Explained: कम समय में अमीर बनाने वाली क्रिप्टोकरेंसीज क्यों हैं विवादों में.. जानें भारत में क्या योजना बन रही है?

RBI ने क्रिप्‍टोकरेंसी की खरीद फरोख्‍त करने वाले भारतीय निवेशकों को बड़ी राहत दी है.

Cryptocurrency: यह एक तरह का Digital Asset होता है जिसका इस्तेमाल चीज़ों की खरीदारी या सर्विसेज के लिए किया जाता है.

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    नई दिल्ली. क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) यानी वर्चुअल करेंसी को लेकर पिछले कुछ समय से भारत समेत दुनियाभर में चर्चा गर्म है. फर्श से अर्श तक पहुंचाने वाली क्रिप्टोकरेंसी और क्रिप्टो मार्केट को लेकर दुनियाभर में चर्चा है. क्रिप्टो मार्केट में टेस्ला के सीईओ एलन मस्क (Elon Musk) समेत कई दिग्गजों की दिलचस्पी है तो कुछ ऐसे भी हैं जो इस करेंसी से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं.

    आइए जानते हैं इसके बारे में सबकुछ...

    क्या है क्रिप्टोकरेंसी?
    Cryptocurrency एक तरह का Digital Asset होता है जिसका इस्तेमाल चीज़ों की खरीदारी या सर्विसेज के लिए किया जाता है. इन currencies में cryptography का इस्तेमाल होता है. इसे आप संपत्ति के तौर पर यूज सकते हैं, लेकिन इसके लिए कोई बैंक, एटीएम नहीं है. दुनियाभर के कई देशों में क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल ऑनलाइन खरीदारी में होता है. इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि हर देश के पास अपनी एक करेंसी होती है. जैसे कि भारत के पास रुपया है, सउदी अरब के पास रियाल है, अमेरिका के पास डाॅलर है. इसी तरह बाकी देशों के पास भी अपनी करेंसी होती हैं. हालांकि, इसे नोट या सिक्कों के रूप में प्रिंट नहीं किया जा सकता है, लेकिन फिर भी इसकी वैल्यू है.

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    कब हुई Cryptocurrency की शुरुआत?
    क्रिप्टोकरेंसी की शुरुआत साल 2009 में हुई थी. दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटक्वाइन (Bitcoin)है और इसी के साथ क्रिप्टोकरेंसी का नाम सामने आया. बिटक्वाइन को जापान के सतोषी नाकमोतो नाम के एक इंजीनियर ने बनाया था. दुनियाभर में करीब 1000 से ज्यादा क्रिप्टोकरेंसी हैं.

    कैसे काम करती है क्रिप्टोकरेंसी?
    क्रिप्टोकरेंसी ब्लाॅकचेन (Blockchain) के जरिए काम करती है. यानी कि इसमें लेनदेन का रिकाॅर्ड रखा जाता है. पावरफुल कंम्प्यूटर इसकी निगरानी करते हैं, इसे क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग (Cryto mining) कहा जाता है. ऐसे में इसे हैक करना बहुत मुश्किल है. ब्लॉकचेन के कारण ही क्रिप्टोकरेंसी का लेन-देन काफी विश्वसनीय है और इसके लिए तीसरी पार्टी जैसे बैंक या किसी वित्तीय संस्थान आदि की जरूरत नहीं पड़ती है. क्रिप्टोकरेंसी की ट्रेडिंग यानी इसमें खरीद-फरोख्त क्रिप्टो एक्सचेंज पर होती है. Binance, coinbase, WazirX, Coinone, crypto.com समेत कई प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंज हैं.

    क्या है ब्लाॅकचेन और कैसे करता है काम?
    क्रिप्टोकरेंसी ब्लॉकचेन टेक्नोलाजी पर आधारित होता है. जहां लेनदेन का पूरा हिसाब रखा जाता है. क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग इसी के जरिए होती है. इसे बनाने वाले को माइनर्स कहा जाता है. जब क्रिप्टो में कोई लेनदेन होता है तो उसकी जानकारी ब्लॉकचेन में दर्ज होती है. यानि उसे ब्लॉक करके रखा जाता है और इस ब्लॉक की सिक्योरिटी और Encryption का माइनर्स का होता है. इसके लिए वे एक क्रिप्टोग्राफिक पहेली को हल करते हैं, उसके लिए एक कोड तलाशते हैं. जब कोई माइनर्स में ब्लॉक के सिक्योर होने की पुष्टि कर देता है, तो उसे Blockchain में जोड़ दिया जाता है. इसके बाद नेटवर्क में मौजूद अन्य नोड्स द्वारा उसे वेरिफाई किया जाता है. इस प्रोसेस को Consensus कहा जाता है.Consensus में Bloc के सिक्योर होने की पुष्टि हो जाती है और उसे सही पाया जाता है तब उसके सिक्योर करने वाले माइनर्स को क्रिप्टो क्वाॅइन दिए जाते हैं.

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    ये हैं कुछ प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी के नाम-
    Bitcoin-BTC
    Ethereum-ETH
    Ripple- XRP
    Monero- (XMR)
    Cosmos- (ATOM)
    Binance Coin-BNB
    Polkadot-DOT
    Uniswap-UNI
    Cardano-ADA
    Tether-USDT
    Litecoin- (LTC)
    Dogecoin

    भारत में क्रिप्टोकरेंसी का मार्केट
    कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में क्रिप्टोकरेंसी में 80 लाख लोग निवेश कर रहे हैं. निवेश की कुल वैल्यू 100 अरब रुपये के आसपास हो सकती है. इस साल जनवरी-फरवरी में 20 हजार नए निवेशक जुड़े हैं. साल 2020 में क्रिप्टो मार्केट में कुल 173 करोड़ रुपये का निवेश किया हुआ था. भारत में Coinswitch, CoinFCX, WazirX पाॅपुलर क्रिप्टो एक्सचेंज हैं. इसके जरिए बिटक्वाइन समेत कई प्रमुख करेंसी में कारोबार होता है.

    जानें क्या है क्रिप्टोकरेंसी के फायदे?
    >> क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल करेंसी है. इसमें फ्राॅड की गुंजाइश बिल्कुल नहीं है. यानी इसे हैक करना नामुमकिन है.
    >> इन्वेस्टमेंट के लिए लिहाज से बेहतर क्योंकि रिटर्न बहुत अच्छा मिलता है. इसके लिए बैंक की जरूरत नहीं है.
    >> क्रिप्टो को खरीदना, बेचना और इसमें निवेश करना काफी आसान होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसके कई सारे क्रिप्टोकरेंसी वाॅलेट हैं.
    >> दुनिया के किसी भी कोने से किसी भी कोने में रकम ट्रांसफर की जा सकती है. क्रिप्टो करेंसी के वॉलेट से बैंक अकाउंट में रकम आने में अधिकतम 10 मिनट ही लगते हैं.

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    जानें क्रिप्टोकरेंसी के नुकसान?
    >> क्रिप्टोकरेंसी का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इसके लिए कोई नियम नहीं है. क्रिप्टोकरेंसी को किसी राज्य या सरकार द्वारा नियंत्रित नहीं किया जाता है. यानी कि इसे कंट्रोल करने के लिए कोई देश, सरकार या संस्था नहीं है जिससे इसकी कीमत कभी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है तो कभी बहुत ज्यादा गिर जाती है, ऐसे में इसमें इन्वेस्ट करना जोखिम भरा है.
    >> क्रिप्टोकरेंसी का लेनदेन एक कोड और पासवर्ड के जरिए किया जाता है. जिसे भूलने पर इसमें लगाई पूरी रकम डूब जाती है. रकम को वापस नहीं पाया जा सकता.
    >> इसका इस्तेमाल अवैध तरीके से रकम को एक जगह से दूसरी जगह भेजने में किया जा सकता है. यही वजह है कि क्रिप्टो कई देशों में बैन है.

    भारत में क्रिप्टो को लेकर क्या कानून है?
    भारत में कई साल से लोग क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर रहे हैं. इसे लेकर कोई नियम नहीं है. भारत में इसे रेगुलेट किया जा सकता है लेकिन फिलहाल कुछ भी साफ नहीं है. हाल में खबर आई है कि भारत सरकार ने संसद में क्रिप्टो करेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ़ ऑफ़िशियल डिजिटल करेंसी बिल पेश करने का फ़ैसला लिया है. यह विधेयक भारत में क्रिप्टो करेंसी के इस्तेमाल को क़ानूनी रूप से नियंत्रित करेगा. हालांकि, इसके बारे में अभी तक खुलकर बयान नहीं आया है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण साफ कर चुकी हैं कि सरकार की योजना क्रिप्टोकरेंसी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की नहीं है. असल में सरकार क्रिप्टो करेंसी के आधार वाली तकनीक ब्लॉकचेन को रक्षा कवच देना चाहती है.

    क्या केंद्र सरकार अपनी करेंसी लाएगी?
    बीते महीने RBI और वित्त मंत्रालय कह चुका है कि वे भारत की ख़ुद की डिजिटल करेंसी और उसके विनियमन के लिए क़ानून बनाने पर विचार करेंगे. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल लीगल टेंडर को जारी करना चुनौतीपूर्ण है.

    क्या है RBI का रुख?
    साल 2018 में RBI के बैंकों को दिए निर्देश के बाद भारत में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश लगभग रुक गया था. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. मार्च 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने RBI के सर्कुलर को खारिज कर दिया जिससे निवेशकों के लिए क्रिप्टोकरेंसी में निवेश का रास्ता फिर खुल गया. उस समय कोर्ट ने सरकार से कहा था कि वह इसके लिए कानून बनाए. ऐसे में अभी तक भारत में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करना लीगल है. कुछ दिन पहले ही RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि उन्हें क्रिप्टो को लेकर खास दिलचस्पी नहीं है.

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    क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
    WazirX के फाउंडर और CEO निश्चल शेट्टी ने News18 Hindi.com को एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा है कि भारत में अभी इसे लेकर बहुत कंफ्यूजन है लेकिन सरकार का रुख काफी सकारात्मक है. जल्द इसको लेकर गाइडलाइन जारी की जा सकती है.

    क्रिप्टो में निवेश से पहले रखें इन बातों का ध्यान
    निश्चल कहते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का खास ध्यान रखना चाहिए. जैसे कि निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल कर लें. क्रिप्टो एक्सचेंज का रजिस्टर्ड पता कहां का है और क्या वह भारतीय कानून के अधीन निगमित है या नहीं. साथ ही यह चेक करें कि क्रिप्टो एक्सचेंज में किस-किस इन्वेस्टर ने अपनी रकम लगाई है. साथ ही आप जिस क्रिप्टोकेरेंसी में निवेश करना चाहते हैं उसे किस उद्देश्य से बनाया गया है.