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Budget 2021: रियल एस्टेट सेक्टर की उम्मीद, अफोर्डेबल हाउसिंग की अपर लिमिट बढ़ने से होगा डिमांड में इजाफा

रियल एस्टेट सेक्टर को केंद्रीय बजट से उम्मीद
रियल एस्टेट सेक्टर को केंद्रीय बजट से उम्मीद

कोरोनावायरस संकट की वजह से फंसे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए रियल एस्टेट डेवलपर्स ने बजट में अलग से फंड बनाने की मांग की है. डेवलपर्स की एसोसिएशन नारेडको और क्रेडाई ने इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम को बहाल करने और अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट में 75 लाख रुपए तक के मकानों को शामिल करने की मांग की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 22, 2021, 4:28 PM IST
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कुलदीप सिंगोरिया. नई दिल्ली
पहले से संकट में चल रहे रियल एस्टेट सेक्टर को कोविड19 महामारी की वजह से दोहरी मार पड़ी है. ऐसे में, फंसे हुए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए डेवलपर्स ने आगामी केंद्रीय बजट में अलग से फंड बनाने की मांग की है. उन्होंने इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम को बहाल करने और अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट में 75 लाख रुपए तक के मकानों को शामिल करने की मांग की है.
डेवलपर्स की एसोसिएशन (नारेडको) NAREDCO ने मांग की है कि SBI की मौजूदा स्कीम SWAMIH की तर्ज पर सरकार और Stress Funds मुहैया कराए ताकि सेक्टर नकदी के संकट से उबर सके. नारेडको के प्रेसिडेंट निरंजन हीरानंदानी ने प्रधानमंत्री आवास योजना की तारीफ करते हुए कहा कि अफोर्डेबल सेगमेंट में 75 लाख रुपए तक के मकानों को शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि महानगरों में जमीन की कीमत काफी ज्यादा होती है. वहीं, बिल्डरों के संगठन क्रेडाई के प्रेसीडेंट सतीश मागर ने बाइंग कैपेसिटी बढ़ाने के लिए आयकर में और छूट देने की मोग की है.
डेवलपर्स चाहते हैं कि इनकम टैक्स की दरों में कटौती के साथ रियल इस्टेट ट्रांजेक्शन में भी इक्विटी के तर्ज पर एलटीसीजी (LTCG) टैक्स को घटाया जाए. होमलोन के ब्याज में डिडक्शन लिमिट को 2 लाख से बढ़ाने और होम बायर्स को सीधे फायदा पहुंचाने के लिए इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम को बहाल करना चाहिए. इसी तरह, सेज (SEZ) को बूस्ट करने के लिए कदमों का ऐलान भी बिल्डरों की विश लिस्ट में शामिल है.
नारेडको ने उम्मीद जताई है कि अगले तीन महीनों में डिमांड एक बार फिर से प्री कोविड लेवल यानि 2019 के स्तरों पर पहुंच सकती है, बशर्ते सरकार अटके प्रोजेक्ट्स को लेकर फुर्ती दिखाए. इससे सप्लाई बढ़ेगी. बैंक समेत सेक्टर से जुड़े स्टेकहोल्डर्स को फायदा होगा और होमबार्यर्स का भी सस्ते घर का भी सपना पूरा हो सकेगा.
रियल एस्टेट को दिया जाना चाहिए इंडस्ट्री का दर्जा
बेनेट एंड बर्नार्ड समूह के फाउंडर लिंकन बेनेट रोड्रिग्स का कहना है कि आगामी बजट में आयकर नियमों में और ढील देने से रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट मिल सकता है. जीएसटी में और सुधार किए जाने चाहिए. रियल एस्टेट क्षेत्र को उद्योग का दर्जा मिलने की उम्मीद है. वहीं, 315वर्क एवेन्यू के सीईओ मानस मेहरोत्रा बताते है कि बीते कुछ वक्त से कोवर्किंग ऑफिस स्पेस की डिमांड बढ़ी है. कंपनियां लागत और पूंजीगत व्यय को कम करने के लिए वैकल्पिक विकल्प तलाश रही हैं. मेहरोत्रा  आगामी बजट 2021 से इस सेगमेंट के लिए भी उम्मीदें हैं. उनका कहना है कि कोवकर्स कल्चर के लिए टीडीएस की दरें कम होनी चाहिए.



कमर्शियल रियल एस्टेट में निवेश के लिए हो जरूरी सुधार
यील्डएसेट रियल एस्टेट टेक प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर और सीईओ राजेश बिनर ने बताया कि देश में रियल एस्टेट के कमर्शियल ऑफिस वाले सेगमेंट में तेजी से निवेश हो रहा है. इसकी मांग बढ़ने से कई वैश्विक निवेशक बड़े दांव लगा रहे हैं. इसलिए स्टांप ड्यूटी को कम करने की आवश्यकता है. महाराष्ट्र ने ऐसा करके एक उदाहरण भी पेश कर दिया है. रियल एस्टेट के निर्माण पर लगने वाले जीएसटी को किराए पर दिए जाने की स्थिति में जीएसटी को इनपुट क्रेडिट के रूप में अनुमति दी जानी चाहिए. हमें उम्मीद है कि बजट शहरी क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण से जुड़े आईटी इन्फ्रा खर्चों के लिए अधिक धन आवंटित करेगा. सरकार को प्रॉपर्टी रिकॉर्ड के ब्लॉकचेन एक्जीक्यूशन के लिए क्रेडिट गारंटी ऋण प्रदान करके प्रॉपटेक कंपनियों को भी बढ़ावा देना चाहिए.
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