्क के जरिए हाेने वाले आसानी से पेमेंट ताे इसकी वजह है ही इसके साथ सरकारी विभागाें द्वारा ई-भुगतान काे बढ़ावा देना भी है. लॉकडाउन के बाद वायरस काे लेकर बरती गई सावधानियाें में नाेट काे सीधे हाथ लगाने के बजाय डिजिटल पेमेंट काे लेकर दिया गया सरकार का जाेर भी काम आया.


सीएम की बेटी तक हाे चुकी है ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार


पिछले दिनाें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बेटी हर्षिता ने एक ओएलएक्स (OLX) प्लेटफॉर्म पर सोफा बेचने की जानकारी दी थी. एक व्यक्ति ने खरीदारी में रुचि दिखाते हुए उनसे संपर्क किया. अकाउंट सही होने के नाम पर उसने हर्षिता के खाते में छोटी रकम ट्रांसफर की. इसके बाद व्यक्ति ने उनको एक क्यूआर कोड भेजा और उनसे स्कैन करने को कहा ताकि तय रकम उनके अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाए. लेकिन, ऐसा करने पर हर्षिता के खाते से 20 हजार रुपए कट गए. इसके बाद जब हर्षिता ने व्यक्ति से इसकी शिकायत की तो उसने कहा कि गलती से ऐसा हुआ. फिर से ऐसी ही प्रक्रिया करने पर हर्षिता के खाते से 14 हजार रुपये कट गए जिसकी शिकायत फिर पुलिस में की गई. इसलिए ऑनलाइ पेमेंट करते समय कुछ सावधानियां रखना बेहद जरूरी है.   


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इन बातों का हमेशा रखें ध्यान


एनी डेस्क जैसे एप पर किसी को भी अपने मोबाइल का रिमोट दें.


पेमेंट सिक्योर रूप से यूपीआई के जरिए करें.


अनजान व्यक्ति के साथ ट्रांजेक्शन में चेक, आरटीजीएस या उसके मोबाइल नंबर पर यूपीआई पेमेंट करें.


फोन पर आए अवांछित लिंक खोलें.


अपने मोबाइल फोन को कभी भी खुला (अनलॉक) छोड़ें.


कभी भी किसी को भी ओटीपी बताएं.


अनजाने व्यक्ति की तरफ से आए क्यूआर कोड पर क्लिक करें. बहुत जरूरी होने पर पहले इत्मिनान के साथ पड़ताल करें.


लॉटरी या ईनाम के लालच में फंसें.


यूज नहीं होने वाले अप्लिकेशन और कनेक्शन को खुला छोड़ें.


किसी भी अनजान या असुरक्षित नेटवकर्क से अपने मोबाइल फोन को कनेक्ट करें.


अपनी पर्सनल डीटेल्स जैसे पासवर्ड, यूजर नेम अपने मोबाइल में सेव करें.


वायरस वाले डेटा को किसी अन्य मोबाइल फोन में ट्रांसफर करें.

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